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पुराने प्रश्नों को हल कर आंके क्षमता
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 25 Jan 2016 11:06 PM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षार्थी अपनी तैयारी की क्षमता आंकने के लिए पुराने प्रश्नों को हल करें। साथ ही वह तैयार किए गए पाठ्यक्रम का रिवीजन कर अपनी तैयारी को प्रभावी बना सकते हैं। ऐसा करने पर वह कम समय में अच्छी तैयारी कर परीक्षा के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। इसके लिए अभी से ही योजनाबद्ध तरीके से उन्हें अपनी तैयारी शुरू करनी होगी। ऐसा कर वह परीक्षा में अच्छे अंक हसिल कर सकेंगे।
यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होने जा रही है। परीक्षार्थी तैयारी करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। इसके लिए वह विद्यालयों में पढ़ाए गए विषयों के बने नोट्स का सहारा ले रहे हैं। साथ ही कोचिंग के नोट्स से भी तैयारी कर रहे हैं। वहीं बाजारों में बिकने वाली तमाम परीक्षापयोगी पुस्तिकाओं का भी सहारा ले रहे हैं। ऐसा करके तमाम परीक्षार्थी अपनी तैयारी को पूरा बता रहे हैं, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा के दौरान आते हुए प्रश्नों को भी परीक्षार्थी ठीक ढंग से हल नहीं कर पाते। वह पछतावे के साथ उस प्रश्न को छोड़ देते हैं। जिसे पहले उन्होंने अच्छे तरीके से हल किया था। इंटर कालेज के वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि परीक्षार्थियाें के साथ ऐसी स्थिति तब बनती है जब वह पूरा पाठ्यक्रम तो पढ़ लेते हैं, लेकिन उसका प्रभावी ढंग से रिवीजन नहीं करते हैं।
साथ ही विगत वर्ष में पूछे गए प्रश्नों को हल कर अपनी क्षमता नहीं आंकते हैं। वह एक बार पूरा पाठ्यक्रम पढ़कर अपनी तैयारी को पूरा समझ लेते हैं और परीक्षा देने के लिए चले जाते हैं। परीक्षा के बाद उन्हें एहसास होता है कि वह पाठ्यक्रम रिवीजन कर लेते तो प्रश्नों का बखूबी उत्तर दे सकते हैं। शिक्षकों का कहना है कि सभी छात्र-छात्राओं की याद करने की क्षमता अलग-अलग होती है। कोई जल्दी याद कर लेता है तो कोई देर में। देर में याद होने पर छात्र-छात्राओं को विषयवस्तु अगूढ़ लगने लगती है। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं को पढ़ी हुई विषय वस्तु को दोहरा लेना चाहिए। जिससे उनके दिमाग में वह विषय वस्तु बैठ जाए। रिवीजन जितनी बार किया जाए वह परीक्षार्थियों के लिए उतना हितकर होगा। साथ ही पाठ्यक्रम पूरा तैयार करने के बाद विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को हल अपने तैयारी की क्षमता आंकनी चाहिए।
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यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होने जा रही है। परीक्षार्थी तैयारी करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। इसके लिए वह विद्यालयों में पढ़ाए गए विषयों के बने नोट्स का सहारा ले रहे हैं। साथ ही कोचिंग के नोट्स से भी तैयारी कर रहे हैं। वहीं बाजारों में बिकने वाली तमाम परीक्षापयोगी पुस्तिकाओं का भी सहारा ले रहे हैं। ऐसा करके तमाम परीक्षार्थी अपनी तैयारी को पूरा बता रहे हैं, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा के दौरान आते हुए प्रश्नों को भी परीक्षार्थी ठीक ढंग से हल नहीं कर पाते। वह पछतावे के साथ उस प्रश्न को छोड़ देते हैं। जिसे पहले उन्होंने अच्छे तरीके से हल किया था। इंटर कालेज के वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि परीक्षार्थियाें के साथ ऐसी स्थिति तब बनती है जब वह पूरा पाठ्यक्रम तो पढ़ लेते हैं, लेकिन उसका प्रभावी ढंग से रिवीजन नहीं करते हैं।
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साथ ही विगत वर्ष में पूछे गए प्रश्नों को हल कर अपनी क्षमता नहीं आंकते हैं। वह एक बार पूरा पाठ्यक्रम पढ़कर अपनी तैयारी को पूरा समझ लेते हैं और परीक्षा देने के लिए चले जाते हैं। परीक्षा के बाद उन्हें एहसास होता है कि वह पाठ्यक्रम रिवीजन कर लेते तो प्रश्नों का बखूबी उत्तर दे सकते हैं। शिक्षकों का कहना है कि सभी छात्र-छात्राओं की याद करने की क्षमता अलग-अलग होती है। कोई जल्दी याद कर लेता है तो कोई देर में। देर में याद होने पर छात्र-छात्राओं को विषयवस्तु अगूढ़ लगने लगती है। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं को पढ़ी हुई विषय वस्तु को दोहरा लेना चाहिए। जिससे उनके दिमाग में वह विषय वस्तु बैठ जाए। रिवीजन जितनी बार किया जाए वह परीक्षार्थियों के लिए उतना हितकर होगा। साथ ही पाठ्यक्रम पूरा तैयार करने के बाद विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को हल अपने तैयारी की क्षमता आंकनी चाहिए।
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