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महिला परिचालकों की सीटी से रुकेंगी बसें
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:46 AM IST
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प्रतापगढ़ डिपो में परिचालक बनकर आईं दो युवतियों ने बसों के संचालन में सिर्फ पुरुषों की भूमिका के मिथक को तोड़ दिया है। उन्होंने न सिर्फ मिसाल पेश की है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि लड़कियां इस क्षेत्र में भी करिअर बना सकती हैं। दोनों युवतियां इलाहाबाद और सुल्तानपुर जाने वाली बसों में सवार यात्रियों के टिकट काट रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डिपो को कुछ और महिला कंडक्टर मिल सकती हैं।
रोडवेज बसों में अभी तक पुरुष कंडक्टर ही तैनात किए जाते रहे हैं, लेकिन बीते दिनों जब लोक सेवा आयोग से कंडक्टर की भर्ती निकली तो कई युवतियों ने भी आवेदन किया। इसमें कई का चयन परिचालक के पद पर हुआ है। इनमें से दो महिलाओं की ड्यूटी प्रतापगढ़ डिपो में लगाई है। दोनों ने ट्रेनिंग शुरू कर दी है। पट्टी तहसील के अतरौरा गांव की रहने वाली सुमन वर्मा अपनी चार साल की बेटी को सास के पास छोड़कर सुबह ड्यूटी के लिए पहुंच जाती है। दूसरी परिचालक अमेठी के मुंशीगंज के सराय खेमा रामनगर निवासी वंदना तिवारी पुत्री राकेश तिवारी है। वंदना की ड्यूटी प्रतापगढ़ से सुल्तानपुर जाने वाली बस में लगाई गई है।
पीसीएस की तैयारी कर रही थी सुमन
पति के हौसलाआफजाई से इलाहाबाद में पीसीएस की तैयारी कर रही सुमन ने जब रोडवेज बसों में कंडक्टर 3की नौकरी करने का फैसला किया तो परिवार के लोगों ने भी पूरा साथ दिया। पट्टी तहसील के अतरौरा गांव निवासी सुमन वर्मा की स्नातक की पढ़ाई के बाद शादी विपुल के साथ हो गई। विपुल अपने गांव के ही एक प्राइवेट इंटर कॉलेज में शिक्षक हंै। शादी के बाद भी सुमन पढ़ाई करने के लि
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बीएसी करने के बाद कंडक्टर बनी वंदनाए बार-बार विपुल से इच्छा जाहिर करती रही। विपुल भी तैयार हो गया और उसे तैयारी करने के लिए इलाहाबाद भेज दिया। डेढ़ वर्ष से इलाहाबाद में रहकर सुमन पीसीएस की तैयारी कर रही थी। इस दौरान लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद रोडवेज परिचालक बन गई। ससुराल के लोगों ने भी इसका विरोध नहीं किया। बेहिचक वह ट्रेनिंग करने के लिए रोजाना डिपो में भी आ रही हंै।
बीएसी करने के बाद कंडक्टर बनी वंदना
अमेठी जनपद के मुंशीगंज सराय खेमा रामनगर निवासी वंदना तिवारी पुत्री राकेश तिवारी तीन बहनों में सबसे छोटी है। वंदना की बड़ी बहन ऊषा तिवारी पढ़ाई करने के साथ तैयारी भी कर रही थी। उसका चयन सिपाही के पद पर हो गया। दूसरी बहन चांदनी बीएड कर रही है। वंदना ने इसी वर्ष बीएससी की पढ़ाई पूरी की थी। इसी बीच परिचालक की भर्ती निकली और उसका चयन हो गया। वंदना ने बातचीत के दौरान बताया कि उसका लक्ष्य परिचालक बनना नहीं है। पहली बार परीक्षा दी और पास हो जाने के कारण उसे छोड़ने की जगह ट्रेनिंग कर रही है। दिन में नौकरी और रात में पीसीएस की तैयारी करती है।
रोडवेज बसों में अभी तक पुरुष कंडक्टर ही तैनात किए जाते रहे हैं, लेकिन बीते दिनों जब लोक सेवा आयोग से कंडक्टर की भर्ती निकली तो कई युवतियों ने भी आवेदन किया। इसमें कई का चयन परिचालक के पद पर हुआ है। इनमें से दो महिलाओं की ड्यूटी प्रतापगढ़ डिपो में लगाई है। दोनों ने ट्रेनिंग शुरू कर दी है। पट्टी तहसील के अतरौरा गांव की रहने वाली सुमन वर्मा अपनी चार साल की बेटी को सास के पास छोड़कर सुबह ड्यूटी के लिए पहुंच जाती है। दूसरी परिचालक अमेठी के मुंशीगंज के सराय खेमा रामनगर निवासी वंदना तिवारी पुत्री राकेश तिवारी है। वंदना की ड्यूटी प्रतापगढ़ से सुल्तानपुर जाने वाली बस में लगाई गई है।
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पीसीएस की तैयारी कर रही थी सुमन
पति के हौसलाआफजाई से इलाहाबाद में पीसीएस की तैयारी कर रही सुमन ने जब रोडवेज बसों में कंडक्टर 3की नौकरी करने का फैसला किया तो परिवार के लोगों ने भी पूरा साथ दिया। पट्टी तहसील के अतरौरा गांव निवासी सुमन वर्मा की स्नातक की पढ़ाई के बाद शादी विपुल के साथ हो गई। विपुल अपने गांव के ही एक प्राइवेट इंटर कॉलेज में शिक्षक हंै। शादी के बाद भी सुमन पढ़ाई करने के लि
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बीएसी करने के बाद कंडक्टर बनी वंदनाए बार-बार विपुल से इच्छा जाहिर करती रही। विपुल भी तैयार हो गया और उसे तैयारी करने के लिए इलाहाबाद भेज दिया। डेढ़ वर्ष से इलाहाबाद में रहकर सुमन पीसीएस की तैयारी कर रही थी। इस दौरान लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद रोडवेज परिचालक बन गई। ससुराल के लोगों ने भी इसका विरोध नहीं किया। बेहिचक वह ट्रेनिंग करने के लिए रोजाना डिपो में भी आ रही हंै।
बीएसी करने के बाद कंडक्टर बनी वंदना
अमेठी जनपद के मुंशीगंज सराय खेमा रामनगर निवासी वंदना तिवारी पुत्री राकेश तिवारी तीन बहनों में सबसे छोटी है। वंदना की बड़ी बहन ऊषा तिवारी पढ़ाई करने के साथ तैयारी भी कर रही थी। उसका चयन सिपाही के पद पर हो गया। दूसरी बहन चांदनी बीएड कर रही है। वंदना ने इसी वर्ष बीएससी की पढ़ाई पूरी की थी। इसी बीच परिचालक की भर्ती निकली और उसका चयन हो गया। वंदना ने बातचीत के दौरान बताया कि उसका लक्ष्य परिचालक बनना नहीं है। पहली बार परीक्षा दी और पास हो जाने के कारण उसे छोड़ने की जगह ट्रेनिंग कर रही है। दिन में नौकरी और रात में पीसीएस की तैयारी करती है।