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सियासत में खींचतान, दिग्गजों में घमासान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 13 Oct 2015 11:09 PM IST
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जिला पंचायत के दूसरे चरण के चुनाव में कई दिग्ग्जों के बीच मुकाबला दिलचस्प हुआ है। मंगलवार को मतदाताओं ने गंवई सियासत के माहिर खिलाड़ियों की किस्मत मतपेटियों में बंद कर दी। प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान जहां एक-एक वोट के लिए जोर लगाया, वहीं छुटभैये उम्मीदवारों ने उन्हें हर जगह उलझाए रखा। जिले की बड़ी सियासी हस्तियों ने भी चुनावी गतिविधियों पर नजर गड़ाए रखी। वे पल-पल की खबर लेते रहे। प्रत्याशियों के साथ ही कार्यकर्ता वोटिंग और अन्य गतिविधियों के बारे में उन्हें सूचना देते रहे।
दूसरे चरण में कई बड़े नाम मैदान में हैं। इनमें कई को राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन है। जिले के सियासी सूरमाओं ने भी उनके समर्थन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में मुकाबला कांटे का हो गया है। सुबह नौ बजे तक नवरात्र के कारण मतदान की रफ्तार काफी धीमी रही। इसके बाद प्रत्याशियों के एजेंटों और कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला। वोटरों को बूथ तक लाने के लिए कसरत शुरू हो गई। निजी संबंधों को भुनाने के साथ सियासी खींचतान भी मची। एक तरफ प्रत्याशी जोर लगाए हुए थे तो दूसरी तरफ दूर बैठे उनके आका भी फोन से सबकुछ मैनेज करते रहे। दोपहर होते-होते वोटिंग ने रफ्तार पकड़ी और बूथों पर मतदाताओं की लाइन लगने लगी।
तब जाकर उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली। सदर प्रथम, सदर द्वितीय, सदर तृतीय और संडवा चंद्रिका प्रथम से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे दिग्गजों ने एजेंटों और कार्यकर्ताओं को बूथ से लेकर गांवों तक फैला दिया। एक-एक वोट के लिए अंतिम समय तक मशक्कत होती रही। कोई भी खुद को उन्नीस मानने के लिए तैयार नहीं है।
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दूसरे चरण में कई बड़े नाम मैदान में हैं। इनमें कई को राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन है। जिले के सियासी सूरमाओं ने भी उनके समर्थन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में मुकाबला कांटे का हो गया है। सुबह नौ बजे तक नवरात्र के कारण मतदान की रफ्तार काफी धीमी रही। इसके बाद प्रत्याशियों के एजेंटों और कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला। वोटरों को बूथ तक लाने के लिए कसरत शुरू हो गई। निजी संबंधों को भुनाने के साथ सियासी खींचतान भी मची। एक तरफ प्रत्याशी जोर लगाए हुए थे तो दूसरी तरफ दूर बैठे उनके आका भी फोन से सबकुछ मैनेज करते रहे। दोपहर होते-होते वोटिंग ने रफ्तार पकड़ी और बूथों पर मतदाताओं की लाइन लगने लगी।
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तब जाकर उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली। सदर प्रथम, सदर द्वितीय, सदर तृतीय और संडवा चंद्रिका प्रथम से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे दिग्गजों ने एजेंटों और कार्यकर्ताओं को बूथ से लेकर गांवों तक फैला दिया। एक-एक वोट के लिए अंतिम समय तक मशक्कत होती रही। कोई भी खुद को उन्नीस मानने के लिए तैयार नहीं है।
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