प्रतापगढ़ : तहसील कर्मचारी का कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम, रिपोर्ट में मिले इतने चोट के निशान
निवार रात घायल सुनील की मेडिकल कॉलेज में हुई मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ था। आधी रात को आरोपी एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद आक्रोशित कर्मचारी शव के पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए थे।
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लालगंज एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह व तीन अज्ञात लोगों की पिटाई से मरे नायब नाजिर के शरीर में नौ जगहों पर चोट के निशान मिले हैं। उसके फेफड़े में इंफेक्शन हो गया था। दो चिकित्सकों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच उसके शव का पोस्टमार्टम किया। बवाल की आशंका को देखते हुए प्रभारी सीएमओ व सीओ सिटी अभय पांडेय मर्चरी में मौजूद रहे।
शनिवार रात घायल सुनील की मेडिकल कॉलेज में हुई मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ था। आधी रात को आरोपी एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद आक्रोशित कर्मचारी शव के पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए थे। आधी रात को प्रभारी सीएमओ डॉ. एसके सिंह की मौजूदगी में चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार ओझा व डॉ. अखिलेश दुबे ने वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया।
नौ जगहों पर मिले चोट के निशान
सूत्रों के अनुसार, मृतक तहसीलकर्मी के शरीर में नौ जगहों पर चोट के निशान मिले। उसके फेफड़े में इंफेक्शन हो गया था। उसमे काफी मवाद भी भरा था। आशंका जताई जा रही है कि पिटाई से आई चोटों के कारण उसके फेफड़े में मवाद भर गया होगा।
हालांकि अभी लालगंज पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने की बात कह रही है। 31 मार्च को मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय परीक्षण में भी सुनील शर्मा के शरीर में आठ जगहों पर चोटों के निशान मिले थे, जिसमे डंडे से चोट के निशान संग सूजन व पीलापन दर्शाया गया था। फिलहाल, अभी जिला प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
समय पर होता इलाज तो बच जाती नायब नाजिर की जान
लालगंज एसडीएम की पिटाई से मरे नायब नाजिर सुनील शर्मा की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन के आला अफसर उसका बेहतर इलाज कराने के बजाय मामले को दबाने में लगे रहे। आरोपी एसडीएम से लेकर दूसरे अधिकारी लगातार सुनील पर नजर रखे हुए थे। परिवार समेत दूसरे लोगों को उससे मिलने तक नहीं दिया जा रहा था।
रेफर करने के बाद भी उसे लालगंज ट्रामा सेंटर से मेडिकल कॉलेज भेजने में पांच घंटे का समय लग गया। यहां कर्मचारियों के दबाव में सुनील का उपचार शुरू हो सका। यहां भी सुनील की हालत गंभीर देख ईएमओ डॉ. आशुतोष सिंह ने उसे प्रयागराज रेफर कर दिया, मगर प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक समेत दूसरे डॉक्टरों ने उसे एंबुलेंस से उतार लिया। सुनील की मौत पहले ही हो चुकी थी, लेकिन उसे ओटी में रखकर इलाज करने का दावा किया जाता रहा।
ऋंग्वेरपुर घाट पर हुआ अंतिम संस्कार, नए एसडीएम भी रहे मौजूद
तहसीलकर्मी सुनील शर्मा की मौत के बाद रात में कर्मचारियों के तेवरों से बैकफुट पर रही पुलिस रविवार सुबह को सतर्क हो गई थी। कोई बवाल न हो, इसलिए सुबह ही पुलिस ने बस मंगा ली और आननफानन परिवार के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए शृंग्वेरपुर भेजने की व्यवस्था कराई। घर से शव रवाना होने के बाद पुलिस समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। अंतिम संस्कार के समय लालगंज के नए एसडीएम अरुण सिंह भी पूरे समय मौजूद रहे।