{"_id":"635ec3d76bfb714707059b7d","slug":"it-took-the-soldier-eight-years-to-reach-belha-from-mahoba-pratapgarh-news-ald344873450","type":"story","status":"publish","title_hn":"महोबा से बेल्हा पहुंचने में सिपाही को लगे आठ साल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महोबा से बेल्हा पहुंचने में सिपाही को लगे आठ साल
विज्ञापन
महोबा से वर्ष 2014 में तबादले पर प्रतापगढ़ के लिए निकले सिपाही को पहुंचने में आठ साल का समय लग गया। पुलिस लाइन में आमद कराने पहुंचा, मगर उसके पास कोई कागजात नहीं था। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने सीओ लाइन को जांच सौंप दी। अभी भी उसकी चरित्र पंजिका नहीं मिल रही है।
बांदा जनपद के रहने वाला प्रेम नारायण पाल जनवरी 2014 में महोबा जनपद में तैनात था। वहां से उसका स्थानांतरण प्रतापगढ़ के लिए हो गया। मगर वह ज्वाइन करने नहीं पहुंचा। विभागीय अधिकारी भी प्रेम नारायण को लेकर गंभीर नहीं हुए। करीब एक माह पहले प्रेमनारायण पाल पुलिस लाइन पहुंचा और आमद कराने की बात करने लगा।
आठ साल बाद ज्वाइनिंग करने पहुंचा सिपाही अभी तक न आने की वजह भी साफ नहीं बता सका। उसके पास कोई अभिलेख नहीं था। इतने दिनों तक ड्यूटी ज्वाइन न करने के पीछे दुर्घटना में घायल होकर दो साल तक बेहोश होने की वजह बताई। इसके बाद वह क्यों नहीं आया। केवल याददाश्त गायब रहने की बात करता रहा। जड़ी बूटी से इलाज होने की जानकारी दिया। मामला संज्ञान में आने के बाद एसपी सतपाल अंतिल ने मामले की जांच सीओ लाइन प्रभात को सौंप दी।
विज्ञापन
बांदा से लेकर महोबा तक जांच की जा रही है। चरित्र पंजिका महोबा में भी नहीं मिल रही है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले कार्यालय के कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने बताया साथ ड्यूटी कर चुके पांच पुलिसकर्मियों को बतौर गवाह के रूप में बुलाकर लाने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट मिलते ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बांदा जनपद के रहने वाला प्रेम नारायण पाल जनवरी 2014 में महोबा जनपद में तैनात था। वहां से उसका स्थानांतरण प्रतापगढ़ के लिए हो गया। मगर वह ज्वाइन करने नहीं पहुंचा। विभागीय अधिकारी भी प्रेम नारायण को लेकर गंभीर नहीं हुए। करीब एक माह पहले प्रेमनारायण पाल पुलिस लाइन पहुंचा और आमद कराने की बात करने लगा।
विज्ञापन
आठ साल बाद ज्वाइनिंग करने पहुंचा सिपाही अभी तक न आने की वजह भी साफ नहीं बता सका। उसके पास कोई अभिलेख नहीं था। इतने दिनों तक ड्यूटी ज्वाइन न करने के पीछे दुर्घटना में घायल होकर दो साल तक बेहोश होने की वजह बताई। इसके बाद वह क्यों नहीं आया। केवल याददाश्त गायब रहने की बात करता रहा। जड़ी बूटी से इलाज होने की जानकारी दिया। मामला संज्ञान में आने के बाद एसपी सतपाल अंतिल ने मामले की जांच सीओ लाइन प्रभात को सौंप दी।
विज्ञापन
बांदा से लेकर महोबा तक जांच की जा रही है। चरित्र पंजिका महोबा में भी नहीं मिल रही है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले कार्यालय के कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने बताया साथ ड्यूटी कर चुके पांच पुलिसकर्मियों को बतौर गवाह के रूप में बुलाकर लाने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट मिलते ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।