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जंतु विज्ञान की लैब में नहीं है स्पेसीमेन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:31 PM IST
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महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं के शैक्षिक भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कॉलेजों के लैब में उपकरणों की कमी होने से छात्र-छात्राओं को प्रयोगात्मक विषयों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सैद्धांतिक पढ़ाई तो की जा रही है, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। जिले में संचालित हो रहे तमाम महाविद्यालयों ने विज्ञान संकाय की मान्यता ले रखी है। इस संकाय में बायोलॉजी स्ट्रीम से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक होती है। इसके बावजूद महाविद्यालय में इन छात्र-छात्राओं के अध्ययन की समुचित व्यवस्था नहीं है। जीव विज्ञान से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए महाविद्यालयों में लैब है, लेकिन वहां अध्ययन के लिए विषय सामग्री नहीं है। जिससे छात्र-छात्राएं प्रयोगात्मक परीक्षण नहीं कर पा रहे हैं।
जंतु विज्ञान के लैब की सबसे महत्वपूर्ण विषय सामग्री स्पेसीमेन होती है। जिसकी व्यवस्था किसी कॉलेज में नहीं है। इस प्रयोगात्मक विषय सामग्री के माध्यम से शिक्षक छात्र-छात्राओं को जंतुओं के वर्गीकरण की जानकारी देते हैं। जिसमें जंतुओं के कुल, उपवर्ग व जाति के बारे में बताया जाता है। इसके बावजूद महाविद्यालयों में इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं विश्वविद्यालय नियम के मुताबिक जंतु विज्ञान विषय की मान्यता लेने वाले कॉलेजों में प्रयोगात्मक विषयों की व्यवस्था होनी चाहिए। ऐसा न होने पर उन कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जाती है।
इसके बावजूद महाविद्यालय प्रशासन लापरवाह रवैया अपनाए हुए है। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि जंतु विज्ञान विषय का अध्ययन जंतुओं पर किया जाता है। जिसके लिए लैब में स्पेसीमेन होना जरूरी होता है। प्रयोगात्मक शुल्क का भुगतान करने के बाद भी महाविद्यालय इस विषय सामग्री की व्यवस्था नहीं करता है। जिससे छात्र-छात्राएं प्रयोगात्मक विषयों का परीक्षण नहीं कर पाते हैं और उन्हें विषय का समुचित ज्ञान नहीं मिल पाता है। आधी अधूरी पढ़ाई कर वह सिर्फ डिग्री पा जाते हैं। वहीं प्रयोगात्मक परीक्षा लेने के लिए बाहर से आने वाले परीक्षक की भी कॉलेजों में लैब के बारे में नहीं पूछते हैं। वह सिर्फ मौखिक प्रश्नों को पूछ कर परीक्षा को कोरम पूरा कर लेते हैं।
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जंतु विज्ञान के लैब की सबसे महत्वपूर्ण विषय सामग्री स्पेसीमेन होती है। जिसकी व्यवस्था किसी कॉलेज में नहीं है। इस प्रयोगात्मक विषय सामग्री के माध्यम से शिक्षक छात्र-छात्राओं को जंतुओं के वर्गीकरण की जानकारी देते हैं। जिसमें जंतुओं के कुल, उपवर्ग व जाति के बारे में बताया जाता है। इसके बावजूद महाविद्यालयों में इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं विश्वविद्यालय नियम के मुताबिक जंतु विज्ञान विषय की मान्यता लेने वाले कॉलेजों में प्रयोगात्मक विषयों की व्यवस्था होनी चाहिए। ऐसा न होने पर उन कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जाती है।
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इसके बावजूद महाविद्यालय प्रशासन लापरवाह रवैया अपनाए हुए है। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि जंतु विज्ञान विषय का अध्ययन जंतुओं पर किया जाता है। जिसके लिए लैब में स्पेसीमेन होना जरूरी होता है। प्रयोगात्मक शुल्क का भुगतान करने के बाद भी महाविद्यालय इस विषय सामग्री की व्यवस्था नहीं करता है। जिससे छात्र-छात्राएं प्रयोगात्मक विषयों का परीक्षण नहीं कर पाते हैं और उन्हें विषय का समुचित ज्ञान नहीं मिल पाता है। आधी अधूरी पढ़ाई कर वह सिर्फ डिग्री पा जाते हैं। वहीं प्रयोगात्मक परीक्षा लेने के लिए बाहर से आने वाले परीक्षक की भी कॉलेजों में लैब के बारे में नहीं पूछते हैं। वह सिर्फ मौखिक प्रश्नों को पूछ कर परीक्षा को कोरम पूरा कर लेते हैं।
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