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आतंकी सांड़ से मिली निजात, काबू कर साथ ले गए सुल्तानपुर के चार युवक
Mon, 20 May 2019 12:03 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 20 May 2019 12:03 AM IST
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आतंकी सांड़ से निजात
- फोटो : pratapgarh
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डेरवा और आसपास के गांवों में आतंक का पर्याय बने आवारा सांड़ को रविवार को सुल्तानपुर से पहुंचे चार युवकों ने कड़ी मशक्कत के बाद काबू में कर लिया। वह उसे अपने साथ ले गए। इलाके में इस सांड़ का आतंक इस कदर था कि लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। सांड़ ने हमलाकर तीन लोगों की जान ले ली थी।
वहीं दर्जनों लोगों को मारकर जख्मी कर दिया था। इस सांड़ का पकड़ने के लिए पश ुचिकित्सालय से टीम आई थी, लेकिन उसके हमलावर होने पर बहाने बनाकर लौट गई थी। सांड़ को ले जाने के लिए ग्रामीणों ने चंदा लगाकर वाहन का इंतजाम किया।
डेरवा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग पिछले दो सालों से एक सांड़ के आतंक से परेशान थे। उसके हमले से तीन लोगों की मौत हो चुकी है तो दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। सांड़ के भय के चलते लोग घरों से निकलने में डरते थे। कई बार लोगों ने इसकी जानकारी प्रशासन के साथ ही पशुपालन और वन विभाग को दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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काफी दबाव बनाने के बाद बीते 17 मई को सांड़ पकड़ने के लिए पशु चिकित्सालय से एक टीम आई, लेकिन सांड़ को देखकर संसाधन न होने का बहाना बनाते हुए लौट गई। रविवार को गांव में चार युवक पहुंचे। उन्होंने अपने को सुल्तानपुर जिले का निवासी बताया। उनके नाम शहजाद, सोनू, लईक व अनवर थे।
ग्रामीणों की मदद से चारों ने रस्सियों के सहारे सांड़ को काबू में कर लिया। इसके बाद उसे बांध लिया। बाद में ग्रामीणों ने चंदा लगाकर एक वाहन का इंतजाम किया। युवक सांड़ को अपने साथ ले गए। युवकों का कहना था कि सांड़ को वह जंगल में छोड़ देंगे। इस दौरान गांव के प्रधान कुंवर पटेल, फार्मासिस्ट डेरवा राजाराम सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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वहीं दर्जनों लोगों को मारकर जख्मी कर दिया था। इस सांड़ का पकड़ने के लिए पश ुचिकित्सालय से टीम आई थी, लेकिन उसके हमलावर होने पर बहाने बनाकर लौट गई थी। सांड़ को ले जाने के लिए ग्रामीणों ने चंदा लगाकर वाहन का इंतजाम किया।
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डेरवा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग पिछले दो सालों से एक सांड़ के आतंक से परेशान थे। उसके हमले से तीन लोगों की मौत हो चुकी है तो दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। सांड़ के भय के चलते लोग घरों से निकलने में डरते थे। कई बार लोगों ने इसकी जानकारी प्रशासन के साथ ही पशुपालन और वन विभाग को दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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काफी दबाव बनाने के बाद बीते 17 मई को सांड़ पकड़ने के लिए पशु चिकित्सालय से एक टीम आई, लेकिन सांड़ को देखकर संसाधन न होने का बहाना बनाते हुए लौट गई। रविवार को गांव में चार युवक पहुंचे। उन्होंने अपने को सुल्तानपुर जिले का निवासी बताया। उनके नाम शहजाद, सोनू, लईक व अनवर थे।
ग्रामीणों की मदद से चारों ने रस्सियों के सहारे सांड़ को काबू में कर लिया। इसके बाद उसे बांध लिया। बाद में ग्रामीणों ने चंदा लगाकर एक वाहन का इंतजाम किया। युवक सांड़ को अपने साथ ले गए। युवकों का कहना था कि सांड़ को वह जंगल में छोड़ देंगे। इस दौरान गांव के प्रधान कुंवर पटेल, फार्मासिस्ट डेरवा राजाराम सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।