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सात करोड़ के पंद्रह हजार फर्जी बकाएदार
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:02 AM IST
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बिजली चोरी
- फोटो : Bureau
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मनोज रावत
बकाएदारों से वसूली में फिसड्डी जिले के बिजली विभाग के बाबुओं ने सात करोड़ के पंद्रह हजार फर्जी बकाएदारों (अवास्तविक) की फौज खड़ी कर दी है। कई साल पहले कनेक्शन कटवा चुके इस तरह के लोग अभी भी बिजली विभाग के बकाएदार बने हुए हैं। विभाग के लोग अभी भी इनके यहां बकायदा बिल भेज रहे हैं।
इस तरह के फर्जी बिलों से लोग परेशान हो चुके हैं। ऐसे लोग जब पहले ही कनेक्शन कटने की दुहाई देते हैं तो उनकी सुनी नहीं जाती। उल्टे कार्रवाई का डर दिखाकर बाबू उनसे बिल ठीक करवाने के नाम पर लंबी चौड़ी वसूली कर लेते हैं। जिले में कई साल से चल रहे इस खेल का पर्दाफाश अब जांच अधिकारियों के खुलासे से हुआ है। उधर, इस तरह के बेनामी बकायेदारों से वसूली लेकर बड़े अफसरों ने जिले के अफसरों पर अलग से दबाव बना दिया है। जिससे अफसर वसूूली के लिये हांफ रहे हैं।
जिले में करीब चार लाख बिजली के उपभोक्ता हैं। इसमें से करीब पंद्रह हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने दस-बारह साल पहले कनेक्शन कटवा दिया था। मगर उनका नाम बिजली विभाग ने अपने अभिलेख से काटना जरूरी नहीं समझा। असली बकायेदारों के नाम के साथ इस तरह के फर्जी नाम वालों की सूची भी जोड़ दी गई। कनेक्शन कटवाने के बाद लोगों ने समझा कि वे फुरसत पा गये, मगर बिजली विभाग ने उनके नाम का मीटर चालू कर रखा था। बाबुओं की इस करतूत से अफसर भी अनजान थे। हकीकत यह है कि उन्होंने कभी भी असली और फर्जी उपभोक्ताओं की पहचान करने की जरूरत नहीं समझी। इस तरह से सालों साल बीत गए और बिल का बोझ बढ़ता गया।
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इस साल अक्टूबर माह में शासन स्तर पर समीक्षा की गई तो पता चला कि प्रतापगढ़ में करीब एक करोड़ का एरियर बकाया चला आ रहा है। बकाया देखकर अफसर चौंक पड़े। बकायेदारों के यहां दनादन बिल भेजना शुरू कर दिया गया। कनेक्शन कटवा चुके लोगों के पास जब लाखों का बकाये का बिल पहुंचा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे भागते हुए बिजली दफ्तर पहुंचे और अफसरों को सारी बात बताई। अफसरों ने बाबुओं के पास भेज दिया। पट्टी, रानीगंज, लालगंज, कुंडा, सदर और टाउन के ऐसे लोग बाबुओं के पास जाने लगे तो उन लोगों ने कमाई के लिये वसूली का खेल शुरू कर दिया। पता चला है कि डर के मारे कुछ लोगों ने बाबुओं की जेब भी गरम की। मगर जब इस तरह के फर्जी बिलों की शिकायत बढ़ने लगी तो अफसरों ने जांच कराने का निर्देश दिया।
फौरी तौर पर जो जांच सामने आई है उससे पता चल रहा है कि करीब पंद्रह हजार लोग ऐसे हैं जो कई साल पहले कनेक्शन कटवा चुके थे। मगर उनका नाम लंबे बकायेदारों की सूची में निकला। इनके ऊपर आठ करोड़ का बिल भी बकाये में लाद दिया गया है। इसमें घरेलू और व्यवसायिक दोनो तरह के लोग हैं। दस लाख के बकायेदारों के नाम अधिक हैं।
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बकाएदारों से वसूली में फिसड्डी जिले के बिजली विभाग के बाबुओं ने सात करोड़ के पंद्रह हजार फर्जी बकाएदारों (अवास्तविक) की फौज खड़ी कर दी है। कई साल पहले कनेक्शन कटवा चुके इस तरह के लोग अभी भी बिजली विभाग के बकाएदार बने हुए हैं। विभाग के लोग अभी भी इनके यहां बकायदा बिल भेज रहे हैं।
इस तरह के फर्जी बिलों से लोग परेशान हो चुके हैं। ऐसे लोग जब पहले ही कनेक्शन कटने की दुहाई देते हैं तो उनकी सुनी नहीं जाती। उल्टे कार्रवाई का डर दिखाकर बाबू उनसे बिल ठीक करवाने के नाम पर लंबी चौड़ी वसूली कर लेते हैं। जिले में कई साल से चल रहे इस खेल का पर्दाफाश अब जांच अधिकारियों के खुलासे से हुआ है। उधर, इस तरह के बेनामी बकायेदारों से वसूली लेकर बड़े अफसरों ने जिले के अफसरों पर अलग से दबाव बना दिया है। जिससे अफसर वसूूली के लिये हांफ रहे हैं।
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जिले में करीब चार लाख बिजली के उपभोक्ता हैं। इसमें से करीब पंद्रह हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने दस-बारह साल पहले कनेक्शन कटवा दिया था। मगर उनका नाम बिजली विभाग ने अपने अभिलेख से काटना जरूरी नहीं समझा। असली बकायेदारों के नाम के साथ इस तरह के फर्जी नाम वालों की सूची भी जोड़ दी गई। कनेक्शन कटवाने के बाद लोगों ने समझा कि वे फुरसत पा गये, मगर बिजली विभाग ने उनके नाम का मीटर चालू कर रखा था। बाबुओं की इस करतूत से अफसर भी अनजान थे। हकीकत यह है कि उन्होंने कभी भी असली और फर्जी उपभोक्ताओं की पहचान करने की जरूरत नहीं समझी। इस तरह से सालों साल बीत गए और बिल का बोझ बढ़ता गया।
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इस साल अक्टूबर माह में शासन स्तर पर समीक्षा की गई तो पता चला कि प्रतापगढ़ में करीब एक करोड़ का एरियर बकाया चला आ रहा है। बकाया देखकर अफसर चौंक पड़े। बकायेदारों के यहां दनादन बिल भेजना शुरू कर दिया गया। कनेक्शन कटवा चुके लोगों के पास जब लाखों का बकाये का बिल पहुंचा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे भागते हुए बिजली दफ्तर पहुंचे और अफसरों को सारी बात बताई। अफसरों ने बाबुओं के पास भेज दिया। पट्टी, रानीगंज, लालगंज, कुंडा, सदर और टाउन के ऐसे लोग बाबुओं के पास जाने लगे तो उन लोगों ने कमाई के लिये वसूली का खेल शुरू कर दिया। पता चला है कि डर के मारे कुछ लोगों ने बाबुओं की जेब भी गरम की। मगर जब इस तरह के फर्जी बिलों की शिकायत बढ़ने लगी तो अफसरों ने जांच कराने का निर्देश दिया।
फौरी तौर पर जो जांच सामने आई है उससे पता चल रहा है कि करीब पंद्रह हजार लोग ऐसे हैं जो कई साल पहले कनेक्शन कटवा चुके थे। मगर उनका नाम लंबे बकायेदारों की सूची में निकला। इनके ऊपर आठ करोड़ का बिल भी बकाये में लाद दिया गया है। इसमें घरेलू और व्यवसायिक दोनो तरह के लोग हैं। दस लाख के बकायेदारों के नाम अधिक हैं।