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बैंकों में कैश खत्म, निराश लौटे ग्राहक
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:32 PM IST
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जिले की अधिकांश बैंक शाखाओं में शुक्रवार को रुपये खत्म हो गए। शहर की एसबीआई की मुख्य शाखा में ग्राहकों को पांच-पांच हजार रुपये देकर संतुष्ट किया गया, जबकि मीरा भवन स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स में रुपये खत्म होने से मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर दिया। इससे ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा।
जिले में कैश का संकट गहराता जा रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक में दो-दो हजार रुपये के जो नए नोट आए थे वह शुक्रवार की दोपहर खत्म हो गए। इससे नकदी का संकट गहरा गया। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में दोपहर बाद नकदी की कमी होने के कारण ग्राहकों को 24 हजार की बजाय पांच-पांच हजार रुपये भुगतान किया गया। मुख्य शाखा प्रबंधक एसएन दुबे ने बताया कि नए पुराने सभी नोट खत्म हो गए हैं। ऐसी दशा में ग्राहकों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए पांच-पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शनिवार को मानक के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इधर, मीरा भवन चौराहा स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स की शाखा में सुबह से ही रुपये खत्म हो गए थे। इससे आने वाले ग्राहकों को निराश होना पड़ा। बैंककर्मियों ने शाखा के बाहर रुपये खत्म होने का नोटिस लगाया था। ग्रामीण इलाकों में कई शाखाओं में कैश नहीं होने के कारण ताला लटकता रहा।
सहकारी समितियों से नहीं मिल रही खाद-बीज
नोटबंदी के बाद किसान सहकारी समितियों से खाद और बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। पुराने नोट कोआपरेटिव वाले ले नहीं रहे है। किसान किसी तरह से फुटकर का इंतजाम करके अपना और परिवार का पेट पालने को मजबूर हैं। सहकारी समितियों में खाद और बीज डंप हैं। खरीददार न आने से सन्नाटा पसरा हुआ है। कहीं-कहीं गोदामों में ताला लटका हुआ है।
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किसानों को इस समय कुछ सूझ नहीं रहा है। इस समय गेहूं की बुवाई का सीजन है, मगर किसानों के पास खाद और बीज खरीदने के लिए नए नोट की किल्लत है। सरकार द्वारा पांच सौ और हजार के नोट पर लगी पाबंदी से सबसे अधिक किसान परेशान हो रहे हैं। नए नोट न मिलने से उनके सामने खेती-बारी का संकट आन पड़ा है। सौ के जो भी पुराने नोट सहेज कर रखे थे उसे वह रोजमर्रा की चीजों को खरीदने में खर्च कर दे रहे हैं। बैंक, डाकघर और एटीएम से किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। पांच सौ और हजार के नोट होते हुए भी किसान कंगाल हैं। जिले की पट्टी, रानीगंज और लालगंज तहसीलों की साधन सहकारी समितियों में इस समय खाद और बीज की कोई कमी नहीं हैं, बावजूद इसके किसानों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
नींद गायब, 14-14 घंटे हो रहा काम
नोटबंदी ने जहां आम आदमी को परेशान कर रखा है, वहीं बैंक कर्मचारी पुराने नोट गिनने में दिन और रात काट रहे हैं। बैंक कर्मियों की मानें तो इस तरह मेहनत कभी नहीं करनी पड़ी। सुबह नौ बजे शाखा में आने के बाद रात 11 बजे छुट्टी मिल रही है। कभी-कभी कैश का मिलान नहीं होने पर रात को एक-एक बजे तक गिनती होती रहती है। बैंक कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है, सबसे बड़ी परेशानी उनके लिए हैं, जिनकी कर्मियों की इसी माह शादी है।
बैंककर्मियों के लिए नोटबंदी आफत बन गई है। सुबह नौ बजे से रात ग्यारह बजे तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों का खाना और नाश्ता सब कुछ बैंक में ही हो रहा है। इलाहाबाद और लखनऊ से नौकरी करने वाले कर्मचारियों के आफत आ गई है। वह होटल लेकर अब नौकरी कर रहे हैं। आलम यह है कि 14-14 घंटे नौकरी करने के बाद भी काम कम पड़ जा रहा है। नौ नवंबर को ही सर्कुलर जारी कर कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी गई है। नोटबंदी की घोषणा सबसे अधिक उन युवा बैंक कर्मियों के लिए है, जिनकी शादी इसी माह में होनी है। उनके लाख प्रयास के बाद भी अवकाश नहीं मिल रहा है। हालांकि उनके आवेदन को जीएम तक भेजकर सिर्फ एक दिन की छुट्टी मांगी जा रही है।
