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साढ़े तीन साल से सऊदी में फंसा है राशिद
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:02 AM IST
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रुपये कमाने और बेहतर जिदंगी का सपना लेकर साढ़े तीन साल पहले सऊदी अरब गया मानधाता का अमैयामऊ का राशिद बुरी तरह फंस गया है। वह घर आने के लिए तड़प रहा है, लेकिन एकामा न होने के कारण उसकी वतन वापसी आसान नहीं है। जिस कफील (मालिक) के यहां वह काम करने गए था, उसी ने फर्जी शिकायत कर उसका एकामा सरकारी कार्यालय में जमा करा दिया। परेशान घरवालों ने विदेश मंत्रालय से उसकी वतन वापसी के लिए गुहार लगाई है।
अमैयामऊ निवासी राशिद अली अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा है। पिता सामुद अली किसानी कर परिवार का किसी तरह गुजर बसर करते थे। राशिद परिवार की माली हालत सुधारने व अपने सपनों को पूरा करने के लिए 20 जुलाई 2013 को मुंबई से मिले वीजा पर सऊदी अरब के रियाद शहर के लिए रवाना हुआ। राशिद की मानें तो जिस वीजे पर वह वाहन चलाने गया था, वहां डेढ़ साल तक काम किया, लेकिन वादे के मुताबिक तनख्वाह नही मिलती थी। जिसके बाद वह कफील की मर्जी से दूसरी जगह नौकरी करने चला गया। वहां भी काम करता रहा, सितंबर में घर जाने की बात कही तो कफील ने कहा कि नवंबर में चले जाना। जब राशिद के घर जाने का समय आया तो कफील मुकर गया। उसने राशिद का मोकाका सरकारी कार्यालय में यह कहते हुए जमा करा दिया कि सितंबर में ही वह उसके पास से काम छोड़कर भाग निकला है। पासपोर्ट होने के बावजूद साथ में मोकाका न होने की दशा में वह अपने घर नहीं आ पा रहा है। चार महीने की तनख्वाह तो दूर कफील उसे घर जाने के लिए भी तमाम अड़चन पैदा कर दिया है। वह कानूनी अड़चनों के चलते एयरपोर्ट तक नहीं जा पा रहा है। उसे पता है कि वहां उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
उसने कई बार हिन्दुस्तान की दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसकी मदद तो दूर किसी ने उसकी बात सुनना भी गंवारा नहीं समझा। अब उसने अपने माता-पिता को वीडियो क्लिप भेजकर सरकार से मदद की गुहार लगाई है। राशिद का दर्द सुनकर परिवार के लोग उसके लिए तड़प रहे हैं। पिता सामुद और मां समरुन निशा कहती हैं कि उनका लाल सही सलामत घर चला आए। बस यही अल्लाह से दिन-रात दुआ कर रहे हैं।
अमैयामऊ निवासी राशिद अली अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा है। पिता सामुद अली किसानी कर परिवार का किसी तरह गुजर बसर करते थे। राशिद परिवार की माली हालत सुधारने व अपने सपनों को पूरा करने के लिए 20 जुलाई 2013 को मुंबई से मिले वीजा पर सऊदी अरब के रियाद शहर के लिए रवाना हुआ। राशिद की मानें तो जिस वीजे पर वह वाहन चलाने गया था, वहां डेढ़ साल तक काम किया, लेकिन वादे के मुताबिक तनख्वाह नही मिलती थी। जिसके बाद वह कफील की मर्जी से दूसरी जगह नौकरी करने चला गया। वहां भी काम करता रहा, सितंबर में घर जाने की बात कही तो कफील ने कहा कि नवंबर में चले जाना। जब राशिद के घर जाने का समय आया तो कफील मुकर गया। उसने राशिद का मोकाका सरकारी कार्यालय में यह कहते हुए जमा करा दिया कि सितंबर में ही वह उसके पास से काम छोड़कर भाग निकला है। पासपोर्ट होने के बावजूद साथ में मोकाका न होने की दशा में वह अपने घर नहीं आ पा रहा है। चार महीने की तनख्वाह तो दूर कफील उसे घर जाने के लिए भी तमाम अड़चन पैदा कर दिया है। वह कानूनी अड़चनों के चलते एयरपोर्ट तक नहीं जा पा रहा है। उसे पता है कि वहां उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
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उसने कई बार हिन्दुस्तान की दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसकी मदद तो दूर किसी ने उसकी बात सुनना भी गंवारा नहीं समझा। अब उसने अपने माता-पिता को वीडियो क्लिप भेजकर सरकार से मदद की गुहार लगाई है। राशिद का दर्द सुनकर परिवार के लोग उसके लिए तड़प रहे हैं। पिता सामुद और मां समरुन निशा कहती हैं कि उनका लाल सही सलामत घर चला आए। बस यही अल्लाह से दिन-रात दुआ कर रहे हैं।
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