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Pratapgarh News: संपादित<bha>--</bha>बुजुर्गों, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेगा स्वास्थ्य विभाग
Sat, 12 Aug 2023 09:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Sat, 12 Aug 2023 09:09 PM IST
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बीमार बुजुर्ग व बच्चों का ख्याल रखेंगी आशा बहुएं
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग मानसिक स्वास्थ्य और नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर आफ एल्डरली(एनपीएचसीई) एक साथ चलाने जा रहा है। जिसके लिए एएनएम और आशा बहुओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित बच्चों व वृद्धों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी आशा व एएनएम को दी गई है।
समय के साथ साथ बुजुर्ग मानसिक रोगी हो रहे हैं। उनके रोगी होने का मुख्य कारण तनाव व बढ़ती उम्र में मानसिक संतुलन खोना है। मेडिकल कॉलेज में हर रोज ऐसे पांच- दस रोगियों की ओपीडी भी हो रही है। बुजुर्गों को मानसिक रोग से छुटकारा दिलाने के लिए इस प्रोग्राम की शुरूआत स्वास्थ्य विभाग करने जा रहा है।हर आयु वर्ग के लोगों का मानसिक स्वास्थ्य आशा बहू करेंगी। मरीज चिन्हित होने के बाद हर क्षेत्र में संजीवनी स्वास्थ्य समूह बनाए जाएंगे। आशा बहू ऐसे रोगियों को चिंहित कर अस्पताल लेकर जाएंगी।
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बुजुर्गों को होने वाली बीमारियां
- मानसिक स्थिति कमजोर होना।
- याददाश्त कमजोर होना।
- नजर कमजोर होना।
-कम सुनाई देना।
-जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द रहना।
-उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी।
-हर समय तनाव-चिंता में घिरे रहना।
-मन में घबराहट, उदासी या बेचैन रहना।
-मन में गलत विचारों का आना।
-नींद व भूख कम लगना ।
-लगातार बोलते रहना।
-बिना वजह शक और गुस्सा करना।
-बार-बार हाथ धोना।
-चीजों को अति व्यवस्थित रखने का प्रयास।
बच्चों में मानसिक रोग
-मंद बुद्धि बच्चे का अधिक चंचल होना।
-एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठना।
-देर से बोलना, बैठना व खड़े होना।
-पढ़ाई में कमजोर होना, स्कूल ना जाना।
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नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ एल्डरली (एनपीएचसीई) के तहत मेडिकल कॉलेज में भी सीनियर सिटिजन की स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर काउंसलिंग भी होती है। अस्पताल में फिजियोथैरेपी यूनिट बनी हुई है। बुजुर्ग इसका भी लाभ ले सकते हैं।
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डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग मानसिक स्वास्थ्य और नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर आफ एल्डरली(एनपीएचसीई) एक साथ चलाने जा रहा है। जिसके लिए एएनएम और आशा बहुओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित बच्चों व वृद्धों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी आशा व एएनएम को दी गई है।
समय के साथ साथ बुजुर्ग मानसिक रोगी हो रहे हैं। उनके रोगी होने का मुख्य कारण तनाव व बढ़ती उम्र में मानसिक संतुलन खोना है। मेडिकल कॉलेज में हर रोज ऐसे पांच- दस रोगियों की ओपीडी भी हो रही है। बुजुर्गों को मानसिक रोग से छुटकारा दिलाने के लिए इस प्रोग्राम की शुरूआत स्वास्थ्य विभाग करने जा रहा है।हर आयु वर्ग के लोगों का मानसिक स्वास्थ्य आशा बहू करेंगी। मरीज चिन्हित होने के बाद हर क्षेत्र में संजीवनी स्वास्थ्य समूह बनाए जाएंगे। आशा बहू ऐसे रोगियों को चिंहित कर अस्पताल लेकर जाएंगी।
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बुजुर्गों को होने वाली बीमारियां
- मानसिक स्थिति कमजोर होना।
- याददाश्त कमजोर होना।
- नजर कमजोर होना।
-कम सुनाई देना।
-जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द रहना।
-उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी।
-हर समय तनाव-चिंता में घिरे रहना।
-मन में घबराहट, उदासी या बेचैन रहना।
-मन में गलत विचारों का आना।
-नींद व भूख कम लगना ।
-लगातार बोलते रहना।
-बिना वजह शक और गुस्सा करना।
-बार-बार हाथ धोना।
-चीजों को अति व्यवस्थित रखने का प्रयास।
बच्चों में मानसिक रोग
-मंद बुद्धि बच्चे का अधिक चंचल होना।
-एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठना।
-देर से बोलना, बैठना व खड़े होना।
-पढ़ाई में कमजोर होना, स्कूल ना जाना।
नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ एल्डरली (एनपीएचसीई) के तहत मेडिकल कॉलेज में भी सीनियर सिटिजन की स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर काउंसलिंग भी होती है। अस्पताल में फिजियोथैरेपी यूनिट बनी हुई है। बुजुर्ग इसका भी लाभ ले सकते हैं।
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डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।