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मानिकपुर पहुंची बनारस के लिए निकली जलपरी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 30 Aug 2016 11:34 PM IST
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न्यूज
गंगा में तैरते हुए कानपुर से बनारस के लिए निकली 13 साल की जलपरी मंगलवार देर शाम मानिकपुर पहुंच गई। उसका जज्बा, जीवटता और साहस देख लोग दंग थे। इतनी कम उम्र में इतने बड़े सफर पर निकली जलपरी को लोगों ने हाथोंहाथ लिया। मानिकपुर में रात्रि विश्राम के बाद वह बुधवार को प्रयाग के लिए रवाना होगी।
कानपुर के सर्किट हाउस निवासी श्रद्धा शुक्ला (13) पुत्री ललित कुमार शुक्ला ने कानपुर से बनारस तक पहुंचने के लिए गंगा नदी का रास्ता चुना है। वह तैरते हुए बनारस पहुंचकर अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही इस माध्मय से वह ओलम्पिक तक भी पहुंचने का सपना पाले हुए है।
वह एक दिन में 80 से 100 किमी तैरती है और रात हो जाने पर घाट के आसपास ही रात्रि निवास करती है। मंगलवार शाम वह कालाकांकर घाट पर पहुंची तो पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की मां राजमाता नीलमा कुमारी ने उसे 11000 रुपये का चेक और बुके भेंट कर उसके भविष्य के लिए शुभकानाएं दीं। इसके बाद वह मानिकपुर के लिए रवाना हो गई। बुधवार से इलाहाबाद के लिए आगे बढ़ेगी। 2014 में उसने 280 किमी की तैराकी करके संगम तक पहुंची थी। अब वह 570 किमी की तैराकी करके बनारस जा रही है।
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गंगा में डूबी तो बाबा ने बना दिया तैराक
कुंडा(ब्यूरो)। श्रद्धा तीन ढाई वर्ष की उम्र में गंगा में डूब गई थी। बड़ी मेहनत के बाद गोताखोरों ने उसे निकाला था। इसके बाद उसके बाबा मुन्नू लाल शुक्ला ने तय किया वह उसे खोताखोर ही बनाएंगे। श्रद्धा का कहना है कि उसकी प्रेरणा उसके बाबा है। उसके पिता और मां वंदना भी उसका सपोर्ट करते हैं। उसका कहना है कि उसके बाबा, पिता और मां ने जो सपना देखा है वह उसे पूरा करके ही रहेगी। उसके पिता ललित शुक्ला ने बताया कि श्रद्धा के साथ एक नाव चलती है। इस पर 25 लोगों की टीम मौजूद है। सात गोताखोर सहित डाक्टर व जरूरत की चीजें भी इस पर हैं। दो गोताखोर उसके साथ लगातार तैरते हैं। उन्हें बारी-बारी से बदला जाता रहता है। इसके अलावा किसी भी दिक्कत के लिए चिकित्सक भी रहते हैं। गोताखोर की टीम का नेतृत्व मानसिंह व रोहित निषाद कर रहे हैं। यही नहीं टीम में एक फिल्म मेकर विनोद कपाड़ी भी हैं। वह लगातर उसकी कार्यशैली को शूट कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब भी वह अपनी फिल्म बनाएंगे। उसका शाट इसमें रखा जाएगा। पहली यात्रा श्रद्धा ने कानपुर से इलाहाबाद संगम के लिए की थी। यह 280 किमी की तैराकी उसने तीन दिन में पूरी की थी। इसके पूरे होने से वह पूरे जोश में है।
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कानपुर के सर्किट हाउस निवासी श्रद्धा शुक्ला (13) पुत्री ललित कुमार शुक्ला ने कानपुर से बनारस तक पहुंचने के लिए गंगा नदी का रास्ता चुना है। वह तैरते हुए बनारस पहुंचकर अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही इस माध्मय से वह ओलम्पिक तक भी पहुंचने का सपना पाले हुए है।
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वह एक दिन में 80 से 100 किमी तैरती है और रात हो जाने पर घाट के आसपास ही रात्रि निवास करती है। मंगलवार शाम वह कालाकांकर घाट पर पहुंची तो पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की मां राजमाता नीलमा कुमारी ने उसे 11000 रुपये का चेक और बुके भेंट कर उसके भविष्य के लिए शुभकानाएं दीं। इसके बाद वह मानिकपुर के लिए रवाना हो गई। बुधवार से इलाहाबाद के लिए आगे बढ़ेगी। 2014 में उसने 280 किमी की तैराकी करके संगम तक पहुंची थी। अब वह 570 किमी की तैराकी करके बनारस जा रही है।
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गंगा में डूबी तो बाबा ने बना दिया तैराक
कुंडा(ब्यूरो)। श्रद्धा तीन ढाई वर्ष की उम्र में गंगा में डूब गई थी। बड़ी मेहनत के बाद गोताखोरों ने उसे निकाला था। इसके बाद उसके बाबा मुन्नू लाल शुक्ला ने तय किया वह उसे खोताखोर ही बनाएंगे। श्रद्धा का कहना है कि उसकी प्रेरणा उसके बाबा है। उसके पिता और मां वंदना भी उसका सपोर्ट करते हैं। उसका कहना है कि उसके बाबा, पिता और मां ने जो सपना देखा है वह उसे पूरा करके ही रहेगी। उसके पिता ललित शुक्ला ने बताया कि श्रद्धा के साथ एक नाव चलती है। इस पर 25 लोगों की टीम मौजूद है। सात गोताखोर सहित डाक्टर व जरूरत की चीजें भी इस पर हैं। दो गोताखोर उसके साथ लगातार तैरते हैं। उन्हें बारी-बारी से बदला जाता रहता है। इसके अलावा किसी भी दिक्कत के लिए चिकित्सक भी रहते हैं। गोताखोर की टीम का नेतृत्व मानसिंह व रोहित निषाद कर रहे हैं। यही नहीं टीम में एक फिल्म मेकर विनोद कपाड़ी भी हैं। वह लगातर उसकी कार्यशैली को शूट कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब भी वह अपनी फिल्म बनाएंगे। उसका शाट इसमें रखा जाएगा। पहली यात्रा श्रद्धा ने कानपुर से इलाहाबाद संगम के लिए की थी। यह 280 किमी की तैराकी उसने तीन दिन में पूरी की थी। इसके पूरे होने से वह पूरे जोश में है।