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Pratapgarh News: ड्राइविंग लाइसेंस में गलतियों की भरमार, दुरुस्त कराने पहुंच रहे बार-बार
Tue, 12 Sep 2023 09:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Tue, 12 Sep 2023 09:28 PM IST
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नाम और जन्मतिथि की गलतियों से लोगों को हो रही परेशानी, एआरटीओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे लोग
फीस जमा करने के बाद ही हो पाती है कमियां दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। उप संभागीय परिवहन विभाग की लापरवाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। ड्राइविंग लाइसेंस में गड़बड़ी ठीक कराने के लिए लोगों को एआरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लाइसेंस में किसी का नाम तो किसी की जन्मतिथि गलत दर्ज है। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी त्रुटियों को सुधारा नहीं जा सका।
उप संभागीय परिवहन कार्यालय शुकुलपुर में रोजाना ऐसे एक दो मामले पहुंच रहे हैं। वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक बने लाइसेंस में सबसे अधिक खामियां देखने को मिल रही हैं। लाइसेंस मिलने के बाद कमियां पहले वे भी नहीं देख पाते। जब लाइसेंस नवीनीकरण का समय आता है, तो त्रुटियों का पता चलता है।
बताते हैं कि इसकी वजह साफ्टवेयर में रिकार्ड दर्ज न होना है। तब लाइसेंस धारक का पुराने रजिस्टर से रिकार्ड खोजना पड़ता है। उसके बाद गलती सुधार होने के बाद ऑनलाइन रिकार्ड दर्ज किया जाता है। विभाग की ओर से कोई भी गलती हो, उसकी सजा लोगों को ही भुगतना होता है।
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लर्निंग लाइसेंस में कहीं पिता का नाम गलत है तो कहीं जन्मतिथि और किसी में पता ही उल्टा दर्शा दिया जाता है। जबकि यह स्पष्ट है कि कोई अपना व पिता के नाम के साथ गलत पता आवेदन में नहीं भर सकता। वैसे तो बहुत पुराने ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में कार्यालय के कर्मचारी मशक्कत करना ही नहीं चाहते। आम शिकायत है कि डीएल में सुधार के लिए आए लोगों को कर्मचारी टरका देते हैं। यदि कोई बार-बार आता ही है तो कमियों को दूर करने के लिए दो सौ रुपये फीस जमा कराने के बाद भी चक्कर लगवाते हैं।
आरआई रंजीत सिंह का कहना है कि लाइसेंस जारी होने के कुछ दिनों तक ही गलती सुधारने में आसानी होती है। उस समय कोई नहीं आता। अब कोई 15 से 20 वर्ष पहले बने ड्राइविंग लाइसेंस की त्रुटियां दूर कराने पहुंच रहा है तो समय निकल चुका होता है।
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केस-1
पश्चिमी सहोदरपुर निवासी मोहित कुमार ने 15 फरवरी 2009 को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जो दो माह बाद मिला। इसमें उनके पिता के नाम वाले स्थान पर केवल कुमार ही दर्ज है। अब इस गलती की जानकारी हुई। सुधार के लिए गए, लेकिन किया नहीं गया।
केस -2
शहर के दहिलामऊ निवासी अफसार अहमद ने भी वर्ष 2018 में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। उनकी जन्मतिथि 1 अगस्त के बजाय 10 अगस्त अंकित हो गई है। इसके लिए एआरटीओ कार्यालय जाकर संबंधित अधिकारियों से बात की लेकिन अभी तक कमी दूर नहीं हो सकी।
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पता बदलने के लिए 400, नाम में गलती सुधारने के लिए जमा होते हैं 200 रुपये
ड्राइविंग लाइसेंस में पता सुधारने के लिए 400 रुपये की फीस जमा करनी होती है। जबकि नाम में त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए 200 रुपये जमा करने का निर्देश है। फीस जमा होने के बाद भी लोगों को कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। परेशान लोगों का कहना है कि अफसर कहते हैं, जो फॉर्म में भरा, वही दर्ज किया गया होगा। जबकि लोगों का कहना है कि सही जानकारी के बाद गलतियां की गई हैं। अब लोग परेशान होकर एआरटीओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
