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डिप्टी सीएम को मुंह चिढ़ा रहा प्रतापगढ़-कौशाम्बी को जोड़ने वाला मार्ग
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:13 PM IST
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प्रतापगढ़ से कौशाम्बी को जोड़ने वाले पुल का मार्ग लंबे समय से बदहाल पड़ा है। मार्ग से गिट्टियां गायब हो गई हैं। जगह-जगह जलजमाव और कीचड़ के चलते लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बाइक सवार आए दिन गिरकर घायल हो रहे हैं। भीषण जाम भी लगता है।
कालाकांकर के यात्री घाट और मानिकपुर के बीच संग्रामपुर गांव के समीप तीन साल पहले 2015 में पुल का उद्घाटन तत्कालीन लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने किया था। जिसे विधानसभा चुनावों के निकट होने की वजह से आननफानन में शुरू कर दिया गया था। तीन साल से शुरू होने के बावजूद अभी तक कालाकांकर से संग्रामपुर स्थित पुल का संपर्क मार्ग नहीं दुरुस्त हो सका है। जर्जर संपर्क मार्ग के रास्ते गंगा पुल को पार करते ही कौशाम्बी जनपद की सिराथू तहसील लगती है, जहां के कसिया कस्बे से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आते हैं।
यही नहीं यहां पुल के दोनों पार कौशाम्बी से भाजपा सांसद विनोद सोनकर का संसदीय क्षेत्र भी लगता है। वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की ही सरकार है, मगर संपर्क मार्ग का कोई पुरसाहाल नहीं है। हैरत की बात तो यह है कि इलाहाबाद-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से निकट होने के कारण बड़े नेताओं, अफसरों का भी इसी मार्ग से आवागमन है, मगर स्थिति ढाक के तीन पात है। यह पुल न केवल प्रतापगढ़ और कौशाम्बी जनपद को आपस में जोड़ता है, बल्कि सूबे के अवध और बुंदेलखंड को भी आसानी से जोड़ता है।
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इस पुल की वजह से अवध और बुंदेलखंड की दूरी तकरीबन 100 किलोमीटर घट जाती है। इससे अयोध्या धाम, कौशाम्बी के शीतला धाम, चित्रकूट के कामदगिरि धाम के दर्शनार्थी एवं अन्य राहगीर इसी रास्ते से जाना चाहते हैं, मगर उखड़ी और कीचड़ युक्त सडक़ उन्हें संकट में डाल देती है। अफसरों-जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
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कालाकांकर के यात्री घाट और मानिकपुर के बीच संग्रामपुर गांव के समीप तीन साल पहले 2015 में पुल का उद्घाटन तत्कालीन लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने किया था। जिसे विधानसभा चुनावों के निकट होने की वजह से आननफानन में शुरू कर दिया गया था। तीन साल से शुरू होने के बावजूद अभी तक कालाकांकर से संग्रामपुर स्थित पुल का संपर्क मार्ग नहीं दुरुस्त हो सका है। जर्जर संपर्क मार्ग के रास्ते गंगा पुल को पार करते ही कौशाम्बी जनपद की सिराथू तहसील लगती है, जहां के कसिया कस्बे से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आते हैं।
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यही नहीं यहां पुल के दोनों पार कौशाम्बी से भाजपा सांसद विनोद सोनकर का संसदीय क्षेत्र भी लगता है। वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की ही सरकार है, मगर संपर्क मार्ग का कोई पुरसाहाल नहीं है। हैरत की बात तो यह है कि इलाहाबाद-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से निकट होने के कारण बड़े नेताओं, अफसरों का भी इसी मार्ग से आवागमन है, मगर स्थिति ढाक के तीन पात है। यह पुल न केवल प्रतापगढ़ और कौशाम्बी जनपद को आपस में जोड़ता है, बल्कि सूबे के अवध और बुंदेलखंड को भी आसानी से जोड़ता है।
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इस पुल की वजह से अवध और बुंदेलखंड की दूरी तकरीबन 100 किलोमीटर घट जाती है। इससे अयोध्या धाम, कौशाम्बी के शीतला धाम, चित्रकूट के कामदगिरि धाम के दर्शनार्थी एवं अन्य राहगीर इसी रास्ते से जाना चाहते हैं, मगर उखड़ी और कीचड़ युक्त सडक़ उन्हें संकट में डाल देती है। अफसरों-जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।