{"_id":"6925eaef382d307684034c71","slug":"dj-noiseputting-strain-on-the-ears-pratapgarh-news-c-262-1-sald1008-152628-2025-11-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: डीजे का शोर...कान पर डाल रहा जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: डीजे का शोर...कान पर डाल रहा जोर
विज्ञापन
मीरा भवन चौराहे के समीप बजाया जा रहा डीजे। संवाद
सहालग में डीजे की तेज आवाज लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले बहुत से लोगों के कान से सीटी बजाने जैसी आवाज सुनाई दे रही है। डॉक्टरों के मुताबिक डीजे से 150-200 डेसिबल की आवाज निकलती है। जो कानों पर जोर डालती है। डीजे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए भी नुकसानदायक है।
मंगलवार को राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलम के पास कान की समस्या से जुड़े 12 मरीज पहुंचे। जिनके सुनने की क्षमता प्रभावित हो गई थी। ईएनटी विशेषज्ञ ने बताया कि शादी विवाह में डीजे के करीब खड़े होने के कारण यह समस्या हुई है। भंगवा पूरे नरसिंहभान निवासी प्रमोद कुमार दुबे भी कान की समस्या लेकर पहुंचे। डांस के दौरान डीजे की तेज आवाज से उन्हें परेशानी हुई। शिवसत निवासी नवाब खान को भी बरात से लौटने पर कान में आवाज कम सुनाई दे रही है।
ईएनटी विशेषज्ञ का मानना है कि अमूमन डीजे की आवाज 150-200 डेसिबल होती है। 15 से 20 डेसिबल तक की आवाज से कान को कोई नुकसान नहीं होता है। इससे अधिक सुन रहे हैं तो आवाज चुभने लगती है। हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन
यह ध्वनि का है मानक
ध्वनि नियंत्रण मानक के अनुसार, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि की अनुमति नहीं है। जबकि डीजे का औसत साउंड स्तर 90 से 120 डेसिबल तक पहुंच जाता है। इससे न सिर्फ बुजुर्ग और बच्चों को परेशानी होती है बल्कि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी शांति भंग होती है।
आंखें खराब व हृदय रोगियों को होती है दिक्कत
लेजर लाइट वाले डीजे साउंड से आंखें भी खराब होने का खतरा रहता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक त्रिपाठी का कहना है कि लेजर लाइट की किरणें आंखों की पुतली पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित होती है, इससे जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती है। चेस्ट फिजीशियन डॉ. वकील अहमद ने बताया कि डीजे का शोर हृदय रोगियों की दिक्कत बढ़ा रहा है।
बोले अफसर
डीजे संचालकों को ध्वनि प्रदूषण से होने वाली दिक्कतों के प्रति जागरूक किया जाता है। शिकायत मिलने के बाद डीजे की ध्वनि कम कराते हुए कार्रवाई भी की जाती है। - शैलेंद्र लाल, एएसपी पूर्वी
विज्ञापन
मंगलवार को राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलम के पास कान की समस्या से जुड़े 12 मरीज पहुंचे। जिनके सुनने की क्षमता प्रभावित हो गई थी। ईएनटी विशेषज्ञ ने बताया कि शादी विवाह में डीजे के करीब खड़े होने के कारण यह समस्या हुई है। भंगवा पूरे नरसिंहभान निवासी प्रमोद कुमार दुबे भी कान की समस्या लेकर पहुंचे। डांस के दौरान डीजे की तेज आवाज से उन्हें परेशानी हुई। शिवसत निवासी नवाब खान को भी बरात से लौटने पर कान में आवाज कम सुनाई दे रही है।
विज्ञापन
ईएनटी विशेषज्ञ का मानना है कि अमूमन डीजे की आवाज 150-200 डेसिबल होती है। 15 से 20 डेसिबल तक की आवाज से कान को कोई नुकसान नहीं होता है। इससे अधिक सुन रहे हैं तो आवाज चुभने लगती है। हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन
यह ध्वनि का है मानक
ध्वनि नियंत्रण मानक के अनुसार, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि की अनुमति नहीं है। जबकि डीजे का औसत साउंड स्तर 90 से 120 डेसिबल तक पहुंच जाता है। इससे न सिर्फ बुजुर्ग और बच्चों को परेशानी होती है बल्कि अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी शांति भंग होती है।
आंखें खराब व हृदय रोगियों को होती है दिक्कत
लेजर लाइट वाले डीजे साउंड से आंखें भी खराब होने का खतरा रहता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक त्रिपाठी का कहना है कि लेजर लाइट की किरणें आंखों की पुतली पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित होती है, इससे जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती है। चेस्ट फिजीशियन डॉ. वकील अहमद ने बताया कि डीजे का शोर हृदय रोगियों की दिक्कत बढ़ा रहा है।
बोले अफसर
डीजे संचालकों को ध्वनि प्रदूषण से होने वाली दिक्कतों के प्रति जागरूक किया जाता है। शिकायत मिलने के बाद डीजे की ध्वनि कम कराते हुए कार्रवाई भी की जाती है। - शैलेंद्र लाल, एएसपी पूर्वी