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दूध और लावा से पूजे गए नाग देवता
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:08 AM IST
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सावन महीने की पंचमी (गुड़िया) का पर्व रविवार को धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने रविवार को दूध और लावा चढ़ाकर नाग देवता की पूजा की। शिवमंदिरों में जलाभिषेक को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ी रही। इस दिन जगह-जगह मेले का आयोजन किया गया। बच्चों ने तालाबों के किनारे गुड़िया पीटने का आनंद लिया। साथ ही खाने-पीने की दुकानों पर पहुंचकर धमाल मचाया। इस मौके पर अखाड़ा में भी युवाओं ने जोर-आजमाइश की।
मान्यता है कि नाग धन की रक्षा करने के लिये तत्पर रहते हैं। नागपंचमी पर नाग और शिवलिंग की आराधना से मनवांधित फलों की प्राप्ति के साथ ही भक्तों को लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि नागपंचमी तिथि के देवता सर्प है। इस तिथि को भगवान आशुतोष की भी पूजा वंदनीय होती है। नागपंचमी पर्व पर शिव मंदिरों में सुबह से ही लोगों की भीड़ लग गई। दूध, लावा, चना इत्यादि चढ़ाकर नागदेवता की पूजा की गई। शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बाबा भोले से आशीर्वाद की कामना की गई। नागपंचमी के दिन चिलबिला स्थित हनुमान मंदिर में मेले का आयोजन किया गया। सुबह महिला मंडल द्वारा भजन कीर्तन के साथ गुड़िया की शुरूआत भोले बाबा के मंदिर से की गई।
तालाब के किनारे बच्चों गुड़िया फेंककर खुशियां मनाई। दंगल का आयोजन किया गया। इस मौके पर मेला प्रभारी संतोष कुमार, कृष्ण मोहन गुप्ता, दिनेश शर्मा, सुरेश अग्रवाल, रोशन लाल उमरवैश्य, अंजनी कुमार, त्रिभुवन, देवानंद, श्यामजी, सत्यप्रकाश, राम गोपाल, श्याम बाबू, दिनेश कुमार, छेदीलाल और आशीष कुमार आदि रहे। मां बेल्हा देवी मंदिर में नाग पंचमी की भीड़ रही। शिव मंदिर में जलाभिषेक किया गया। जिले के पौराणिक शिव मंदिरों घुईसरनाथ, बाबा बेलखरनाथ, भयहरणनाथ धाम समेत सभी मंदिरों में भक्तों का मेला लगा रहा। भंगवा स्थित गुड़िया तालाब के किनारे मेले का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने दंगल और ऊंची कूद में भाग लिया। यह पर कई वर्षों से मेले का आयोजन किया जा रहा है। शहर की काफी भीड़ तालाब के किनारे शाम होते ही जुटने लगी। बच्चों ने खिलौनों और गुब्बारों की खरीददारी की। चाट और चाउमीन की दुकानों पर धमाल मचाया।
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मान्यता है कि नाग धन की रक्षा करने के लिये तत्पर रहते हैं। नागपंचमी पर नाग और शिवलिंग की आराधना से मनवांधित फलों की प्राप्ति के साथ ही भक्तों को लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि नागपंचमी तिथि के देवता सर्प है। इस तिथि को भगवान आशुतोष की भी पूजा वंदनीय होती है। नागपंचमी पर्व पर शिव मंदिरों में सुबह से ही लोगों की भीड़ लग गई। दूध, लावा, चना इत्यादि चढ़ाकर नागदेवता की पूजा की गई। शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बाबा भोले से आशीर्वाद की कामना की गई। नागपंचमी के दिन चिलबिला स्थित हनुमान मंदिर में मेले का आयोजन किया गया। सुबह महिला मंडल द्वारा भजन कीर्तन के साथ गुड़िया की शुरूआत भोले बाबा के मंदिर से की गई।
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तालाब के किनारे बच्चों गुड़िया फेंककर खुशियां मनाई। दंगल का आयोजन किया गया। इस मौके पर मेला प्रभारी संतोष कुमार, कृष्ण मोहन गुप्ता, दिनेश शर्मा, सुरेश अग्रवाल, रोशन लाल उमरवैश्य, अंजनी कुमार, त्रिभुवन, देवानंद, श्यामजी, सत्यप्रकाश, राम गोपाल, श्याम बाबू, दिनेश कुमार, छेदीलाल और आशीष कुमार आदि रहे। मां बेल्हा देवी मंदिर में नाग पंचमी की भीड़ रही। शिव मंदिर में जलाभिषेक किया गया। जिले के पौराणिक शिव मंदिरों घुईसरनाथ, बाबा बेलखरनाथ, भयहरणनाथ धाम समेत सभी मंदिरों में भक्तों का मेला लगा रहा। भंगवा स्थित गुड़िया तालाब के किनारे मेले का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने दंगल और ऊंची कूद में भाग लिया। यह पर कई वर्षों से मेले का आयोजन किया जा रहा है। शहर की काफी भीड़ तालाब के किनारे शाम होते ही जुटने लगी। बच्चों ने खिलौनों और गुब्बारों की खरीददारी की। चाट और चाउमीन की दुकानों पर धमाल मचाया।
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