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जुएं को लेकर कभी हो सकता है गैंगवार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:23 PM IST
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शहर में करीब आधा दर्जन स्थानों पर जुएं की फड़ सुबह से ही सजने लगती है। जहां हर दिन लाखोें का वारा न्यारा हो रहा है। वहीं उनकी सुरक्षा और पुलिस से बचाने के लिए असलहों से लैस सुरक्षाकर्मी भी फड़ की रखवाली करते हैं। अब इस धंधे में एकछत्र राज स्थापित करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। ऐसे में इसे लेकर किसी भी दिन गैंगवार हो सकता है।
जिले की बात छोड़िए शहर में ही हर दिन जुआरियों की महफिल सज रही है। नगर कोतवाली के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर दबंग लोगों की सरपरस्ती में जुआड़ी लाखों रुपये का दांव लगा रहे हैं। सिविल लाइंस चौकी क्षेत्र में जुएं का खेल कई स्थानों पर चला रहा है। पूरे ईश्वरनाथ में नदी के किनारे, कटरा रोड, फुलवरिया, चिलबिला पुलिस चौकी क्षेत्र के फुलवरिया, भंगवा चुंगी क्षेत्र के जोगापुर समेत अनेकों स्थानों पर खुलेआम जुएं का खेल हो रहा है।
खास बात यह है कि जुआ खेलने वालों में शहर के व्यापारी, युवक, नौकरीपेशा के साथ ही रईस बाप के बिगडै़ल साहबजादे भी शामिल हैं। जुआ खेलने वालों को यह गारंटी दी जाती है कि उन तक न तो पुलिस पहुंच सकती है और न ही दूसरा कोई उन्हें परेशान कर सकता है। इसके लिए दबंग किस्म के लोग लाइसेंसी असलहे लेकर उनकी रखवाली भी करते हैं।
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जुए के अड्डों की रौनक बनने वाले लोगों को बिना गारंटर के ही रुपये दे दिए जाते हैं। हालांकि इस रकम की ब्याज भी अधिक नहीं रहती है। यदि जीत मिलती है तो तत्काल कर्ज ब्याज सहित चुकता कर दिया जाता है और हारने पर महीनेभर तक इंतजार किया जाता है। इसके बाद रुपये की वसूली के लिए परिचितों पर दबाव बनाया जाता है।
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जिले की बात छोड़िए शहर में ही हर दिन जुआरियों की महफिल सज रही है। नगर कोतवाली के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर दबंग लोगों की सरपरस्ती में जुआड़ी लाखों रुपये का दांव लगा रहे हैं। सिविल लाइंस चौकी क्षेत्र में जुएं का खेल कई स्थानों पर चला रहा है। पूरे ईश्वरनाथ में नदी के किनारे, कटरा रोड, फुलवरिया, चिलबिला पुलिस चौकी क्षेत्र के फुलवरिया, भंगवा चुंगी क्षेत्र के जोगापुर समेत अनेकों स्थानों पर खुलेआम जुएं का खेल हो रहा है।
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खास बात यह है कि जुआ खेलने वालों में शहर के व्यापारी, युवक, नौकरीपेशा के साथ ही रईस बाप के बिगडै़ल साहबजादे भी शामिल हैं। जुआ खेलने वालों को यह गारंटी दी जाती है कि उन तक न तो पुलिस पहुंच सकती है और न ही दूसरा कोई उन्हें परेशान कर सकता है। इसके लिए दबंग किस्म के लोग लाइसेंसी असलहे लेकर उनकी रखवाली भी करते हैं।
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जुए के अड्डों की रौनक बनने वाले लोगों को बिना गारंटर के ही रुपये दे दिए जाते हैं। हालांकि इस रकम की ब्याज भी अधिक नहीं रहती है। यदि जीत मिलती है तो तत्काल कर्ज ब्याज सहित चुकता कर दिया जाता है और हारने पर महीनेभर तक इंतजार किया जाता है। इसके बाद रुपये की वसूली के लिए परिचितों पर दबाव बनाया जाता है।