फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Pratapgarh: Curtant, running illegally in a fence engaged in the farm, had seven years of life

प्रतापगढ़: खेत में लगे बाड़ में अवैध रूप से दौड़ रहे करंट ने ली सातवीं जान, घर में मचा कोहराम 

Fri, 15 Feb 2019 12:39 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 15 Feb 2019 12:39 AM IST
विज्ञापन
Pratapgarh: Curtant, running illegally in a fence engaged in the farm, had seven years of life
चपेट में आने से मौत - फोटो : प्रतापगढ़
जिले में फसलों की सुरक्षा के नाम पर खेत में लगाई गई बाड़ में अवैध रूप से करंट दौड़ाने के चलते बुधवार रात एक सालभर के भीतर सातवीं मौत हो गई।  अंतू इलाके में बुधवार रात गेहूं की सिंचाई करने गया युवक बाड़ में दौड़ रहे करंट की चपेट में आ गया। इससे तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित लोगों ने गुरुवार सुबह शव के साथ सड़क पर जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें समझाकर किसी तरह जाम खत्म कराया। तहरीर मिलने पर पड़ोसी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। 
विज्ञापन


अंतू थाना क्षेत्र के पूरे भइया निवासी संजय शुक्ला (42) पुत्र शेषनारायण शुक्ला बुधवार की रात करीब नौ बजे गेहूं की फसल की सिंचाई करने के लिए घर से निकले थे। वह काफी देर बाद भी घर नहीं लौटे। रात में शेषनारायण पड़ोस के रहने वाले शिवम के साथ उन्हें ढूंढने के लिए निकले, लेकिन कुछ पता नहीं चला। पंपिगसेट से खेत तक खोजबीन की जाती रही, लेकिन वह नहीं मिले। गुरुवार की सुबह शेषनारायण फिर बेटे संजय की तलाश में निकले।
विज्ञापन


देखा तो वह पड़ोस के रहने वाले राजमणि शुक्ला पुत्र माता प्रसाद शुक्ला के खेत में मृत पड़े थे। यह देख वह बिलखने लगे। संजय के पैर में बाड़ का तार फंसा हुआ था। उनका पैर जल गया था। शेषनारायण इकलौते बेटे का शव लेकर गड़वारा पुलिस चौकी पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उनकी तहरीर पर पुलिस ने पड़ोसी राजमणि शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर लौटे और शुकुलपुर मझिलहा में जाम लगा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले की जानकारी मिलने पर एसओ अंतू मौके पर पहुंचे। पीड़ित परिवार की एसडीएम सदर से बात कराई। आर्थिक मदद समेत अन्य मांगों को पूरा करने का एसडीएम ने आश्वासन दिया। तब जाकर परिजन माने और शव लेकर घर चले गए। शुक्रवार को शव का अंतिम संस्कार होगा। एसओ ने बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है। खेत की सुरक्षा में लगने वाली बाड़ से अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। 

इकलौते बेटे की मौत से टूट गया परिवार 
अंतू थाना क्षेत्र के पूरे भइया निवासी संजय शुक्ला अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। दिल्ली में काम काज करने के बाद अब अपने घर आकर रह रहा था। बेटा अभिषेक व बेटी अंकिता के साथ ही पिता व माता के साथ घर पर रहकर किसानी का काम करता था। संजय की पत्नी सुनीता की चार साल पहले मौत हो चुकी है। मां के बाद अब पिता का साया अभिषेक व अंकिता के सिर से छिन गया। उसकी मौत से पूरे गांव में गम का माहौल देखने को मिला। 

खेत के पास लगा केबिल हटाया, रात में करता रहा अनदेखी 
अंतू थाना क्षेत्र के पूरे भइया निवासी शेषनारायण का आरोप है कि रात में वह अपने बेटे की खोजबीन करने खेत की ओर पहुंचे। खेत के पास राजमणि मिल गया। संजय के बारे में पूछा तो वह अंजान बन गया। गुरुवार भोर में ही बाड़ में बिजली के पोल से कटिया लगाकर लगाया गया केबिल निकाल लिया। परिवार के लोगों को वह बराबर गुमराह करता रहा। जबकि उसके खेत के पास ही संजय गिरा हुआ था।  

गैरइरादतन हत्या है बाड़ में दौड़ाए गए करंट से मौत  
खेत में बिजली के बाड़ में दौड़ाए गए करंट की चपेट में आने से लोगों की मौत हादसा नहीं है, बल्कि यह गैर इरादतन हत्या है। भले ही मुकदमा दर्ज करने या विवेचना में पुलिस खेल कर जाए लेकिन गैर इरादन हत्या का अपराध बनता है। फसल की सुरक्षा के लिए बाड़ में करंट दौड़ाने की अनुमति बिजली विभाग भी नहीं देता। 
जिले के हर कोने में फसलों को आवारा मवेशियों और नीलगाय से बचाने के लिए किसान खेतों में तार के बाड़ लगाते हैं। बहुत से किसान उस बाड़ में बिजली के पोल या फिर घरेलू कनेक्शन की लाइन से ही करंट दौड़ा देते हैं।

