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Pratapgarh News: कॉलेजों की लापरवाही से नहीं बन पा रहे बेहतर खिलाड़ी
Sun, 10 Sep 2023 08:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Sun, 10 Sep 2023 08:58 PM IST
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खेल मैदान न होने से प्रशिक्षण नहीं, खेल के नाम पर वसूल रहे फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले के महाविद्यालयों में खेलकूद भले न हो लेकिन, कॉलेज प्रशासन नियमित रूप से क्रीड़ाशुल्क वसूल रहा है। ज्यादातर कॉलेजों के पास न तो मैदान और न हीं प्रशिक्षक हैं।
शासन व विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कॉलेज परिसर में खेल का मैदान होना चाहिए। ताकि कॉलेज में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देकर कई तरह के खेलों में निपुण बनाया जा सके और वे पढ़ाई कके साथ-साथ खेल में भी अपना कॅरियर तलाश सकें।
फिलहाल जिले के महाविद्यालयों में खेलों को लेकर कोई माहौल नहीं तैयार किया जा रहा है। जिले में चार राजकीय, सात अनुदानित सहित कुल 159 महाविद्यालय है। इनमें से कई गिने-चुने महाविद्यालयों में ही खेल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जहां प्रशिक्षण दिया भी जा रहा है, वहां तमाम कॉलेजों में खेल के मैदान भी नहीं है। जहां मैदान भी हैं, वहां पर खेती की जा रही है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के नियम का हवाला देकर सभी महाविद्यालयों मेें बतौर क्रीड़ा शुल्क 50 रुपये वसूला जा रहा है। इसमें 15 रुपये विश्वविद्यालय का अंश होता है।
ऐसे में छात्र-छात्राओं से खेल के मद में वसूले जा रहे लाखों रुपये का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। क्रीडा़ शुल्क वसूल रहे तमाम कॉलेजों के पास न खेल मैदान है और न ही प्रशिक्षक ही हैं। जिले के रानीगंज, ढि़ढुई राजकीय महाविद्यालय, एमडीपीजी, एमएमपीजी कालाकांकर, सरस्वती पीजी कॉलेज लालगंज सहित कई कॉलेजों को छोड़ दें तो किसी भी कॉलेज में प्रशिक्षक नहीं है।
वहीं एमडीपीजी कॉलेज में खेल प्रशिक्षक तो हैं लेकिन खेल का मैदान नहीं है। विश्वविद्यालय प्रतियोगिता के दौरान एमडीपीजी में सिर्फ इनडोर गेम्स ही होते हैं। ऐसे में वहां के छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण स्पोर्ट्स स्टेडियम में दिया जाता है।
इसकी जांच विश्वविद्यालय प्रशासन भी नहीं कर रहा है। ऐसे में जहां एक तरफ छात्र-छात्राओं का आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है। वहीं उनके भविष्य के साथ भी खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
कुलपति डॉ.अखिलेश सिंह ने कहा, कॉलेज प्रशासन की ओर से खेल को लेकर की जा रही लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन सभी कॉलेजों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करेगा, जो खेल मद के पैसे का गलत उपयोग कर रहे हैं। साथ ही छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण नहीं दे रहे हैं। खेल के मैदान का गलत उपयोग किए जाने की भी जांच की जाएगी।
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बिना प्रशिक्षण के खेल मैदान में उतरते हैं खिलाड़ी
नए सत्र 2023-24 की शुरुआत में ही कुलपति ने कॉलेजों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि खेल गतिविधियों को जारी रखा जाए। खेल कैलेंडर के अनुसार छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाए। इसके बावजूद कॉलेजों में खेल प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित अन्तर्महाविद्य्र्रालय प्रतियोगिता में बिना प्रशिक्षण के ही खिलाड़ियों को खेल मैदान में उतार दिया जाता है। प्रशिक्षण न दे पाने से ही बीते वर्ष हॉकी खेल में अन्तरविश्वविद्यालीय टीम गठित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था। गैर जनपदों से आई टीमों के साथ ही जिले के एक-दो टीमों में से खिलाड़ियों का चयन किया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले के महाविद्यालयों में खेलकूद भले न हो लेकिन, कॉलेज प्रशासन नियमित रूप से क्रीड़ाशुल्क वसूल रहा है। ज्यादातर कॉलेजों के पास न तो मैदान और न हीं प्रशिक्षक हैं।
