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डीएसपी जिया उल हक हत्याकांड : सीबीआई दस साल बाद बलीपुर में फिर देगी दस्तक, राजाभैया की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Fri, 29 Sep 2023 04:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 Sep 2023 04:01 PM IST
सार

बलीपुर के तिहरे हत्याकांड में दर्ज चार मुकदमों की सीबीआई ने एक साथ विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। जांच के दौरान सीबीआई ने राजा भैया, गुलशन यादव समेत उनके चार सहयोगियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।

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DSP Zia Ul Haq murder case: CBI will knock again in Balipur after ten years, Rajabhaiya problems may increase
रघुराज प्रताप सिंह, राजा भैया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हथिगवां के बलीपुर में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हें यादव उसके भाई सुरेश यादव और कुंडा सीओ जिया उल हक हत्याकांड की जांच करने के लिए दस साल बाद फिर सीबीआई की टीम दस्तक देगी। सीबीआई आने के साथ ही कुंडा में सरगर्मी भी बढ़ेगी। हत्याकांड की जांच करने के दौरान टीम पूर्व मंत्री व कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के भूमिका की जांच करेगी। टीम कब आएगी, यह निश्चित नहीं है। वहीं पूछताछ से बचने के लिए कई ग्रामीण क्षेत्र छोड़ने की तैयारी करने लगे हैं।

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बलीपुर के तिहरे हत्याकांड में दर्ज चार मुकदमों की सीबीआई ने एक साथ विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। जांच के दौरान सीबीआई ने राजा भैया, गुलशन यादव समेत उनके चार सहयोगियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। वर्ष 2014 में ट्रायल कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए जांच जारी रखने के लिए कहा था।

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हालांकि इस आदेश पर बाद में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस आदेश के खिलाफ सीओ जिया उल की पत्नी परवीन आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सीबीआई को जांच जारी रखने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बहाल कर दिया।
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सीबीआई कभी भी बलीपुर आ सकती है


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई टीम कभी भी बलीपुर आ सकती है। बलीपुर से लेकर कुंडा तक इस बात की चर्चा है। टीम अब कहां से जांच प्रारंभ करेगी, किससे क्या सवाल पूछेगी, इसके कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं सीबीआई टीम आए, इससे पहले ही बलीपुर के बहुत से लोग अब परदेस व रिश्तेदारों के यहां जाने की तैयारी करने लगे हैं। लोग इस हाईप्रोफाइल मामले से खुद को अलग रखने की जुगत करने लगे हैं।

तकनीकी साक्ष्यों पर रहेगा जोर

 

सूत्रों के मुताबिक सीओ जिया उल हक हत्याकांड की जांच में इस बार सीबीआई टीम का जोर तकनीकी साक्ष्यों पर रहेगा। घटनाक्रम में बरामद हथियारों पर मिले खून के निशान, घटनास्थल से क्या मिला, क्या नहीं मिला। बरामद हथियारों की बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट व आरोप पत्र का मिलान किया जाएगा। किन-किन गवाहों का बयान दर्ज नहीं किए गए, इस बिंदु पर गहनता से पड़ताल संभावित है। सीओ के साथ मौजूद कोतवाल व दूसरे पुलिसकर्मी उन्हें अकेला छोड़कर क्यों भागे। यदि सीओ को पीठ में गोली मारी गई तो बुलेट बरामद क्यों नहीं हुई जैसे तमाम सवालों का जवाब टीम जरूर खोजेगी। पहले हुई जांच में इन बिंदुओं को शामिल किया गया है या नहीं, इस पर सूक्ष्म जांच की जाएगी।

गुलशन की राह हो गई है जुदा

बलीपुर में हुए तिहरे हत्याकांड के समय गुलशन यादव विधायक राजा भैया के बेहद करीबी थे। दस बाद हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। राजा भैया से बगावत कर गुलशन यादव ने सपा के टिकट पर कुंडा से विधानसभा का चुनाव लड़ा। मौजूदा समय में गुलशन सपा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष हैं। राजा भैया के सामने चुनाव लड़ने वाले गुलशन की पत्नी सीमा यादव नगर पंचायत का चुनाव भी हार चुकी हैं। राह जुदा होने के बाद गुलशन का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की निगाह है।

सपा से राजा भैया की बनी है दूरी, बनाई अपनी पार्टी

प्रदेश में सपा की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया की अब राह अलग हो चुकी है। वर्ष 2017 में सपा ने कुंडा व बाबागंज सीट पर अपना प्रत्याशी न उतारकर राजा भैया व विनोद सरोज को समर्थन दिया था। लोकसभा चुनाव में बसपा व सपा के बीच हुए गठबंधन के बाद राजा भैया की सपा से दूरी बनने लगी। फिर राजा भैया ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने प्रदेश की कई सीटों पर अपना प्रत्याशी भी उतारे थे। मौजूदा समय में उनकी पार्टी के दो विधायक हैं।

सीओ की हत्या में प्रधान के परिजन बने थे आरोपी
 

सीबीआई ने आठ मार्च 2013 को जांच शुरू की थी। एक माह बाद सीबीआई ने प्रधान रहे नन्हें यादव के बेटे बबलू यादव, भाई पवन यादव, फूलचंद यादव और इनके करीबी मंजीत यादव को पकड़ा था। सीबीआई को सुराग मिला था कि अपने परिवार के दो लोगों की हत्या से आपा खो चुके बबलू यादव ने सीओ को तमंचे से गोली मारी थी। एक अगस्त 2013 को सीबीआई ने पाया था कि रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया और केस में नामजद उनके चारों करीबियों का सीओ हत्याकांड में कोई संबंध नहीं है।


मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। हालांकि अभी तक किसी प्रकार का पत्र या आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। - रघुराज प्रताप सिंह-राजा भैया, विधायक कुंडा

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