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मतदान में वोटरों की बेरुखी ने उलझाए समीकरण

Fri, 24 Feb 2017 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Fri, 24 Feb 2017 11:36 PM IST
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noone confident in election
यूपी इलेक्शन 2017

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विधानसभा चुनाव में मात्र 55.84 प्रतिशत मतदान ने प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। कम मतदान के चलते नफा-नुकसान और जीत-हार का आंकलन करने वाले सियासी पंडित भी चकरा गए हैं। सदर, रानीगंज, पट्टी और विश्वनाथगंज में त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर बन रही है। पश्चिमी यूपी में भारी मतदान देखकर उत्साहित भगवा खेमा यहां भी अपनी जीत तय मान रहा है तो सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी पिछड़ी जाति और मुस्लिमों पर भरोसा कायम है। बसपा भी कॉडर वोटों और ब्राह्मणों के वोटों के साथ जीत का दम भरती नजर आ रही है। हालांकि तस्वीर तो 11 मार्च को ही साफ होगी। जिले की तीन विधानसभा की तस्वीर तो काफी हद तक साफ है, लेकिन चार सीटों पर कांटे का मुकाबला देखने को मिला है।

विश्वनाथगंज : कम मतदान से सबकी गणित फेल
विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर इस बार सबसे कम मतदान हुआ है। यहां महज 51.82 फीसदी लोग ही मतदान करने निकले। कम मतदान के चलते प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां से सपा के राजाराम पांडेय जीते थे। तब प्रदेश में सपा की लहर थी। उनके निधन के बाद 2014 के उपचुनाव में मोदी लहर में अद प्रत्याशी ने कुर्मी और सवर्ण वोटरों का साथ मिलने पर सपा प्रत्याशी और राजाराम पांडेय के बेटे संजय पांडेय को मात दी थी। इस बार संजय पांडेय कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। हालांकि उन्हें सपा का समर्थन प्राप्त है। चुनाव के दौरान यहां अद-भाजपा गठबंधन, कांग्रेस-सपा गठबंधन और बसपा के बीच त्रिकोणीय लड़ाई दिखी। कहीं अद-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी का सीधा मुकाबला-कांग्रेस-सपा के प्रत्याशी से दिखा तो कहीं बसपा प्रत्याशी दोनों पर हावी होते दिखे।
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चौंकाएंगी सदर की बदली फिजाएं
सदर विधानसभा क्षेत्र में 55.62 प्रतिशत मतदान हुआ है। इस बार लोगों का आकलन था कि यह 60 के ऊपर जाएगा। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा के नागेंद्र सिंह मुन्ना यादव ने बसपा प्रत्याशी को चुनाव में दस हजार मतों से हराया था। तीसरे नंबर पर भाजपा रही। जबकि अद ने अलग से प्रत्याशी मैदान में उतारा था। गुरुवार को चुनाव के दौरान बूथों पर भाजपा-अपना दल गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता और बसपा प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी के बीच सीधा मुकाबला दिखा। हालांकि सपा प्रत्याशी नागेंद्र यादव को कमतर नहीं आंका जा सकता। कई बूथों पर साइकिल की रफ्तार ठीक थी। बनिया, ब्राह्मण और राजपूत के साथ पिछड़ी जाति के मतों के मिलने से संगमलाल गुप्ता मजबूत नजर आ रहे हैं तो अशोक त्रिपाठी को बसपा के कॉडर वोट के साथ ब्राह्मणों और मुस्लिमों के वोट मिले हैं। नागेंद्र यादव मुन्ना भी मुस्लिम और पिछड़ी जाति के वोटरों के साथ लड़ाई में हैं। वोटरों के रुख से कहीं भाजपा-अद प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनता दिखा तो कहीं अशोक त्रिपाठी हाथी पर सवार नजर आए।
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रानीगंज : मतों के ध्रुवीकरण से तय होगी जीत-हार
रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में 55.83 प्रतिशत मतदान हुआ है। गत चुनाव में सपा के शिवाकांत ओझा ने बसपा के मंशा अहमद को 12 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। इस बार यहां से सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी शिवाकांत ओझा के मुकाबले भाजपा से धीरज ओझा और बसपा से शकील अहमद मैदान में रहे। तीनों के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की बात सामने आ रही है। इस सीट पर शिवाकांत ओझा अपने विकास कार्यों और यादव-मुस्लिमों के साथ पंडितों के वोट से कई जगह बढ़त बनाते नजर आए तो धीरज ओझा ने कई जगहों पर उन्हें रोका। बसपा प्रत्याशी शकील अहमद ने भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई है। इसके अलावा उनके साथ बसपा के मूल वोटर भी रहे। ऐसे में रानीगंज विधानसभा का नतीजा काफी हद तक मतों के धुव्रीकरण पर निर्भर करेगा।


पट्टी में कम अंतर से जीत-हार
जिले की पट्टी विधानसभा क्षेत्र पर पूरे जिले की निगाह है। सपा से सीट छीनने के लिए भाजपा ने पूर्व मंत्री मोती सिंह को मैदान में उतारा है। गत चुनाव में भाजपा के मोती सिंह को 156 मतों से रामसिंह ने हराया था। इस बार यहां का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यहां 61.16 प्रतिशत मतदान हुआ है। मतदान प्रतिशत बढने से भगवा खेमे में उत्साह है तो साइकिल भी हाथ के साथ से दौड़ती नजर आई। मतदान के दौरान पट्टी के कई बूथों पर बराबर की लड़ाई दिखी। मोती सिंह जहां सवर्ण और पिछड़ी जाति के वोटों के भरोसे आगे बढ़ते रहे तो यादव, मुस्लिम और कुर्मी वोटरों का साथ पाकर राम सिंह पटेल भी पूरी रफ्तार में थे। ऐसे में पट्टी का सियासी गणित फिर उलझा हुआ है। लड़ाई बराबर की मानी जा रही है। ऐसे में यहां फिर बहुत कम अंतर से जीत-हार का फैसला हो सकता है।
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