जिले में कैश का संकट गहराता जा रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक में दो-दो हजार रुपये के जो नए नोट आए थे वह शुक्रवार की दोपहर खत्म हो गए। इससे नकदी का संकट गहरा गया। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में दोपहर बाद नकदी की कमी होने के कारण ग्राहकों को 24 हजार की बजाय पांच-पांच हजार रुपये भुगतान किया गया। मुख्य शाखा प्रबंधक एसएन दुबे ने बताया कि नए पुराने सभी नोट खत्म हो गए हैं। ऐसी दशा में ग्राहकों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए पांच-पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शनिवार को मानक के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इधर, मीरा भवन चौराहा स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स की शाखा में सुबह से ही रुपये खत्म हो गए थे। इससे आने वाले ग्राहकों को निराश होना पड़ा। बैंककर्मियों ने शाखा के बाहर रुपये खत्म होने का नोटिस लगाया था। ग्रामीण इलाकों में कई शाखाओं में कैश नहीं होने के कारण ताला लटकता रहा।
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सहकारी समितियों से नहीं मिल रही खाद-बीज
नोटबंदी के बाद किसान सहकारी समितियों से खाद और बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। पुराने नोट कोआपरेटिव वाले ले नहीं रहे है। किसान किसी तरह से फुटकर का इंतजाम करके अपना और परिवार का पेट पालने को मजबूर हैं। सहकारी समितियों में खाद और बीज डंप हैं। खरीददार न आने से सन्नाटा पसरा हुआ है। कहीं-कहीं गोदामों में ताला लटका हुआ है।
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किसानों को इस समय कुछ सूझ नहीं रहा है। इस समय गेहूं की बुवाई का सीजन है, मगर किसानों के पास खाद और बीज खरीदने के लिए नए नोट की किल्लत है। सरकार द्वारा पांच सौ और हजार के नोट पर लगी पाबंदी से सबसे अधिक किसान परेशान हो रहे हैं। नए नोट न मिलने से उनके सामने खेती-बारी का संकट आन पड़ा है। सौ के जो भी पुराने नोट सहेज कर रखे थे उसे वह रोजमर्रा की चीजों को खरीदने में खर्च कर दे रहे हैं। बैंक, डाकघर और एटीएम से किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। पांच सौ और हजार के नोट होते हुए भी किसान कंगाल हैं। जिले की पट्टी, रानीगंज और लालगंज तहसीलों की साधन सहकारी समितियों में इस समय खाद और बीज की कोई कमी नहीं हैं, बावजूद इसके किसानों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
नींद गायब, 14-14 घंटे हो रहा काम
नोटबंदी ने जहां आम आदमी को परेशान कर रखा है, वहीं बैंक कर्मचारी पुराने नोट गिनने में दिन और रात काट रहे हैं। बैंक कर्मियों की मानें तो इस तरह मेहनत कभी नहीं करनी पड़ी। सुबह नौ बजे शाखा में आने के बाद रात 11 बजे छुट्टी मिल रही है। कभी-कभी कैश का मिलान नहीं होने पर रात को एक-एक बजे तक गिनती होती रहती है। बैंक कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है, सबसे बड़ी परेशानी उनके लिए हैं, जिनकी कर्मियों की इसी माह शादी है।
बैंककर्मियों के लिए नोटबंदी आफत बन गई है। सुबह नौ बजे से रात ग्यारह बजे तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों का खाना और नाश्ता सब कुछ बैंक में ही हो रहा है। इलाहाबाद और लखनऊ से नौकरी करने वाले कर्मचारियों के आफत आ गई है। वह होटल लेकर अब नौकरी कर रहे हैं। आलम यह है कि 14-14 घंटे नौकरी करने के बाद भी काम कम पड़ जा रहा है। नौ नवंबर को ही सर्कुलर जारी कर कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी गई है। नोटबंदी की घोषणा सबसे अधिक उन युवा बैंक कर्मियों के लिए है, जिनकी शादी इसी माह में होनी है। उनके लाख प्रयास के बाद भी अवकाश नहीं मिल रहा है। हालांकि उनके आवेदन को जीएम तक भेजकर सिर्फ एक दिन की छुट्टी मांगी जा रही है।