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ऊंचा रसूख, रोक के बावजूद जारी कर दिया धन
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Aug 2018 11:57 PM IST
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स्वाधार महिला आश्रय केंद्र चलाने वाले संचालकों की पहुंच काफी ऊपर तक है। नेताओं के करीबी होने के कारण जिले के अफसरों को वह घास नहीं डालते थे। हालत यह रही कि जिला प्रोबेशन अधिकारी के फर्जीवाडे़ की रिपोर्ट भेजने के बाद भी केंद्र सरकार से धनराशि जारी करवा ली गई। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि संचालकों के हाथ कितने लंबे थे।
अचलपुर में किराए के मकान में चलने वाले मैक्सन ग्रामोद्योग समिति के फर्जीवाडे़ को लेकर तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी ने गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए ग्रांट नहीं जारी करने की संस्तुति की थी। जिला प्रोबेशन अधिकारी की जांच में भी महिलाएं नहीं मिली थीं। भारी भरकम आने वाली धनराशि की बंटरबांट की जा रही थी। इसका खुलासा होने पर अधिकारियों ने बंद कराने की ठान ली, मगर कमीशन के खेल ने अफसरों की दाल नहीं गलने दी। इधर ग्रांट नहीं जारी करने और जांच कराने की रिपोर्ट भेजी गई थी, उधर, केंद्र सरकार ने अफसरों के रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए ग्रांट जारी कर दी। दरअसल, जिला प्रोबेशन अधिकारी के ग्रांट पर रोक लगाने की रिपोर्ट भेजी थी। मगर इसी बीच तत्कालीन एसडीएम शशिभूषण से जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में लगवा कर ग्रांट रिलीज करा ली। जिला प्रोबेशन अधिकारी को धन आवंटन की जानकारी तब हुई, जब केंद्र सरकार से पत्र आया। इसके बाद से संचालक खुलेआम मनमानी करते रहे।
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अचलपुर में किराए के मकान में चलने वाले मैक्सन ग्रामोद्योग समिति के फर्जीवाडे़ को लेकर तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी ने गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए ग्रांट नहीं जारी करने की संस्तुति की थी। जिला प्रोबेशन अधिकारी की जांच में भी महिलाएं नहीं मिली थीं। भारी भरकम आने वाली धनराशि की बंटरबांट की जा रही थी। इसका खुलासा होने पर अधिकारियों ने बंद कराने की ठान ली, मगर कमीशन के खेल ने अफसरों की दाल नहीं गलने दी। इधर ग्रांट नहीं जारी करने और जांच कराने की रिपोर्ट भेजी गई थी, उधर, केंद्र सरकार ने अफसरों के रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए ग्रांट जारी कर दी। दरअसल, जिला प्रोबेशन अधिकारी के ग्रांट पर रोक लगाने की रिपोर्ट भेजी थी। मगर इसी बीच तत्कालीन एसडीएम शशिभूषण से जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में लगवा कर ग्रांट रिलीज करा ली। जिला प्रोबेशन अधिकारी को धन आवंटन की जानकारी तब हुई, जब केंद्र सरकार से पत्र आया। इसके बाद से संचालक खुलेआम मनमानी करते रहे।
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