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कहीं यह किसी विनाशकारी फिल्म का ट्रेलर तो नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Tue, 12 May 2015 11:53 PM IST
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नेपाल में आए भूकंप ने सब कुछ तबाह कर डाला है। वहां के लोग अभी पूरी तरह से भूकंप के कहर से उबर नहीं पाए हैं। मंगलवार को भूकंप के झटके ने बेल्हावासियों को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। महीने भर के अंदर तीन बार आए भूकंप के झटके को लोग भविष्य में आने वाले खतरे से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों के बीच यहां तक चर्चा है कि हो न हो तीन बार का झटका उस फिल्म के ट्रेलर की तरह है जो विनाश का संकेत दे रहा है। उस फिल्म की तस्वीर अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसा लग रहा है कि जैसे कुछ अशुभ होने वाला है।
हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं। मगर एक महीने के भीतर तीन बार धरती का डोलना मतलब कहीं कुछ ऐसा है जो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है, जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है। लोग इसी बात पर चर्चा कर रहे हैं। नेपाल में धरती डोलने का परिणाम सामने है। लोग आने वाले खतरे को भांपकर परेशान हो रहे हैं।
बार-बार धरती डोलने किसी खतरे का संकेत हैं। लोग इसको पर्यावरण पर हमला और पृथ्वी पर बढ़ रहे बोझ से जोड़कर देख रहे हैं। इनका मानना है कि धरती पर पर्यावरण दूषित हो गया है। हवा, पानी कुछ भी तो शुद्ध नहीं हैं। हरियाली खत्म की जा रही है। पहाड़ों को काटा जा रहा है। नदियां और तालाबों का नामों निशान मिटता जा रहा है। धरती पर बोझ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अगर ये सब दुरुस्त होता तो शायद धरती करवट न लेती।
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हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं। मगर एक महीने के भीतर तीन बार धरती का डोलना मतलब कहीं कुछ ऐसा है जो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है, जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है। लोग इसी बात पर चर्चा कर रहे हैं। नेपाल में धरती डोलने का परिणाम सामने है। लोग आने वाले खतरे को भांपकर परेशान हो रहे हैं।
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बार-बार धरती डोलने किसी खतरे का संकेत हैं। लोग इसको पर्यावरण पर हमला और पृथ्वी पर बढ़ रहे बोझ से जोड़कर देख रहे हैं। इनका मानना है कि धरती पर पर्यावरण दूषित हो गया है। हवा, पानी कुछ भी तो शुद्ध नहीं हैं। हरियाली खत्म की जा रही है। पहाड़ों को काटा जा रहा है। नदियां और तालाबों का नामों निशान मिटता जा रहा है। धरती पर बोझ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अगर ये सब दुरुस्त होता तो शायद धरती करवट न लेती।
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