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प्रतापगढ : स्कूल अवैध होते तो बुलडोजर आ जाता, सरकारी हैं इसलिए तोड़ने वाले नहीं मिल रहे
Sat, 02 Jul 2022 01:27 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 Jul 2022 01:27 AM IST
सार
बताते हैं कि यह इतना अधिक है कि नीलामी के दौरान कोई बोली लगाने ही हिम्मत नहीं कर पाया। जर्जर भवनों के नहीं गिराए जाने से इसी परिसर के दूसरे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि ये बच्चे दोपहर में खेलते हुए यहां तक पहुंच जाते हैं।
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विस्तार
अगर ये भवन अवैध बने होते तो सरकारी बुलडोजर इन्हें जमींदोज करने के लिए दौड़ा चला आता, लेकिन मामला सरकारी स्कूलों का है इसलिए इन्हें गिराने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा। दो बार विज्ञापन भी निकाला गया, लेकिन जिले के 17 विकास खंडों में 389 परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवन गिराए नहीं जा सके। इन निष्प्रयोज्य भवनों को तोड़ने के लिए ठेकेदारोें के नहीं मिलने के पीछे पूर्व में हुआ मूल्यांकन है।
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बताते हैं कि यह इतना अधिक है कि नीलामी के दौरान कोई बोली लगाने ही हिम्मत नहीं कर पाया। जर्जर भवनों के नहीं गिराए जाने से इसी परिसर के दूसरे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि ये बच्चे दोपहर में खेलते हुए यहां तक पहुंच जाते हैं। इससे बच्चों के अभिभावक न सिर्फ चिंतित हैं, बल्कि खस्ताहाल स्कूलों को ध्वस्त किए जाने की कई बार मांग भी उठा चुके हैं।
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दर्असल, शासन के निर्देश पर संबंधित स्कूल भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। इसमें पीडब्ल्यूडी, सिंचाई व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारी शामिल थे। टीम के सदस्यों ने जर्जर भवनों का स्थलीय निरीक्षण और मूल्यांकन करने के बाद नीलामी कराने की स्वीकृति दी। इसके बाद बीएसए कार्यालय की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी की तिथि निर्धारित की गई।
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अधिक बोली लगाने वाली संस्था को ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी, लेकिन यह कोशिश कामयाब हो न सकी। बताते हैं कि तकनीकी समिति ने निष्प्रयोज्य भवनों का मूल्यांकन इतना अधिक कर दिया है कि नीलामी प्रक्रिया में कोई शामिल होने के लिए तैयार ही नहीं है। विभाग ने थक-हारकर दो बार विज्ञापन निकाला और नीलामी की तिथि भी बदली, मगर कोई ठेकेदार आगे नहीं आया।
तकनीकी पेच से मामला अधर में लटकने से अभिभावक परेशान हैं। लक्ष्मणपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल पतुलकी, सड़वा चंद्रिका विकास खंड के प्राइमरी स्कूल सरायदली, नगर के पुराना मालगोदाम रोड स्थित राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल, शिवगढ़ के प्राइमरी स्कूल गारापुर और छानापार की बिल्डिंग बेहद जर्जर अवस्था में है। किसी भी दिन कोई हादसा हो सकता है।
अलग-अलग स्कूल भवनों के लिए अलग-अलग मूल्यांकन
परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों को ढहाए जाने से पहले मूल्यांकन के लिए गठित समिति ने अलग-अलग रेट तय किए थे। समिति ने स्कूलों के जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए डेढ़ से चार लाख रुपये तक कीमत लगाई थी। ठेकेदार इतने रुपये देने के लिए तैयार नहीं हैं।
जर्जर भवनों को ध्वस्त कराने के लिए पहले जो मूल्यांकन किया गया था, उसमें समिति ने परिवर्तन किया है। जल्द ही विज्ञापन जारी कर जर्जर भवनों की नीलामी कराई जाएगी। - भूपेंद्र सिंह, बीएसए