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बढ़ रहा परिवार, घट रहा राशन
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 13 Jan 2016 11:44 PM IST
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जिले के लोगों को मिलने वाले सरकारी खद्यान्न में लगातार कटौती की जा रही है। राशन कार्ड तो बढ़े लेकिन कई साल से जिले को आपूर्ति किया जाने वाला राशन की मात्रा नहीं बढ़ाई गई। नतीजन, कार्डधारकों को मिलने वाले राशन में लगातार कटौती होने लगी। राशन ही नहीं कोटे से मिलने वाले केरोसिन की मात्रा भी पहले से कम कर दी गई है। एक परिवार को पांच लीटर मिलने वाला केरोसिन अब घटकर 2.5 लीटर तक पहुंच गया है। पहले एपीएल कार्डधारक को 3.5 किलो गेहूं मिलता था। अब 2.5 से 3 किलो ही दिया जा रहा है।
जिले में कुल आठ लाख के करीब राशनकार्डधारक हैं। इनमें 11, 9919 बीपीएल और 74190 अन्त्योदय शामिल हैं। यदि अन्त्योदय और बीपीएल को अलग कर दिया जाए तो लगभग 513525 कार्डधारक एपीएल के बचते हैं। बीपीएल व अन्त्योदय का तो फिलहाल कोटा होता है। इसलिए उन्हें राशन में कोई दिक्कत नहीं आती, लेकिन उनको मिलने वाले केरोसिन में कटौती होती जा रही है। एपीएल कार्डधारकों के राशन और तेल दोनों में बराबर कटौती हो रही है। हो यह रहा है कि कई साल से केरोसिन और राशन की आपूर्ति स्थिर है, जबकि राशनकार्डधारकों की संख्या बराबर बढ़ती जा रही है। आपूर्ति स्थिर होने के कारण उसी राशन और तेल में कटौती कर वितरित किया जाता है।
आधे पर पहुुंच गई है केरोसिन की मात्रा
प्रतापगढ़। शासनादेश के अनुसार गैस कनेक्शन धारकों को तीन लीटर व जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं है उन्हें पांच लीटर केरोसिन तेल दिया जाना चाहिए। इस आदेश का पालन कोटेदार किस तरह से कर रहे हैं यह सोचने की बात है। एक परिवार पर 2.5 लीटर का अनुपात आ रहा है। जिले को महज 2026 किलो लीटर यानी 2026000 लीटर तेल मिलता है। जबकि जिले में आठ लाख के करीब कार्डधारक हैं।
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गेहूं का भी यही हाल
प्रतापगढ़। एपीएल कार्डधारकों को भी राशन दिए जाने का प्रावधान है। लगभग साल भर से इस योजना का लाभ एपीएल कार्डधारकों को मिलने लगा है। बावजूद इसके राशन में भी कोटेदार को कटौती करनी पड़ती है। शिकायतें होती हैं और तमाम जांचें होती हैं जिसका कोई मतलब नहीं निकलता। इस पर विभागीय आदेश मिलता है कि लोगों को बांट-बांट कर दो।
खाद्य सुरक्षा मिशन से लोगों को उम्मीदें
जिले के लोगों को अप्रैल से लागू हो रहे राष्ट्रीय खाद्य मिशन से बहुत उम्मीदें हैं। राशन कटौती व केरोसिन कम मिलने का दंश झेल रहे लोगों को भरोसा है कि अप्रैल 2016 से लागू हो रही योजना से लोगों को लाभ मिलेगा। हर किसी को भरोसा है कि इससे लोगों को जरूरत पूरा करने भर के लिए राशन व केरोसिन मिल जाएगा। हालांकि अभी प्रदेश के दूसरे जिलों में ही योजना लागू की गई है। अप्रैल माह में बेल्हा की बारी आने की संभावना जताई जा रही है।
राशन की कमी है। इसकी डिमांड भी शासन को भेजी गई थी। जिले को 804 किलोलीटर केरोसिन की जरूरत है। अभी तो कोटेदारों को बांट-बांटकर कार्डधारकों को राशन देने का निर्देश दिया गया है। वैसे अप्रैल से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना लागू होने के बाद इस तरह की समस्या में कमी आएगी।
डीपी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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जिले में कुल आठ लाख के करीब राशनकार्डधारक हैं। इनमें 11, 9919 बीपीएल और 74190 अन्त्योदय शामिल हैं। यदि अन्त्योदय और बीपीएल को अलग कर दिया जाए तो लगभग 513525 कार्डधारक एपीएल के बचते हैं। बीपीएल व अन्त्योदय का तो फिलहाल कोटा होता है। इसलिए उन्हें राशन में कोई दिक्कत नहीं आती, लेकिन उनको मिलने वाले केरोसिन में कटौती होती जा रही है। एपीएल कार्डधारकों के राशन और तेल दोनों में बराबर कटौती हो रही है। हो यह रहा है कि कई साल से केरोसिन और राशन की आपूर्ति स्थिर है, जबकि राशनकार्डधारकों की संख्या बराबर बढ़ती जा रही है। आपूर्ति स्थिर होने के कारण उसी राशन और तेल में कटौती कर वितरित किया जाता है।
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आधे पर पहुुंच गई है केरोसिन की मात्रा
प्रतापगढ़। शासनादेश के अनुसार गैस कनेक्शन धारकों को तीन लीटर व जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं है उन्हें पांच लीटर केरोसिन तेल दिया जाना चाहिए। इस आदेश का पालन कोटेदार किस तरह से कर रहे हैं यह सोचने की बात है। एक परिवार पर 2.5 लीटर का अनुपात आ रहा है। जिले को महज 2026 किलो लीटर यानी 2026000 लीटर तेल मिलता है। जबकि जिले में आठ लाख के करीब कार्डधारक हैं।
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गेहूं का भी यही हाल
प्रतापगढ़। एपीएल कार्डधारकों को भी राशन दिए जाने का प्रावधान है। लगभग साल भर से इस योजना का लाभ एपीएल कार्डधारकों को मिलने लगा है। बावजूद इसके राशन में भी कोटेदार को कटौती करनी पड़ती है। शिकायतें होती हैं और तमाम जांचें होती हैं जिसका कोई मतलब नहीं निकलता। इस पर विभागीय आदेश मिलता है कि लोगों को बांट-बांट कर दो।
खाद्य सुरक्षा मिशन से लोगों को उम्मीदें
जिले के लोगों को अप्रैल से लागू हो रहे राष्ट्रीय खाद्य मिशन से बहुत उम्मीदें हैं। राशन कटौती व केरोसिन कम मिलने का दंश झेल रहे लोगों को भरोसा है कि अप्रैल 2016 से लागू हो रही योजना से लोगों को लाभ मिलेगा। हर किसी को भरोसा है कि इससे लोगों को जरूरत पूरा करने भर के लिए राशन व केरोसिन मिल जाएगा। हालांकि अभी प्रदेश के दूसरे जिलों में ही योजना लागू की गई है। अप्रैल माह में बेल्हा की बारी आने की संभावना जताई जा रही है।
राशन की कमी है। इसकी डिमांड भी शासन को भेजी गई थी। जिले को 804 किलोलीटर केरोसिन की जरूरत है। अभी तो कोटेदारों को बांट-बांटकर कार्डधारकों को राशन देने का निर्देश दिया गया है। वैसे अप्रैल से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना लागू होने के बाद इस तरह की समस्या में कमी आएगी।
डीपी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी