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होटल के कचरे में दफन हैं कई राज!
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:24 PM IST
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होटल गोयल रेजीडेंसी में लगी आग में क्या सिर्फ दस लोग ही मरे थे यह सवाल लोगों के मन में अभी भी कौंध रहा है। शुक्रवार को होटल खोलकर घटनास्थल का कचरा निकालकर जब बाहर सड़क पर फेंका गया तो उसमें निकल रही दुर्गंध और जलकर राख हुए सामानों के बचे अवशेषों को देखकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं।
करीब पांच महीने पहले होटल के अंदर रहस्यमय तरीके से लगी भयानक आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली थीं। किसी का बेटा, किसी का पति और किसी के पिता आग में जलकर मर गए। प्रशासन ने दस लोगों के मरने की पुष्टि की थी। इस आंकड़े को लेकर भी अब सवाल हो रहे हैं। जिस रजिस्टर में होटल में ठहरे लोगों का नाम-पता और रिकार्ड दर्ज था वो रजिस्टर भी संदिग्ध परिस्थतियों में जलकर राख हो गया था। कोई सबूत प्रशासन के हाथ न लगने पाए, इसके लिए होटल वालों ने सीसीटीवी कैमरा के साथ खेल कर दिया। उसका सीपीयू ही गायब कर दिया था।
जो अभी तक नहीं मिला। मोहल्ले वालों का कहना है कि घटना के बाद भी होटल रात-बिरात खुलता था। उसमें से सामान ले जाना और लाकर रखा जाता था। ऐसा अक्सर होता था। एक तरफ तो एसडीएम होटल को सील करने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर होटल खोलकर उसमें से सामान रखा और निकाला जा रहा है, जैसा कि लोगों के बीच चर्चा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर होटल वास्तव में सीज किया गया था तो उसकी सुरक्षा का जिम्मा पुलिस का होता है। चौकी पुलिस का कहना है कि उनको सील होने की जानकारी नहीं है।
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अगर होटल सीज नहीं था तो निश्चित तौर पर उसको खोलकर रात-बिरात साक्ष्य मिटाने का मौका जिम्मेदार लोगों ने होटल वालों को दिया। इसमें कोई दो राय नहीं है। शुक्रवार को पांच महीने बाद होटल को खोलकर उसकी साफ-सफाई की जा रही थी। लोग वहां का नजारा देख चौक गए। लोगों की भीड़ जमा होने लगी। होटल से निकले कचरे की ओर जब लोगों की निगाह गई तो लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोगों का कहना था कि घटना से संबंधित जो भी साक्ष्य बचा रहा होगा उसको कचरे की आड़ में साफ कर दिया जा रहा है। अगर कचरे की जांच कराई जाए तो इसमें से भी चौंकाने वाले कई राज बाहर आ सकते हैं। कचरे से उठती दुर्गंध ने आस-पास के दुकानदारों और होटलों वालों का बैठना दूभर कर दिया है।
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करीब पांच महीने पहले होटल के अंदर रहस्यमय तरीके से लगी भयानक आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली थीं। किसी का बेटा, किसी का पति और किसी के पिता आग में जलकर मर गए। प्रशासन ने दस लोगों के मरने की पुष्टि की थी। इस आंकड़े को लेकर भी अब सवाल हो रहे हैं। जिस रजिस्टर में होटल में ठहरे लोगों का नाम-पता और रिकार्ड दर्ज था वो रजिस्टर भी संदिग्ध परिस्थतियों में जलकर राख हो गया था। कोई सबूत प्रशासन के हाथ न लगने पाए, इसके लिए होटल वालों ने सीसीटीवी कैमरा के साथ खेल कर दिया। उसका सीपीयू ही गायब कर दिया था।
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जो अभी तक नहीं मिला। मोहल्ले वालों का कहना है कि घटना के बाद भी होटल रात-बिरात खुलता था। उसमें से सामान ले जाना और लाकर रखा जाता था। ऐसा अक्सर होता था। एक तरफ तो एसडीएम होटल को सील करने का दावा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर होटल खोलकर उसमें से सामान रखा और निकाला जा रहा है, जैसा कि लोगों के बीच चर्चा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर होटल वास्तव में सीज किया गया था तो उसकी सुरक्षा का जिम्मा पुलिस का होता है। चौकी पुलिस का कहना है कि उनको सील होने की जानकारी नहीं है।
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अगर होटल सीज नहीं था तो निश्चित तौर पर उसको खोलकर रात-बिरात साक्ष्य मिटाने का मौका जिम्मेदार लोगों ने होटल वालों को दिया। इसमें कोई दो राय नहीं है। शुक्रवार को पांच महीने बाद होटल को खोलकर उसकी साफ-सफाई की जा रही थी। लोग वहां का नजारा देख चौक गए। लोगों की भीड़ जमा होने लगी। होटल से निकले कचरे की ओर जब लोगों की निगाह गई तो लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोगों का कहना था कि घटना से संबंधित जो भी साक्ष्य बचा रहा होगा उसको कचरे की आड़ में साफ कर दिया जा रहा है। अगर कचरे की जांच कराई जाए तो इसमें से भी चौंकाने वाले कई राज बाहर आ सकते हैं। कचरे से उठती दुर्गंध ने आस-पास के दुकानदारों और होटलों वालों का बैठना दूभर कर दिया है।