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गौशाला निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को नहीं मिली फूटी कौड़ी

Sat, 30 Mar 2019 01:31 AM IST
विनोद सिंह Gram Panchayats could not get cows for construction of cowshed
Gram Panchayats could not get cows for construction of cowshed Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 30 Mar 2019 01:31 AM IST
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Gram Panchayats could not get fund for construction of cowshed
गो संरक्षण केंद्र - फोटो : अमर उजाला
 सूबे की योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गौ संरक्षण का क्रियान्वयन अधर में जाता दिखाई पड़ रहा है। बगैर किसी ठोस कार्ययोजना के जिले के अफसर हवा में तीर चला रहे हैं। आलम यह है कि ग्राम पंचायतों को गौशाला निर्माण के लिए फूटी कौड़ी नहीं दी गई है और ब्लाक से लेकर जिले तक उन पर कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है।
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अधिकारियों के दबाव के बाद कई जगहों पर ग्राम प्रधानों ने अपनी जेब से कार्य प्रारंभ किया है। आगे काम कैसे होगा, कब धन मिलेगा, निर्माण कार्य में प्राथमिक स्तर पर क्या कार्य किए जाएंगे, इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है। अधिकारियों की तरफ से इस बारे में अभी तक पुख्ता निर्देश भी नहीं जारी हुए हैं। जिससे इस योजना को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों की फसलों को बचाने के लिए आवारा पशुओं को संरक्षण देने को हर ग्राम पंचायत में गौशाला का निर्माण कराने की रूपरेखा बनाई गई। इसके अनुपालन का निर्देश जारी कर दिया, लेकिन ग्राम पंचायतों के खाते में धन नहीं भेजा गया। इतना ही नहीं गौशाला निर्माण की डिजाइन, संसाधन, चारे-पानी की व्यवस्था, देखभाल कौन करेगा, उसका पारिश्रमिक कितना होगा, आदि विषयों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
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अब हालात यह है कि ब्लाक के बीडीओ व पशुपालन विभाग को फौरी तौर पर इसकी व्यवस्था पूर्ण कराने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन बगैर संसाधनों के वह भी हवा में तीर चला रहे हैं। शिवगढ़, बाबा बेलखरनाथ, पट्टी ब्लाक में गौशालाओं का निर्माण व संचालन धन के अभाव में अटका पड़ा है। कुछ ग्राम प्रधानों ने अपने संसाधनों से कार्य करवा लिए हैं, लेकिन अब उन पर दुकानदार उधारी चुकाने का दबाव बना रहे हैं।

प्रधानों की बढ़ी चिंता, कब मिलेंगे खर्च हुए रुपये
रानीगंज विधानसभा के खमपुर दूबेपट्टी में शासन से स्वीकृत लगभग 1.50 करोड़ की लागत से आठ एकड़ में गौशाला का निर्माण हो रहा है। जिसमें पांच हजार जानवरों के रहने की क्षमता है। इसके अलावा बुढ़ौरा में ग्राम पंचायत स्तर से कार्य होने हैं, लेकिन धनाभाव में सारे कार्य ठप पड़े हैं। पट्टी में मेंहदिया व उसरौली, बाबा बेलखरनाथ धाम में बिजहरा, जोगीपुर, सांगापट्टी में प्रधानों ने अपने संसाधनों से अभी तक समतलीकरण, खुदाई, बैरिकेडिंग, बोरिंग, गेट आदि कार्य करवा दिया है। अभी तक ब्लाक स्तर से ग्राम पंचायतों को फूटी कौड़ी नहीं दी गई है और मानीटरिंग रोज हो रही है। उधर, प्रधान जेब से खर्च हुए पैसे को लेकर परेशान हैं। 


गौशाला के निर्माण के लिए संबंधित ब्लाक के बीडीओ और पशु अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। अगर प्रधानों को गौशाला के निर्माण के लिए धनराशि नहीं दी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। मार्कण्डेय शाही, डीएम।
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