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मृतका के घर रातों-रात पहुंचाया गया राशन
प्रतापगढ़
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:25 PM IST
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pratapgarh
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बसहीपुर गांव की आशा बीमारी और भूख से लड़ रही थी। बच्चे जो भी कमाकर लाते थे वह दवाई पर ही खर्च हो जाता था। जमीन न होने के कारण राशन का जुगाड़ नहीं था और पात्र होने के बाद भी कोटेदार ने उसे राशन नहीं दिया था। यही नहीं वह कई महीनों से राशन भी नहीं बांट रहा है। इसकी पुष्टि गांव के लोगों ने भी की।
विकास खंड कुंडा के बसहीपुर गांव की निवासी आशा पांडेय पत्नी चंद्रिका प्रसाद पांडेय की मौत दो दिन पहले हो गई। सोमवार को इसकी जानकारी हुई तो प्रशासन के लोगों से पूछताछ शुरू हुई। पूछताछ की बात डीएम तक पहुंची तो उन्होंने एसडीएम सहित अन्य लोगों से उसके बारे में जानकारी करनी शुरू कर दी। इसका असर यह रहा कि रात में लेखपाल हरिश्चंद्र कानूनगो के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने रात में ही निरीक्षण किया तो उसके घर में राशन उस दिन भी नहीं था। इस पर वह गांव के प्रधान अजय पटेल के पास पहुंचे। रात में ही प्रधान से एक बोरी गेहूं और एक बोरी चावल दिलवाया गया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले में कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। प्रशासन ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि कोटेदार उसे राशन क्यों नहीं दे रहा था। ग्रामीणों के अनुसार किसी तरह से कोटेदार ने महिला की मदद नहीं की। वह बीमारी से तो जूझ ही रही थी अपने हक के लिए भी लड़ रही थी। अभी भी उसके बच्चों को राशन मिलने की उम्मीद नहीं है।
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विकास खंड कुंडा के बसहीपुर गांव की निवासी आशा पांडेय पत्नी चंद्रिका प्रसाद पांडेय की मौत दो दिन पहले हो गई। सोमवार को इसकी जानकारी हुई तो प्रशासन के लोगों से पूछताछ शुरू हुई। पूछताछ की बात डीएम तक पहुंची तो उन्होंने एसडीएम सहित अन्य लोगों से उसके बारे में जानकारी करनी शुरू कर दी। इसका असर यह रहा कि रात में लेखपाल हरिश्चंद्र कानूनगो के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने रात में ही निरीक्षण किया तो उसके घर में राशन उस दिन भी नहीं था। इस पर वह गांव के प्रधान अजय पटेल के पास पहुंचे। रात में ही प्रधान से एक बोरी गेहूं और एक बोरी चावल दिलवाया गया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले में कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। प्रशासन ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि कोटेदार उसे राशन क्यों नहीं दे रहा था। ग्रामीणों के अनुसार किसी तरह से कोटेदार ने महिला की मदद नहीं की। वह बीमारी से तो जूझ ही रही थी अपने हक के लिए भी लड़ रही थी। अभी भी उसके बच्चों को राशन मिलने की उम्मीद नहीं है।
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