मवेशियों व नीलगायों को रोकने के लिए लगाई गई बाड़ में उतर रहा करंट अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। अंजान लोग उस रास्ते से गुजरते हैं और अपनी जान गंवा बैठते हैं। खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए लगाई गई बाड़ में करंट उतारना अपराध की श्रेणी में आता है। पूर्व डीजीसी अनवारुल हसन का कहना है कि लोग यह जानते हैं कि बाड़ में दौड़ाए गए करंट से किसी की जान जा सकती है।

यह जानते हुए भी लोग ऐसा करते हैं और लोगों की जान चली जाती है। ऐसे में यह गैर इरादतन हत्या का अपराध बनता है, दुर्घटना का नहीं। अमूमन पुलिस तहरीर अपने हिसाब से लिखवाकर उसे दुर्घटना में मृत्यु होने का अपराध दर्ज करा लेती है। ऐसे मामलों में पूरा दोष फसल सुरक्षा के लिए खेत में बाड़ लगाने वाले का होता है। एसडीओ विद्युत नगर अजीत यादव का कहना है कि फसलों की सुरक्षा के लिए तारों के बाड़ में करंट प्रवाहित करना अपराध है। चाहे बिजली के पोल से कटिया लगाकर बाड़ में करंट दौड़ाया जाए या फिर घरेलू कनेक्शन से करंट लगाया जाए। दोनों ही परिस्थितियों में गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ विभाग चेकिंग के दौरान कार्रवाई भी करता है। 

बिजली विभाग भी है दोषी 
किसानों द्वारा फसल की सुरक्षा के लिए खेतों में बाड़ लगाने के लिए जितना दोषी किसान हैं, उतना ही दोषी बिजली विभाग भी होता है। बिजली विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह चेक करे कि जो बिजली का कनेक्शन उसने लोगों को घरेलू या दूसरे कार्यों के लिए दिया है। उसका उपयोग कहां और कैसे हो रहा है। विभाग को हमेशा चेकिंग करनी चाहिए। बिजली विभाग द्वारा चेकिंग न करने के कारण ऐसी नौबत आती है। 

खेत स्वामी को लगाना चाहिए सावधानी का बोर्ड 
फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों का खेत में बाड़ लगाकर करंट दौड़ाना सरासर गलत है। यदि ऐसा वह लोग करते हैं भी तो उन्हें खेत के चारों ओर सावधानी का बोर्ड भी लगाना चाहिए। बिजली विभाग भी खुली लाइनों में खतरे के चिह्न लगा बोर्ड लगाता है। 

कटिया लगाकर कर ले रहे लोगों की जान 
इंसान की जिंदगी से फसलों की कीमत अधिक हो गई है। जिले में लगातार खेतों में लगी बाड़ की चपेट में आने से हो रहीं मौतों से तो ऐसे ही लगता है। कंधई, देवसरा, नगर कोतवाली, अंतू, जेठवारा में सात लोगों की जानें अब तक फसल की सुरक्षा को लेकर लगाई गई बाड़ में दौड़ाए गए करंट की चपेट में आने से जा चुकी है। अमूमन हर घटनाओं में लोगों ने खेत के करीब से गुजरी 440 वोल्ट बिजली की सप्लाई का प्रयोग किया है। पोल से कटिया लगाकर केबिल का तार बाड़ से जोड़ देते थे। सुबह होने के पहले ही वे लोग कटिया निकाल दिया करते थे। हादसे के बाद ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। 

बिजली विभाग ऐसे मामलों में नहीं देता मुआवजा 
फसलों की सुरक्षा के लिए लगाई गई बाड़ में उतरे करंट से लोगों की मौत के मामले में बिजली विभाग मुआवजा नहीं देता। मुकदमा दर्ज होने के बाद कोर्ट के फैसले पर सबकुछ निर्भर करता है। फौजदारी के अधिवक्ता आचार्य ओमप्रकाश मिश्र का कहना है कि बिजली विभाग को पीड़ित परिवार को मुआवजा देना चाहिए। भले ही इसके लिए दोषी दूसरा कोई हो। बिजली के पोल या लाइन से करंट की चपेट में आने के बाद मृत लोगों को बिजली विभाग ही मुआवजा देता है। 


इन फसलों के लिए अधिक लगाई जाती है बाड़ 
जिले के किसान नगदी फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों में बाड़ लगाते हैं। गेहूं, चना, मटर, सब्जी, तिल्ली की फसलों को बचाने के लिए किसान रतजगा करने के बजाय खेत में तार की बाड़ लगाकर करंट उतारना बेहतर समझते हैं। जिससे लोगों की जान चली जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed