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तो पट्टी विस से राम सिंह ही होंगे सपा प्रत्याशी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:15 AM IST
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सोमवार को चुनाव आयोग द्वारा अखिलेश यादव के गुट को साइकिल सिंबल देने के बाद जिले के सपाइयों में भी हलचल है। हालांकि यहां के अधिकांश बड़े नेता और कार्यकर्ता अखिलेश गुट के ही साथ हैं, लेकिन लंबे समय से मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव से जुड़े लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। अब सभी को मुलायम के अगले कदम का इंतजार है। उधर, आयोग के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि सपा के उम्मीदवार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा घेाषित लोग ही माने जाएंगे। ऐसे में जिले की पट्टी विधानसभा से विधायक राम सिंह पटेल को ही सपा का कंडीडेट माना जाएगा। आयोग के फैसले के बाद पट्टी से ही शिवपाल यादव द्वारा घोषित सूची में प्रत्याशी बनाए गए भइयाराम पटेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
समाजवादी पार्टी में चल रही रार के बाद जिले में भी सपाई दोफाड़ हो गए थे। हालांकि ज्यादातर विधायक और नेता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ रहने का ही दावा कर रहे थे। जिले की चार विधानसभा सीटों पर पहले शिवपाल यादव द्वारा प्रत्याशी घोषित किए गए। इसमें विश्वनाथगंज से संजय पांडेय, सदर से विधायक नागेंद्र यादव मुन्ना, रानीगंज से विधायक शिवाकांत ओझा और पट्टी से भइयाराम पटेल को प्रत्याशी बनाया गया था। शिवपाल की लिस्ट में पट्टी से विधायक राम सिंह पटेल का टिकट काट दिया गया था। इसके कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपनी सूची जारी कर दी। इसमें तीन सीटों पर तो प्रत्याशी एक ही थे, लेकिन पट्टी सीट पर विधायक राम सिंह पटेल का नाम था। पट्टी सीट पर दो-दो उम्मीदवार घोषित होने के बाद वहां सपाई भी बगावत पर उतर आए। राम सिंह के समर्थन में शिवपाल का पुतला तक फूंका गया। अब चुनाव आयोग द्वारा अखिलेश गुट को साइकिल निशान देने के बाद अब यह तय हो गया है कि राम सिंह ही सपा के अधिकृत प्रत्याशी माने जाएंगे। आयोग के फैसले के बाद भइयाराम पटेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आयोग के फैसले के मुताबिक अब वह साइकिल चुनाव निशान पर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे में वह अब सपा सुप्रीमो के अगले कदम का इंतजार करेंगे।
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समाजवादी पार्टी में चल रही रार के बाद जिले में भी सपाई दोफाड़ हो गए थे। हालांकि ज्यादातर विधायक और नेता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ रहने का ही दावा कर रहे थे। जिले की चार विधानसभा सीटों पर पहले शिवपाल यादव द्वारा प्रत्याशी घोषित किए गए। इसमें विश्वनाथगंज से संजय पांडेय, सदर से विधायक नागेंद्र यादव मुन्ना, रानीगंज से विधायक शिवाकांत ओझा और पट्टी से भइयाराम पटेल को प्रत्याशी बनाया गया था। शिवपाल की लिस्ट में पट्टी से विधायक राम सिंह पटेल का टिकट काट दिया गया था। इसके कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपनी सूची जारी कर दी। इसमें तीन सीटों पर तो प्रत्याशी एक ही थे, लेकिन पट्टी सीट पर विधायक राम सिंह पटेल का नाम था। पट्टी सीट पर दो-दो उम्मीदवार घोषित होने के बाद वहां सपाई भी बगावत पर उतर आए। राम सिंह के समर्थन में शिवपाल का पुतला तक फूंका गया। अब चुनाव आयोग द्वारा अखिलेश गुट को साइकिल निशान देने के बाद अब यह तय हो गया है कि राम सिंह ही सपा के अधिकृत प्रत्याशी माने जाएंगे। आयोग के फैसले के बाद भइयाराम पटेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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आयोग के फैसले के मुताबिक अब वह साइकिल चुनाव निशान पर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे में वह अब सपा सुप्रीमो के अगले कदम का इंतजार करेंगे।