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तमाम कवायदों के बाद मात्र तीन फीसदी बढ़ा मतदान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:09 AM IST
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मौका भी था, दस्तूर भी और मौसम भी साथ खड़ा हो गया। इसके बाद भी पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले मात्र तीन प्रतिशत ही मतदान ज्यादा हुआ। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी मतदान प्रतिशत अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ सका। दोपहर बाद बूथों पर सन्नाटा पसरा नजर आया।
विस चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन जिले के भी लोगों को उत्साहित कर रहा था। प्रशासन के साथ ही स्वयं सेवी संस्थाएं, स्कूल, कालेज मतदाता जागरूकता अभियान चला रहे थे लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद सारा अभियान फिस्स नजर आता दिखा। जिस तरह से मतदाता जारूकता अभियान चला और अन्य स्थानों का वोटिंग प्रतिशत सामने आया लोग यह उम्मीद लगाने लगे थे कि यहां भी 60 से 70 प्रतिशत लोग मतदान करेंगे। गुरुवार को मौसम भी साथ था।
सुबह आसमान में बादल होने के कारण धूप गायब हुई तो मतदान प्रतिशत बढने की उम्मीद बढ़ गई लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, उम्मीदें हवा होने लगीं। शाम को 56 प्रतिशत मतदान हुआ तो प्रशासन के साथ ही प्रत्याशियों ने कुछ राहत की सांस ली। हालांकि प्रत्याशियों के समर्थकों में वोटिंग प्रतिशत कम होने से निराशा भी दिखी। जिले में 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 53.70 था। ऐसे में पांच साल बाद जिले में हुए मतदान के बाद मतदाता जागरूकता अभियान किसी मतलब का नहीं दिखा जबकि लोगों को वोट देने के लिए लाखों रुपये सरकार और संस्थाओं ने खर्च कर दिया है।
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कब, कहां, कितना बढ़ा मतदान प्रतिशत?
विधानसभा उपचुनाव के लिए बने कंट्रोलरूम में हर दो घंटे पर मतदान प्रतिशत तैयार करने का निर्देश दिया गया था। जिले के सैकड़ों मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने व अन्य दिक्कतों के कारण पहले दो घंटे का मतदान नहीं रिकार्ड हो सका। सुबह 9 बजे तक जिले में 10.4 प्रतिशत, 11 बजे तक 25 प्रतिशत, 1 बजे तक 35 प्रतिशत, 3 बजे तक 52 प्रतिशत और मतदान समाप्त होने के बाद 56 प्रतिशत ही मतदान हो सका। 11 बजे के बाद हर दो घंटे पर मतदान बढने के जो आंकड़े आने लगे। उससे न केवल जिला प्रशासन बल्कि प्रत्याशियों को भी निराशा हाथ लगी।
विस चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन जिले के भी लोगों को उत्साहित कर रहा था। प्रशासन के साथ ही स्वयं सेवी संस्थाएं, स्कूल, कालेज मतदाता जागरूकता अभियान चला रहे थे लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद सारा अभियान फिस्स नजर आता दिखा। जिस तरह से मतदाता जारूकता अभियान चला और अन्य स्थानों का वोटिंग प्रतिशत सामने आया लोग यह उम्मीद लगाने लगे थे कि यहां भी 60 से 70 प्रतिशत लोग मतदान करेंगे। गुरुवार को मौसम भी साथ था।
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सुबह आसमान में बादल होने के कारण धूप गायब हुई तो मतदान प्रतिशत बढने की उम्मीद बढ़ गई लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, उम्मीदें हवा होने लगीं। शाम को 56 प्रतिशत मतदान हुआ तो प्रशासन के साथ ही प्रत्याशियों ने कुछ राहत की सांस ली। हालांकि प्रत्याशियों के समर्थकों में वोटिंग प्रतिशत कम होने से निराशा भी दिखी। जिले में 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 53.70 था। ऐसे में पांच साल बाद जिले में हुए मतदान के बाद मतदाता जागरूकता अभियान किसी मतलब का नहीं दिखा जबकि लोगों को वोट देने के लिए लाखों रुपये सरकार और संस्थाओं ने खर्च कर दिया है।
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कब, कहां, कितना बढ़ा मतदान प्रतिशत?
विधानसभा उपचुनाव के लिए बने कंट्रोलरूम में हर दो घंटे पर मतदान प्रतिशत तैयार करने का निर्देश दिया गया था। जिले के सैकड़ों मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने व अन्य दिक्कतों के कारण पहले दो घंटे का मतदान नहीं रिकार्ड हो सका। सुबह 9 बजे तक जिले में 10.4 प्रतिशत, 11 बजे तक 25 प्रतिशत, 1 बजे तक 35 प्रतिशत, 3 बजे तक 52 प्रतिशत और मतदान समाप्त होने के बाद 56 प्रतिशत ही मतदान हो सका। 11 बजे के बाद हर दो घंटे पर मतदान बढने के जो आंकड़े आने लगे। उससे न केवल जिला प्रशासन बल्कि प्रत्याशियों को भी निराशा हाथ लगी।