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मनरेगा में दस लाख रुपए के घपले की फाइलें तलब
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 12 Jun 2015 12:03 AM IST
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जिले की आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए गए कार्यों में करीब दस लाख रुपए का घपला हुआ है। सोशल आडिट रिपोर्ट में पकड़े गए इस मामले की फाइल जिला समन्वयक डॉ. असित कुमार सिंह ने अधिकारियों को सौंप दी। कई माह से इस फाइल को दबाकर अधिकारी दोषियों को बचा रहे थे। भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले को ‘अमर उजाला’ बुधवार के अंक प्रकाशित किया तो खबर को संज्ञान में लेते हुए सीडीओ मनीष कुमार वर्मा ने रिपोर्ट की फाइल तलब की। डीडीओ व डीपीआर को कड़ी फटकार भी लगाई।
बेलखरनाथ विकास खंड के मरुआन गांव में मनरेगा से कई अपात्रों की जमीन में बंधा बना दिया। अरविंद यादव नामक व्यक्ति ने प्रकरण की शिकायत थी। जांच सोशल आडिट टीम को मिली। 30 जनवरी 2015 को आडिट टीम ने पड़ताल कर रिपोर्ट अफसरों को सौंप दी। दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि अपात्रों की जमीन में बंधा बनवाया गया है। जिन लोगों की भूमि में बंधा कार्य हुआ है वह लाखों रुपए के मालिक और संपन्न व्यक्ति हैं। रिपोर्ट में सात लाख चार हजार 412 रुपए 66 पैसे का घपला उजागर किया गया। इसी तरह मंगरौरा विकास खंड के चंदौका ग्राम पंचायत में रामकिशोर आदि की शिकायत पर टीम ने जांच की। पाया कि कागज पर जिस व्यक्ति के कुएं का जीर्णोद्धार हुआ है उसके पास कुआं है ही नहीं। इस मामले में 33 हजार 675 रुपए के घपले की रिपोर्ट सात फरवरी 2015 को सौंपी गई थी।
सदर ब्लाक के महुआर ग्राम पंचायत में मो. गुलशाम आदि की शिकायत पर सोशल आडिट टीम ने जांच की। पाया था कि कब्रिस्तान से मुस्लिम बस्ती तक संपर्क मार्ग का काम मशीन से कराया हुआ है। फंसने के डर से कराए गए कार्य के कागजात टीम को नहीं दिए गए। इस मामले में करीब एक लाख रुपए के घपले की आशंका जांच अधिकारी ने व्यक्त की थी । मानधाता के मझिगवां में अर्जुन यादव की शिकायत पर पड़ताल हुई तो मिला कि लखपतियों की जमीन में समतलीकरण का काम कराया गया है। राकेश के घर से बहरिया नाला की सफाई व खुदाई कार्य हुआ ही नहीं और काम कराने के नाम पर पैसा निकाल लिया गया। इस तरह लगभग एक लाख 52 हजार 365 रुपए के घपले की रिपोर्ट छह मई 2015 को सौंपी गई। पट्टी विकास खंड के धनसार ग्राम पंचायत में तकरीबन 23 हजार रुपए की रायल्टी धनराशि निकाल ली गई। बाबागंज के विधासिन गांव में भी 25 हजार 750 रुपए का अनाधिकृत रूप से भुगतान का मामला पकड़ा गया। अफसरों को सौंपी गई जांच की फाइल को वे दबा कर बैठ गए। कई माह से दबे घमले के प्रकरण को अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो सीडीओ ने प्रकरण की प्राइल तलब कर ली। डीडीओ व डीपीआरओ को फटकार लगाते हुए उन्होने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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बेलखरनाथ विकास खंड के मरुआन गांव में मनरेगा से कई अपात्रों की जमीन में बंधा बना दिया। अरविंद यादव नामक व्यक्ति ने प्रकरण की शिकायत थी। जांच सोशल आडिट टीम को मिली। 30 जनवरी 2015 को आडिट टीम ने पड़ताल कर रिपोर्ट अफसरों को सौंप दी। दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि अपात्रों की जमीन में बंधा बनवाया गया है। जिन लोगों की भूमि में बंधा कार्य हुआ है वह लाखों रुपए के मालिक और संपन्न व्यक्ति हैं। रिपोर्ट में सात लाख चार हजार 412 रुपए 66 पैसे का घपला उजागर किया गया। इसी तरह मंगरौरा विकास खंड के चंदौका ग्राम पंचायत में रामकिशोर आदि की शिकायत पर टीम ने जांच की। पाया कि कागज पर जिस व्यक्ति के कुएं का जीर्णोद्धार हुआ है उसके पास कुआं है ही नहीं। इस मामले में 33 हजार 675 रुपए के घपले की रिपोर्ट सात फरवरी 2015 को सौंपी गई थी।
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सदर ब्लाक के महुआर ग्राम पंचायत में मो. गुलशाम आदि की शिकायत पर सोशल आडिट टीम ने जांच की। पाया था कि कब्रिस्तान से मुस्लिम बस्ती तक संपर्क मार्ग का काम मशीन से कराया हुआ है। फंसने के डर से कराए गए कार्य के कागजात टीम को नहीं दिए गए। इस मामले में करीब एक लाख रुपए के घपले की आशंका जांच अधिकारी ने व्यक्त की थी । मानधाता के मझिगवां में अर्जुन यादव की शिकायत पर पड़ताल हुई तो मिला कि लखपतियों की जमीन में समतलीकरण का काम कराया गया है। राकेश के घर से बहरिया नाला की सफाई व खुदाई कार्य हुआ ही नहीं और काम कराने के नाम पर पैसा निकाल लिया गया। इस तरह लगभग एक लाख 52 हजार 365 रुपए के घपले की रिपोर्ट छह मई 2015 को सौंपी गई। पट्टी विकास खंड के धनसार ग्राम पंचायत में तकरीबन 23 हजार रुपए की रायल्टी धनराशि निकाल ली गई। बाबागंज के विधासिन गांव में भी 25 हजार 750 रुपए का अनाधिकृत रूप से भुगतान का मामला पकड़ा गया। अफसरों को सौंपी गई जांच की फाइल को वे दबा कर बैठ गए। कई माह से दबे घमले के प्रकरण को अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो सीडीओ ने प्रकरण की प्राइल तलब कर ली। डीडीओ व डीपीआरओ को फटकार लगाते हुए उन्होने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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