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सरकार सहयोगी, तकनीक अपनाएं किसान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarh
कृषि विज्ञान केंद्र कालाकांकर में रविवार को आयोजित ‘संकल्प से सिद्धि’ कार्यक्रम में जुटे विशेषज्ञों ने न्यू इंडिया पर मंथन किया। जिले के 17 ब्लाकों से आए हजारों किसानो के बीच उनकी आय दोगुनी करने पर भी राय रखी गई। कृषि वैज्ञानिक, कृषि मंत्रालय भारत सरकार के सलाहकार, कृषि नालेज एंड मैनेजमेंट निदेशालय के निदेशक समेत अन्य लोगों ने किसानों को खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए नई तकनीक, नए कृषि यंत्र, उन्नत बीज, मृदा परीक्षण के साथ कृषि आधारित व्यवसायिक परीक्षणों पर जोर दिया। कहा कि कृषि को जीविका नहीं बल्कि सामाजिक हैसियत का आधार बनाएं।
इससे पहले कृषि विज्ञान केंद्र की अध्यक्ष पूर्व सांसद रत्ना सिंह, सांसद हरिवंश सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। कृषि नालेज एंड मैनेजमेंट निदेशालय के निदेशक एवं कृषि मंत्रालय के सलाहकार डा. एसके सिंह ने कहा कि दलहन में हम 90 प्रतिशत तक आत्मनिर्भर हो गए हैं। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब जब दलहन-तिलहन का उत्पादन इतना बढ़ा है। दूध, सब्जी और मछली उत्पादन में हम विश्व में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। बावजूद इसके आमदनी न होने से किसान संतुष्ट नहीं हैं। सरकार सहयोगी है, किसान तकनीक अपनाएं। केंद्र सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों और जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचकर योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास कर रही है।
आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने कहा कि जनसंख्या का दबाव खेती पर भी बढ़ा है। जमीन का स्वाद परखिए। प्रतापगढ़ जैसे जिले में सिर्फ आंवला और ऊसर है। समय बदला है, तकनीक बदली है। देशभर में 734 कृषि विज्ञान केंद्र खुले हैं। एक गाय के गोबर और मूत्र से पांच बीघे खेत में जैविक खेती की जा सकती है। खेतोें में नाइट्रोजन की जगह ढैंचा और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें। पानी बचाने के लिए स्प्रिंकल और ड्रिप सिंचाई को प्रयोग में लाएं। कृृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. एके श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार किसानों को लगातार ऋण दे रही है। किसान आधार को खाते से लिंक कराए। केंद्र की गृह वैज्ञानिक स्वाती दीपक दूबे कालाकांकर महिला अभिरूचि द्वारा स्थापित अगरबत्ती उत्पादन के बारे में जानकारी देते हुए इसे किसानों के सामने रखा। उपकृषि निदेशक डा. रघुराज सिंह ने कृषि योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। केंद्र की अध्यक्ष पूर्व सांसद रत्ना सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि किसान खेती के साथ मौन पालन, मछली पालन, मुर्गी पालन से भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश पांडेय, इशहाक खां, कपिल द्विवेदी, नीरज तिवारी, डा. घनश्याम यादव, डा. सुधाकर सिंह, डा. नवीन सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डा. भाष्कर शुक्ला और डा. सुधाकर सिंह ने आभार ज्ञापित किया।
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इससे पहले कृषि विज्ञान केंद्र की अध्यक्ष पूर्व सांसद रत्ना सिंह, सांसद हरिवंश सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। कृषि नालेज एंड मैनेजमेंट निदेशालय के निदेशक एवं कृषि मंत्रालय के सलाहकार डा. एसके सिंह ने कहा कि दलहन में हम 90 प्रतिशत तक आत्मनिर्भर हो गए हैं। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब जब दलहन-तिलहन का उत्पादन इतना बढ़ा है। दूध, सब्जी और मछली उत्पादन में हम विश्व में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। बावजूद इसके आमदनी न होने से किसान संतुष्ट नहीं हैं। सरकार सहयोगी है, किसान तकनीक अपनाएं। केंद्र सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों और जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचकर योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास कर रही है।
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आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने कहा कि जनसंख्या का दबाव खेती पर भी बढ़ा है। जमीन का स्वाद परखिए। प्रतापगढ़ जैसे जिले में सिर्फ आंवला और ऊसर है। समय बदला है, तकनीक बदली है। देशभर में 734 कृषि विज्ञान केंद्र खुले हैं। एक गाय के गोबर और मूत्र से पांच बीघे खेत में जैविक खेती की जा सकती है। खेतोें में नाइट्रोजन की जगह ढैंचा और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें। पानी बचाने के लिए स्प्रिंकल और ड्रिप सिंचाई को प्रयोग में लाएं। कृृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. एके श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार किसानों को लगातार ऋण दे रही है। किसान आधार को खाते से लिंक कराए। केंद्र की गृह वैज्ञानिक स्वाती दीपक दूबे कालाकांकर महिला अभिरूचि द्वारा स्थापित अगरबत्ती उत्पादन के बारे में जानकारी देते हुए इसे किसानों के सामने रखा। उपकृषि निदेशक डा. रघुराज सिंह ने कृषि योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। केंद्र की अध्यक्ष पूर्व सांसद रत्ना सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि किसान खेती के साथ मौन पालन, मछली पालन, मुर्गी पालन से भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस मौके पर ओमप्रकाश पांडेय, इशहाक खां, कपिल द्विवेदी, नीरज तिवारी, डा. घनश्याम यादव, डा. सुधाकर सिंह, डा. नवीन सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डा. भाष्कर शुक्ला और डा. सुधाकर सिंह ने आभार ज्ञापित किया।
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