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प्रतापगढ़: अभिभावकों पर बढ़ा बोझ, कमीशन के फेर में बदल दी किताबें
Fri, 05 Apr 2019 12:19 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 05 Apr 2019 12:19 AM IST
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निजी स्कूलों की मनमानी झेल रहे अभिभावकों को इस बार दोहरा झटका लगा है। शहर के पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूलों ने नए सत्र में फीस में 20 फीसदी वृद्धि करने के साथ ही कमीशन के फेर में किताबें भी बदल दी गई हैं। स्कूल संचालकों की मनमानी का आलम यह है कि सीबीएसई के कड़े निर्देश के बाद भी निजी प्रकाशकों की किताबें लागू कर दी गई हैं। इसके जरिए स्कूल प्रबंधन को प्रकाशकों से मोटा कमीशन मिलता है।
जबकि सरकार का सख्त निर्देश है कि एनसीईआरटी की किताबें ही लागू की जाएंगी। दूसरी ओर अभिभावकों की कोई सुनने वाला नहीं है। जिन अफसरों पर निगरानी का जिम्मा है, वह शिकायत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
सरकारी नियम के मुताबिक निजी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही लागू करनी हैं। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन, मनमानी पर उतरे निजी स्कूल हर साल नई किताबें लागू कर रहे हैं। इसमें सीधा खेल कमीशन का है। प्रकाशक किताबों के बदले स्कूल प्रबंधन को मोटी रकम मुहैया कराते हैं। किताबें भी मनमाने दाम पर बेची जाती हैं। या तो स्कूल परिसर में ही दुकान खोल दी जाती है या फिर अभिभावकों को दुकान के नाम-पते की पर्ची थमा दी जाती है।
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हर कक्षा के बच्चों के नाम की लिस्ट भी दुकान वालों के पास होती है। जैसे-जैसे किताबें बिकती हैं, स्कूल प्रबंधन को सूचना दी जाती है। यह भी सूचना दी जाती है कि किस बच्चे के अभिभावक ने किताब नहीं ली है। महंगाई से परेशान अभिभावकों पर सीधे तौर पर यह दोहरी मार है। निजी कंपनियों में नौकरी करने वालों के वेतन में मात्र पांच से छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि शहर के पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र में फीस 10 से 20 फीसदी के बीच बढ़ा दी गई है। किताबों का बोझ अलग से। नौकरीपेशा अभिभावकों का अप्रैल का पूरा वेतन बच्चों की फीस एवं किताबों की भेंट चढ़ रहा है।
कक्षा एक की किताबों की कीमत पांच हजार
निजी प्रकाशकों की पुस्तकों में अधिक कमीशन मिलता है। यही कारण है कि निजी संस्थान इनका संचालन करते हैं। अभिभावक मजबूर होकर पुस्तकें खरीदते हैं। मनमानी इस कदर है कि अंग्रेजी स्कूलों की कक्षा एक तक की किताबें भी पांच हजार रुपये में दी जा रही हैं। सातवीं-आठवीं और इससे ऊपर की कक्षाओं की किताबों के लिए आठ से दस हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
नौ से 12 तक की कक्षाओं में निर्धारित विषयों की पुस्तकें संचालित करना अनिवार्य
कक्षा नौ व दस में तीन विषय की एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य दी गई हैं। विज्ञान, सामाजिक विषय, गणित। जबकि कक्षा 11 व 12 में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र की एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य दी गई है। डीआईओएस डा. एसपी यादव ने बताया कि निर्धारित गाइड लाइन के अनुरूप ही विद्यालयों में पुस्तकों का संचालन होगा। नियम का अतिक्रमण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी।
शासन की गाइड लाइन के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तकों से विद्यालयों में पठन-पाठन होगा। नियम का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ की जाएगी। जल्द ही टीमें गठित की जाएंगी। जो विद्यालयों के साथ ही किताबों की दुकानों की भी पड़ताल करेंगी। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
डा. एसपी यादव, डीआईओएस।
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जबकि सरकार का सख्त निर्देश है कि एनसीईआरटी की किताबें ही लागू की जाएंगी। दूसरी ओर अभिभावकों की कोई सुनने वाला नहीं है। जिन अफसरों पर निगरानी का जिम्मा है, वह शिकायत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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सरकारी नियम के मुताबिक निजी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही लागू करनी हैं। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन, मनमानी पर उतरे निजी स्कूल हर साल नई किताबें लागू कर रहे हैं। इसमें सीधा खेल कमीशन का है। प्रकाशक किताबों के बदले स्कूल प्रबंधन को मोटी रकम मुहैया कराते हैं। किताबें भी मनमाने दाम पर बेची जाती हैं। या तो स्कूल परिसर में ही दुकान खोल दी जाती है या फिर अभिभावकों को दुकान के नाम-पते की पर्ची थमा दी जाती है।
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हर कक्षा के बच्चों के नाम की लिस्ट भी दुकान वालों के पास होती है। जैसे-जैसे किताबें बिकती हैं, स्कूल प्रबंधन को सूचना दी जाती है। यह भी सूचना दी जाती है कि किस बच्चे के अभिभावक ने किताब नहीं ली है। महंगाई से परेशान अभिभावकों पर सीधे तौर पर यह दोहरी मार है। निजी कंपनियों में नौकरी करने वालों के वेतन में मात्र पांच से छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि शहर के पब्लिक एवं कान्वेंट स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र में फीस 10 से 20 फीसदी के बीच बढ़ा दी गई है। किताबों का बोझ अलग से। नौकरीपेशा अभिभावकों का अप्रैल का पूरा वेतन बच्चों की फीस एवं किताबों की भेंट चढ़ रहा है।
कक्षा एक की किताबों की कीमत पांच हजार
निजी प्रकाशकों की पुस्तकों में अधिक कमीशन मिलता है। यही कारण है कि निजी संस्थान इनका संचालन करते हैं। अभिभावक मजबूर होकर पुस्तकें खरीदते हैं। मनमानी इस कदर है कि अंग्रेजी स्कूलों की कक्षा एक तक की किताबें भी पांच हजार रुपये में दी जा रही हैं। सातवीं-आठवीं और इससे ऊपर की कक्षाओं की किताबों के लिए आठ से दस हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
नौ से 12 तक की कक्षाओं में निर्धारित विषयों की पुस्तकें संचालित करना अनिवार्य
कक्षा नौ व दस में तीन विषय की एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य दी गई हैं। विज्ञान, सामाजिक विषय, गणित। जबकि कक्षा 11 व 12 में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र की एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य दी गई है। डीआईओएस डा. एसपी यादव ने बताया कि निर्धारित गाइड लाइन के अनुरूप ही विद्यालयों में पुस्तकों का संचालन होगा। नियम का अतिक्रमण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी।
शासन की गाइड लाइन के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तकों से विद्यालयों में पठन-पाठन होगा। नियम का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ की जाएगी। जल्द ही टीमें गठित की जाएंगी। जो विद्यालयों के साथ ही किताबों की दुकानों की भी पड़ताल करेंगी। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
डा. एसपी यादव, डीआईओएस।