शासन व विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कॉलेज परिसर में खेल का मैदान होना चाहिए। ताकि कॉलेज में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देकर कई तरह के खेलों में निपुण बनाया जा सके और वे पढ़ाई कके साथ-साथ खेल में भी अपना कॅरियर तलाश सकें।
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फिलहाल जिले के महाविद्यालयों में खेलों को लेकर कोई माहौल नहीं तैयार किया जा रहा है। जिले में चार राजकीय, सात अनुदानित सहित कुल 159 महाविद्यालय है। इनमें से कई गिने-चुने महाविद्यालयों में ही खेल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जहां प्रशिक्षण दिया भी जा रहा है, वहां तमाम कॉलेजों में खेल के मैदान भी नहीं है। जहां मैदान भी हैं, वहां पर खेती की जा रही है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के नियम का हवाला देकर सभी महाविद्यालयों मेें बतौर क्रीड़ा शुल्क 50 रुपये वसूला जा रहा है। इसमें 15 रुपये विश्वविद्यालय का अंश होता है।
ऐसे में छात्र-छात्राओं से खेल के मद में वसूले जा रहे लाखों रुपये का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। क्रीडा़ शुल्क वसूल रहे तमाम कॉलेजों के पास न खेल मैदान है और न ही प्रशिक्षक ही हैं। जिले के रानीगंज, ढि़ढुई राजकीय महाविद्यालय, एमडीपीजी, एमएमपीजी कालाकांकर, सरस्वती पीजी कॉलेज लालगंज सहित कई कॉलेजों को छोड़ दें तो किसी भी कॉलेज में प्रशिक्षक नहीं है।
वहीं एमडीपीजी कॉलेज में खेल प्रशिक्षक तो हैं लेकिन खेल का मैदान नहीं है। विश्वविद्यालय प्रतियोगिता के दौरान एमडीपीजी में सिर्फ इनडोर गेम्स ही होते हैं। ऐसे में वहां के छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण स्पोर्ट्स स्टेडियम में दिया जाता है।
इसकी जांच विश्वविद्यालय प्रशासन भी नहीं कर रहा है। ऐसे में जहां एक तरफ छात्र-छात्राओं का आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है। वहीं उनके भविष्य के साथ भी खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
कुलपति डॉ.अखिलेश सिंह ने कहा, कॉलेज प्रशासन की ओर से खेल को लेकर की जा रही लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन सभी कॉलेजों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करेगा, जो खेल मद के पैसे का गलत उपयोग कर रहे हैं। साथ ही छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण नहीं दे रहे हैं। खेल के मैदान का गलत उपयोग किए जाने की भी जांच की जाएगी।
बिना प्रशिक्षण के खेल मैदान में उतरते हैं खिलाड़ी
नए सत्र 2023-24 की शुरुआत में ही कुलपति ने कॉलेजों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि खेल गतिविधियों को जारी रखा जाए। खेल कैलेंडर के अनुसार छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाए। इसके बावजूद कॉलेजों में खेल प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित अन्तर्महाविद्य्र्रालय प्रतियोगिता में बिना प्रशिक्षण के ही खिलाड़ियों को खेल मैदान में उतार दिया जाता है। प्रशिक्षण न दे पाने से ही बीते वर्ष हॉकी खेल में अन्तरविश्वविद्यालीय टीम गठित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था। गैर जनपदों से आई टीमों के साथ ही जिले के एक-दो टीमों में से खिलाड़ियों का चयन किया गया था।