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Pratapgarh News: संपादित- तेज आवाज आई और लगा बस के दो टुकड़े हो गए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Apr 2024 01:13 AM IST
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Edited - There was a loud noise and it seemed as if the bus broke into two pieces.
उन्नाव से मिर्जापुर मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालु आधी रात को नींद में थे। अचानक इतनी तेज आवाज आई कि वे सोच भी न पाए कि क्या हुआ। असहनीय दर्द से चीख-पुकार ही निकली। जिन्हें हल्की चोटें आईं, वह सहमे हुए थे।
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हथिगवां क्षेेत्र में हुए बस हादसे में बाल-बाल बचे उन्नाव जनपद के थाना धाता के मैता निवासी रामनरायण ने बताया कि वह अपने परिवार व कुछ लोगों साथ विंध्यवासिनी देवी के दर्शन करने जा रहे थे। उनके साथ ही 12 वर्षीय बेटी संध्या भी थी।
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रामनारायण के अनुसार प्राइवेट बस से सभी लोग घर से निकले थे। कुंडा से आगे बढ़ने के बाद रात अधिक हो चुकी थी। इसलिए बस में सवार श्रद्धालुओं में कुछ सो गए थे, कुछ को झपकी आ गई थी। अचानक तेज आवाज के साथ जोर का झटका लगा। सभी अपनी सीट से उछलकर नीचे गिरे। बस बीच से फटकर बिखर गई थी। लगा कि अब कोई जिंदा नहीं बचेगा। आंखों के सामने कुछ देर के लिए अंधेरा छा गया।
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रात के अंधेरे में टक्कर के बाद घायलों की चीख-पुकार काफी दूर तक गई होगी। ग्रामीण मदद को दौड़ पड़े। इस बीच कुछ लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी। जो भी पहुंचा वह रात के अंधेरे में बस में फंसे श्रद्धालुओं को पीछे की ओर से निकालने लगा।
समय रहते हथिगवां थानाध्यक्ष नंदलाल भी पहुंच गए। बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने के बाद कालाकांकर, हथिगवां, मानिकपुर, कुंडा समेत अन्य स्थानों से 12 एंबुलेंस मंगाकर घायलों को सीएचसी भेजा गया। वहां से दस घायलों को लेकर पांच एंबुलेंस प्रयागराज के लिए रवाना हुए। यह बताते-बताते बेटी संध्या व पड़ोसी कृष्ण कुमार और वासू को खोने के गम में रामनारायण बिलखने लगे।
नाले में बस पलटती तो जाती कई जानें
फूलमती नाले के पास ट्रक से टक्कर के बाद श्रद्धालुओं से भरी बस नाले के करीब पलट गई। गनीमत रही कि बस एक बार ही पलटी। यदि दोबारा पलटती तो करीब 30 फिट नीचे नाले में चली जाती। नाले में पानी भी अधिक है। इससे हादसा और बड़ा हो सकता था।
बीस किमी पहले खाया था खाना
घटनास्थल से बीस किमी दूर बस रुकवाकर ढाबे पर सभी ने खाना खाया था। चूंकि नवरात्र का पहला व्रत रखना था। इसलिए होटल के खाने के बजाए घर से लेकर चले भोजन का भोग लगाया। इसके बाद सभी वहां से साढ़े ग्यारह बजे गंतव्य की ओर रवाना हुई।

कृष्ण कुमार की नहीं हो सकी इच्छा पूरी
हादसे में मृत कृष्ण कुमार काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उसने ठीक होने के बाद मां विंध्यवासिनी के दर्शन का संकल्प लिया था। चैत्र नवरात्र के पहले दिन दर्शन करने जा रहे पड़ोसियों के साथ वह भी चल पड़ा। उसे क्या मालूम था वह मां का दर्शन नहीं कर पाएगा।
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