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पहले दिया फिर छीन लिया लोहिया आवास
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:16 AM IST
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लोहिया आवास
- फोटो : Demo pic
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जिले में लोहिया आवास मजाक बन गया है। पहले पात्र और बाद में अपात्र बनाकर लाभार्थियों से धनराशि की रिकवरी की जा रही है। यह किसी एक या दो लाभार्थी के साथ नहीं, बल्कि 17 ब्लाकों के 102 लाभार्थियों के साथ हुआ है। पहले पात्र बताते हुए उनका चयन किया गया। आवास के निर्माण के लिए दो किश्तों में उनके खाते में धनराशि भी भेज दी गई। बाद में फिर अपात्र बताकर धन की रिकवरी कर ली गई। जिले के लोहिया समग्र गांवों में गरीब परिवारों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए 2.75 लाख रुपये शासन की ओर से दिए जाते हैं। वर्ष 2014-15 में जिले के 17 विकास खंडों के 37 लोहिया गांवों में पात्रों का चयन करने के लिए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। विभिन्न ब्लाकों के लिए अधिकारियों को नामित कर जिले में 7,285 लाभार्थियों का चयन किया गया।
तत्कालीन परियोजना अधिकारी ने नवंबर माह में इन लाभार्थियों के खाते में पहली किश्त के 1,37,500 रुपये और दूसरी मार्च माह के प्रथम सप्ताह में 1,37,500 रुपये ऑनलाइन खाते में भेज दिए। लाभार्थियों के खाते में धनराशि पहुंचते ही मकान का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया। इधर, खंड विकास अधिकारियों की जांच में जिले में 102 लोगों के अपात्र मिलने की सूचना पर विभाग में हड़कंप मचा दिया। विभागीय अधिकारियों ने बीडीओ की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए अपात्रों से वसूली की तैयारी कर ली। लोहिया आवास के लाभार्थी छत का लिंटर भी नहीं डाल पाए थे कि उनके घर रिकवरी का नोटिस भी पहुंच गया। अफसर 101 लाभार्थियों से पौने-पौने तीन लाख रुपये वापस लेने में सफल रहे। मगर , बेलखरनाथधाम ब्लाक के पडरीजबर निवासी नीलम पत्नी दीपक ने गरीबी का हवाला देकर रुपये वापस करने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इस पर विभाग ने 31 जुलाई तक रुपये जमा करने का नोटिस देकर चेताया है कि अगर, इसके बाद देरी हुई तो घर कुर्क किया जाएगा।
कहीं वसूली का मामला तो नहीं
लोहिया आवास के पात्रों से ग्राम पंचायत अधिकारी 30-30 हजार रुपये की वसूली करते हैं। सूत्रों की मानें तो जिन लोगों ने यह धनराशि देने में आनाकानी की, ग्राम पंचायत अधिकारियों ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि जब जनपद स्तरीय अधिकारियों की जांच में पात्र मिले तो बीडीओ ने कैसे उन्हें अपात्र घोषित कर दिया।
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विभाग में डंप है 79 आवास की धनराशि
जिले के 101 लाभार्थियों से जो धनराशि की रिकवरी की गई थी, उसमें से 22 नए लाभार्थियों का चयन कर आवास वितरित किया गया। मगर, 79 आवास की धनराशि अभी भी विभाग में सुरक्षित है। इस धनराशि को खर्च करने के लिए शासन से दिशा-निर्देश मांगा गया है।
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तत्कालीन परियोजना अधिकारी ने नवंबर माह में इन लाभार्थियों के खाते में पहली किश्त के 1,37,500 रुपये और दूसरी मार्च माह के प्रथम सप्ताह में 1,37,500 रुपये ऑनलाइन खाते में भेज दिए। लाभार्थियों के खाते में धनराशि पहुंचते ही मकान का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया। इधर, खंड विकास अधिकारियों की जांच में जिले में 102 लोगों के अपात्र मिलने की सूचना पर विभाग में हड़कंप मचा दिया। विभागीय अधिकारियों ने बीडीओ की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए अपात्रों से वसूली की तैयारी कर ली। लोहिया आवास के लाभार्थी छत का लिंटर भी नहीं डाल पाए थे कि उनके घर रिकवरी का नोटिस भी पहुंच गया। अफसर 101 लाभार्थियों से पौने-पौने तीन लाख रुपये वापस लेने में सफल रहे। मगर , बेलखरनाथधाम ब्लाक के पडरीजबर निवासी नीलम पत्नी दीपक ने गरीबी का हवाला देकर रुपये वापस करने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इस पर विभाग ने 31 जुलाई तक रुपये जमा करने का नोटिस देकर चेताया है कि अगर, इसके बाद देरी हुई तो घर कुर्क किया जाएगा।
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कहीं वसूली का मामला तो नहीं
लोहिया आवास के पात्रों से ग्राम पंचायत अधिकारी 30-30 हजार रुपये की वसूली करते हैं। सूत्रों की मानें तो जिन लोगों ने यह धनराशि देने में आनाकानी की, ग्राम पंचायत अधिकारियों ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि जब जनपद स्तरीय अधिकारियों की जांच में पात्र मिले तो बीडीओ ने कैसे उन्हें अपात्र घोषित कर दिया।
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विभाग में डंप है 79 आवास की धनराशि
जिले के 101 लाभार्थियों से जो धनराशि की रिकवरी की गई थी, उसमें से 22 नए लाभार्थियों का चयन कर आवास वितरित किया गया। मगर, 79 आवास की धनराशि अभी भी विभाग में सुरक्षित है। इस धनराशि को खर्च करने के लिए शासन से दिशा-निर्देश मांगा गया है।