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फीस जमा करने के बाद ही हो पाती है कमियां दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। उप संभागीय परिवहन विभाग की लापरवाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। ड्राइविंग लाइसेंस में गड़बड़ी ठीक कराने के लिए लोगों को एआरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लाइसेंस में किसी का नाम तो किसी की जन्मतिथि गलत दर्ज है। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी त्रुटियों को सुधारा नहीं जा सका।
उप संभागीय परिवहन कार्यालय शुकुलपुर में रोजाना ऐसे एक दो मामले पहुंच रहे हैं। वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक बने लाइसेंस में सबसे अधिक खामियां देखने को मिल रही हैं। लाइसेंस मिलने के बाद कमियां पहले वे भी नहीं देख पाते। जब लाइसेंस नवीनीकरण का समय आता है, तो त्रुटियों का पता चलता है।
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बताते हैं कि इसकी वजह साफ्टवेयर में रिकार्ड दर्ज न होना है। तब लाइसेंस धारक का पुराने रजिस्टर से रिकार्ड खोजना पड़ता है। उसके बाद गलती सुधार होने के बाद ऑनलाइन रिकार्ड दर्ज किया जाता है। विभाग की ओर से कोई भी गलती हो, उसकी सजा लोगों को ही भुगतना होता है।
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लर्निंग लाइसेंस में कहीं पिता का नाम गलत है तो कहीं जन्मतिथि और किसी में पता ही उल्टा दर्शा दिया जाता है। जबकि यह स्पष्ट है कि कोई अपना व पिता के नाम के साथ गलत पता आवेदन में नहीं भर सकता। वैसे तो बहुत पुराने ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में कार्यालय के कर्मचारी मशक्कत करना ही नहीं चाहते। आम शिकायत है कि डीएल में सुधार के लिए आए लोगों को कर्मचारी टरका देते हैं। यदि कोई बार-बार आता ही है तो कमियों को दूर करने के लिए दो सौ रुपये फीस जमा कराने के बाद भी चक्कर लगवाते हैं।
आरआई रंजीत सिंह का कहना है कि लाइसेंस जारी होने के कुछ दिनों तक ही गलती सुधारने में आसानी होती है। उस समय कोई नहीं आता। अब कोई 15 से 20 वर्ष पहले बने ड्राइविंग लाइसेंस की त्रुटियां दूर कराने पहुंच रहा है तो समय निकल चुका होता है।
केस-1
पश्चिमी सहोदरपुर निवासी मोहित कुमार ने 15 फरवरी 2009 को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जो दो माह बाद मिला। इसमें उनके पिता के नाम वाले स्थान पर केवल कुमार ही दर्ज है। अब इस गलती की जानकारी हुई। सुधार के लिए गए, लेकिन किया नहीं गया।
केस -2
शहर के दहिलामऊ निवासी अफसार अहमद ने भी वर्ष 2018 में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। उनकी जन्मतिथि 1 अगस्त के बजाय 10 अगस्त अंकित हो गई है। इसके लिए एआरटीओ कार्यालय जाकर संबंधित अधिकारियों से बात की लेकिन अभी तक कमी दूर नहीं हो सकी।
पता बदलने के लिए 400, नाम में गलती सुधारने के लिए जमा होते हैं 200 रुपये
ड्राइविंग लाइसेंस में पता सुधारने के लिए 400 रुपये की फीस जमा करनी होती है। जबकि नाम में त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए 200 रुपये जमा करने का निर्देश है। फीस जमा होने के बाद भी लोगों को कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। परेशान लोगों का कहना है कि अफसर कहते हैं, जो फॉर्म में भरा, वही दर्ज किया गया होगा। जबकि लोगों का कहना है कि सही जानकारी के बाद गलतियां की गई हैं। अब लोग परेशान होकर एआरटीओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।