फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Gave my life with a smile for the glory of the tricolor

Pratapgarh News: तिरंगे की शान के लिए दे दी थी हंस कर जान

Mon, 14 Aug 2023 08:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Mon, 14 Aug 2023 08:33 PM IST
विज्ञापन
Gave my life with a smile for the glory of the tricolor
चीन, पाकिस्तान से जंग में 32 जवानों ने दी थी शहादत
विज्ञापन

जान मोहम्मद
प्रतापगढ़। देश की शान के लिए जान देने में बेल्हा कभी पीछे नहीं रहा। सन् 1962 से अब तक हुई जंग में जिले के 32 सपूतों ने सीमा की ओर बढ़ रही गोलियाें को अपने फौलादी सीने पर ही रोक लिया। देश के लिए शहीद हुए इन जवानों ने बेल्हा का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उनकी न मौजूदगी में उनके परिवारों को थोड़ी बहुत तकलीफ झेलनी पड़ रही है।
सरहदी देशों ने जब भी भारत की ओर आंख उठाई, तब बेल्हा के जवानों ने मुंह तोड़ जवाब दिया। सैनिक कल्याण कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1962 में जब चीन से जंग हुई तो बेल्हा की माटी के लाल सीताराम सिंह, हरिविलास सिंह, लियाकत अली, भगौती प्रसाद सिंह, राजबहादुर यादव, राजपति सिंह, अब्दुल हुसैन, हरिनारायण सिंह समेत कुल आठ जवानों ने दुश्मनों को करारा जवाब दिया।
विज्ञापन

तिरंगे के शान की ओर बढ़ रहीं चीनी गोलियों के सामने इन सपूतों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। भारत और पाक के बीच दो बार जंग हुई। पहला युद्ध 1965 में हुआ। इस जंग में भी देश के लिए जगदीश तिवारी ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। पांच वर्ष बाद 1971 में फिर पाकिस्तान ने भारत की ओर नजर उठाई। इस बार भी उसे मुंह की खानी पड़ी। उस समय जिले के रामसुख तिवारी, रामअवध मिश्र, रामपाल, अच्छेलाल, एसएन पाठक, अर्जुन सिंह, रामविलास, रामबहादुर, सूर्यनारायण्, बंशीलाल ने दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

दुश्मनों के आगे जिले की धरती के यह लाल सीना तान कर खड़े हो गए। 1989 में ऑपरेशन पवन श्रीलंका के तहत देश के लिए बेल्हा के मोहम्मद शरीफ ने अपना लहू बहा दिया। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में भी बेल्हा के लालों ने अपने देश के लिए कुर्बानी दी। जंग के मैदान में दुश्मनों को नाकों चने चबाने को मजबूर करते हुए विजय कुमार शुक्ल शहीद हो गए।

--------
देश के ये भी थे रखवाले
ऑपरेशन रक्षक के दौरान देश की सीमा पर अचानक हुई गोलीबारी में जिले के रामेंद्र प्रताप सिंह, शशिकांत, सूबेदार शम्सुल हक, मनोज कुमार पांडेय, राघवेंद्र प्रताप सिंह व चंद्रभूषण सिंह ने देश के लिए हंसते हुए प्राण दे दिए। ऑपरेशन पराक्रम में मो.इसरार, अतीकुर रहमान, अनिरुद्ध प्रताप सिंह भी तिरंगे की शान के लिए हंस कर शहीद हुए। वहीं ऑपरेशन रहीनों में भी जिले के महादेव की शहादत को बेल्हा कभी नहीं भुला सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed