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प्रबोधिनी एकादशी पर विधि विधान से पूजे गए शालिग्राम
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 31 Oct 2017 11:21 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
- फोटो : pratapgarah
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मंगलवार को जिले भर में देवोत्थान एकादशी धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान लोगों ने व्रत धारण कर वैदिकमंत्रों के बीच भगवान शालिग्राम की पूजा की। आवंला के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलाया। शाम को हड़ाहडय़ा खेल की परंपराएं भी निभाई गईं। दर्शन-पूजन के लिए मंदिरों में भीड़ उमड़ी रही।
शहर के रामानुज आश्रम में वैष्णव भक्तों ने देवोत्थानी एकादशी पर वैदिक मंत्रों के बीच पूरे विधि विधान से भगवान शालिग्राम का पूजन किया। आचार्य ओमप्रकाश पांडेय ने देवोत्थान एकादशी के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान नारायण आषाण मास में शयन करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। भगवान एक रूप में राजा बलि के यहां सुतल लोक में तथा एक रूप में क्षीर सागर पर शेष शय्या पर विराजते हैं। भगवान योग निद्रा में रहकर संसार को देखते रहते हैं। भगवान कृष्ण ने भी धर्मराज युद्धिष्ठिर से इसके महात्म्य का वर्णन किया। कहा कि यह पाप का नाश कर पुण्य की वृद्धि तथा उत्तम बुद्धि वाले मनुष्यों को मोक्ष प्रदान करने वाली है। प्रबोधनी का एक ही उपवास कर लेने पर मनुष्य हजार अवश्वमेध यज्ञ का फल पा लेता है। इस अवसर पर आचार्य आलोक ज्योतिषि, आचार्य अतुलानंद नारायणी, शिवम मिश्र, डा. अवंतिका पांडेय, बैदेही शुक्ल, डा. विवेक पांडेय, ओम प्राकश यादव, हरिश्चन्द्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।
इसी तरह भगवा चुंगी स्थित जिला कार्यालय पर देवोत्थान एकादशी पर अखिल भारतीय इंजीनियर्स संघ की बैठक हुई। बैठक में इंजीनियर्स की लगातार बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की गई। अध्यक्षता इंजीनियर आलोक सतीश श्रीवास्तव तथा संचालन इंजीनियर आनंद कुमार ने किया।
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बाजार में कम पड़ गया गन्ने का स्टाकः प्रबोधिनी एकादशी पर गन्ने का इस्तेमाल प्रमुखता से किया जाता है। कटरामेदनीगंज में बाजार में शाम होते ही गन्ने का स्टाक खत्म हो गया।
प्रबोधिनी एकादशी पर घर-घर तुलसी की विधि-विधान से पूजी गई। महिलाओं ने घरों में तुलसी के पौधे का पूजन अर्चन आरती उतारी। शहर से लेकर गांव तक मां तुलसी के प्रति भक्ति और आस्था का विहंगम नजारा दिखा। प्रबोधिनी एकादशी को लेकर तुलसी पूजन का महात्म्य है। एकादशी व्रती महिलाएं पूजन के लिए शाम होने का इंतजार कर रही थीं। जैसे ही सूर्यअस्त हुआ, महिलाएं पूजन थाल सजाकर तुलसी के पौधे के पास पहुंच गईं। आरती उतारकर परिवार सहित मत्था टेककर मन्नत मांगी।
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शहर के रामानुज आश्रम में वैष्णव भक्तों ने देवोत्थानी एकादशी पर वैदिक मंत्रों के बीच पूरे विधि विधान से भगवान शालिग्राम का पूजन किया। आचार्य ओमप्रकाश पांडेय ने देवोत्थान एकादशी के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान नारायण आषाण मास में शयन करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। भगवान एक रूप में राजा बलि के यहां सुतल लोक में तथा एक रूप में क्षीर सागर पर शेष शय्या पर विराजते हैं। भगवान योग निद्रा में रहकर संसार को देखते रहते हैं। भगवान कृष्ण ने भी धर्मराज युद्धिष्ठिर से इसके महात्म्य का वर्णन किया। कहा कि यह पाप का नाश कर पुण्य की वृद्धि तथा उत्तम बुद्धि वाले मनुष्यों को मोक्ष प्रदान करने वाली है। प्रबोधनी का एक ही उपवास कर लेने पर मनुष्य हजार अवश्वमेध यज्ञ का फल पा लेता है। इस अवसर पर आचार्य आलोक ज्योतिषि, आचार्य अतुलानंद नारायणी, शिवम मिश्र, डा. अवंतिका पांडेय, बैदेही शुक्ल, डा. विवेक पांडेय, ओम प्राकश यादव, हरिश्चन्द्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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इसी तरह भगवा चुंगी स्थित जिला कार्यालय पर देवोत्थान एकादशी पर अखिल भारतीय इंजीनियर्स संघ की बैठक हुई। बैठक में इंजीनियर्स की लगातार बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की गई। अध्यक्षता इंजीनियर आलोक सतीश श्रीवास्तव तथा संचालन इंजीनियर आनंद कुमार ने किया।
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बाजार में कम पड़ गया गन्ने का स्टाकः प्रबोधिनी एकादशी पर गन्ने का इस्तेमाल प्रमुखता से किया जाता है। कटरामेदनीगंज में बाजार में शाम होते ही गन्ने का स्टाक खत्म हो गया।
प्रबोधिनी एकादशी पर घर-घर तुलसी की विधि-विधान से पूजी गई। महिलाओं ने घरों में तुलसी के पौधे का पूजन अर्चन आरती उतारी। शहर से लेकर गांव तक मां तुलसी के प्रति भक्ति और आस्था का विहंगम नजारा दिखा। प्रबोधिनी एकादशी को लेकर तुलसी पूजन का महात्म्य है। एकादशी व्रती महिलाएं पूजन के लिए शाम होने का इंतजार कर रही थीं। जैसे ही सूर्यअस्त हुआ, महिलाएं पूजन थाल सजाकर तुलसी के पौधे के पास पहुंच गईं। आरती उतारकर परिवार सहित मत्था टेककर मन्नत मांगी।