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जिले के 14 महादानियों के रक्त में मिले संक्रामक बीमारियों के लक्षण

Sun, 29 Oct 2017 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 29 Oct 2017 11:45 PM IST
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symptoms of infectional disease found in 14 donor's blood
blood donation
जिला अस्पताल के ब्लडबैंक में रक्तदान करने वाले कुछ महादानियों के रक्त में संक्रामक बीमारियों के लक्षण मिले हैं। अगस्त 2017 से अब तक कुल 750 लोगों ने रक्तदान किया। इनमें 14 ऐसे लोग हैं, जिनका खून संक्रमित पाया गया। सात लोगों में हेपेटाइटिस बी जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण मिले हैं। जांच के बाद इन लोगों का ब्लड डिस्पोज कर दिया गया।  
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जिला अस्पताल के ब्लडबैंक में तीन माह के भीतर लगे विभिन्न शिविरों में  कुल 750 लोगों ने दूसरे की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। शिविर में भीड़ अधिक होने के कारण ब्लडबैंक के कर्मचारी तत्काल रक्तदान करने वालों की पूरी जांच नहीं कर पाते। ब्लडबैंक के कर्मचारी रक्तदाता से पहले एक शपथ पत्र भरवाते हैं। इसके बाद उनके ब्लड ग्रुप, हीमोग्लोबिन, शरीर का वजन, पल्स और बीपी की जांच करते हैं। 18 से 60 वर्ष की आयु के बीच के लोगों का ही खून लिया जाता है। 40 किग्रा से कम वजन व साढ़े 12 से कम हीमोग्लोबिन होने पर भी रक्त लेने से ब्लडबैंक के कर्मचारी इनकार कर देते हैं। शिविर में रक्तदान करने वाले महादानियों के रक्त की जब ब्लड बैंक कर्मचारियों ने जांच शुरू की तो इनमें से 14 में संक्रामक बीमारी होने की पुष्टि हुई। इनमें सात लोग हेपेटाइटिस बी, तीन हेपेटाइटिस सी व एक में सिफिलिस बीडीआरएल जैसी संक्रामक बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद ब्लड बैक के कर्मचारियों ने उनका रक्त डिस्पोज करते हुए उसे इलाहाबाद भेजवा दिया। बाद में इन महादानियों को बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए इलाज कराने की सलाह दी गई।  
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खून लेने के बाद जांच करते हैैं स्वास्थ्य कर्मचारी  
रक्तदान शिविर खत्म होने के बाद स्वास्थ्य कर्मचारी ब्लड की जांच करते हैं। इसमें संक्रामक बीमारी हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया, सिफिलिस (बीडीआरएल), एचआईवी वन, एचआईवी टू की जांच की जाती है। जांच के बाद ब्लड को फ्रीजर में रख दिया जाता है। मरीज की मांग के बाद उसके ब्लड ग्रुप से रक्तदाता के ब्लड ग्रुप का मिलान करने के बाद ब्लड चढ़ाने के लिए दिया जाता है।  ब्लड बैंक में ज्यादातर जांच किट के माध्यम से की जाती है। किट में सब ठीक ठाक रहा तो उसे सही मान कर फ्रीजर में रखा जाता है। जांच में किसी बीमारी के लक्षण मिलने पर इसे संक्रामक रक्त मानकर नष्ट कर दिया जाता है। किट के अलावा ब्लड बैंक में जांच करने के लिए दूसरी कोई व्यवस्था नहीं हैं।  
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