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वरासत अभियान को पलीता लगा रहे लेखपाल, दबाकर बैठे हैं 3601 आवेदन
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मुख्यमंत्री के वरासत अभियान को लेखपाल पलीता लगा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले 8,934 लोगों में से 3601 के आवेदन दबाकर बैठे हुए हैं। जबकि अफसरों का दावा है कि 5,333 आवेदनों का निस्तारण करते हुए वरासत दर्ज करा दी गई है।
वरासत के नाम पर किसानों का शोषण करने वाले लेखपालों पर अब जिला प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में है। वरासत अभियान में उन लेखपालों की भूमिका की जांच होगी, जिनके गांव से अधिक और जिस गांव में सबसे कम आवेदन आएंगे।
अफसरों ने तहसीलों से इसकी रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने जिले के किसानों को लेखपालों के शोषण से बचाने के लिए खतौनी में वरासत दर्ज करने का अभियान चलाया था। इसमें अधिकांश मामले ऐसे थे, जिनमें किसानों की मौत के दस-दस साल बाद भी वरासत नहीं दर्ज की गई थी। वरासत अभियान में जिले की पांचों तहसीलों से 8,934 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर वरासत दर्ज करने की मांग की है। लेखपालों की जांच का समय पूर्ण हो गया है, फिर भी 3601 आवेदनों को अपने पास जांच के नाम पर दबाए बैठे हैं।
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आवेदन करने वालों में सबसे अधिक सदर तहसील के किसान शामिल हैं। सदर तहसील में वरासत दर्ज करने के लिए कुल 2153 मामले आए हैं, जबकि दूसरे नंबर पर पट्टी तहसील है, जिसमें 2023 किसानों ने आवेदन किया है। जिलेभर से आए आवेदनों में 5,333 किसानों की वरासत दर्ज हो चुकी है। अभी 3601 आवेदन लेखपालों के पास है। इससे उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
विवादित बताकर उलझा रहे मामला
मुख्यमंत्री के अभियान में भी लेखपाल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह वरासत दर्ज करने के बजाए विवादित बताकर किसानों को उलझा रहे हैं। अफसरों को भी गुमराह कर शोषण करने पर तुले हुए हैं।
आनलाइन प्राप्त आवेदनों की संख्या
तहसील का नाम संख्या
सदर 2153
पट्टी 2023
लालगंज 1607
कुंडा 1981
रानीगंज 1170
ऑनलाइन आवेदन करने वाले मामलों का परीक्षण करके वरासत दर्ज की जा रही है। लेखपालों के पास जो आवेदन हैं, उसकी जांच कर रहे हैं। निर्विवाद मामलों को ही निपटाया जा रहा है। फिलहाल जल्द ही यह अभियान सफल होगा।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम
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वरासत के नाम पर किसानों का शोषण करने वाले लेखपालों पर अब जिला प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी में है। वरासत अभियान में उन लेखपालों की भूमिका की जांच होगी, जिनके गांव से अधिक और जिस गांव में सबसे कम आवेदन आएंगे।
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अफसरों ने तहसीलों से इसकी रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने जिले के किसानों को लेखपालों के शोषण से बचाने के लिए खतौनी में वरासत दर्ज करने का अभियान चलाया था। इसमें अधिकांश मामले ऐसे थे, जिनमें किसानों की मौत के दस-दस साल बाद भी वरासत नहीं दर्ज की गई थी। वरासत अभियान में जिले की पांचों तहसीलों से 8,934 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर वरासत दर्ज करने की मांग की है। लेखपालों की जांच का समय पूर्ण हो गया है, फिर भी 3601 आवेदनों को अपने पास जांच के नाम पर दबाए बैठे हैं।
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आवेदन करने वालों में सबसे अधिक सदर तहसील के किसान शामिल हैं। सदर तहसील में वरासत दर्ज करने के लिए कुल 2153 मामले आए हैं, जबकि दूसरे नंबर पर पट्टी तहसील है, जिसमें 2023 किसानों ने आवेदन किया है। जिलेभर से आए आवेदनों में 5,333 किसानों की वरासत दर्ज हो चुकी है। अभी 3601 आवेदन लेखपालों के पास है। इससे उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
विवादित बताकर उलझा रहे मामला
मुख्यमंत्री के अभियान में भी लेखपाल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह वरासत दर्ज करने के बजाए विवादित बताकर किसानों को उलझा रहे हैं। अफसरों को भी गुमराह कर शोषण करने पर तुले हुए हैं।
आनलाइन प्राप्त आवेदनों की संख्या
तहसील का नाम संख्या
सदर 2153
पट्टी 2023
लालगंज 1607
कुंडा 1981
रानीगंज 1170
ऑनलाइन आवेदन करने वाले मामलों का परीक्षण करके वरासत दर्ज की जा रही है। लेखपालों के पास जो आवेदन हैं, उसकी जांच कर रहे हैं। निर्विवाद मामलों को ही निपटाया जा रहा है। फिलहाल जल्द ही यह अभियान सफल होगा।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम