{"_id":"579a47d64f1c1b365a21eb5b","slug":"kasturba-school-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आवासीय शिक्षा के नाम पर छलावा, स्कूलों शिक्षकों का टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आवासीय शिक्षा के नाम पर छलावा, स्कूलों शिक्षकों का टोटा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में शिक्षक - शिक्षिकाओं की भारी कमी है। 15 आवासीय स्कूलों में 68 शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए विज्ञापन तो जारी किए गए, मगर इसके बाद की कार्रवाई ठप हो गई है। इससे बालिकाओं का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। बालिकाओं को गुणात्मक शिक्षा और कौशल विकास का ज्ञान देने के लिए जिले के 15 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल खोले गए हैं। ग्रामीण इलाकों में खुले इन स्कूलों में सिर्फ बालिकाओं को ही शिक्षा प्रदान की जाती है। स्कूल भवन में ही बच्चों के रहने की व्यवस्था की गई है। कस्तूरबा गांधी स्कूलों को 65-65 लाख रुपये से निर्मित निजी भवन तो मिल गए हैं, मगर शिक्षक-शिक्षिकाओं की कमी के चलते पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। स्कूलों में जो पद खाली हैं, उनमें से अधिकांश विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों के हैं।
सात कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल ऐसे हैं, जिसमें तीन साल से स्थायी वार्डेन नहीं है। इन स्कूलों को प्रभारी टीचर से चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
सात कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल ऐसे हैं, जिसमें तीन साल से स्थायी वार्डेन नहीं है। इन स्कूलों को प्रभारी टीचर से चलाया जा रहा है।