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ट्रेनों में फिर शुरू हुई कछुओं की तस्करी
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:28 PM IST
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ट्रेनों में कछुओं की तस्करी का काम फिर शुरू हो गया है। तस्कर कोलकाता व इसके आसपास के इलाके में कछुओं की सप्लाई कर रहे हैं। एक माह पहले पकड़े गए कछुआ तस्करों का सरगरना अभी फरार चल रहा है। ऐसे में तस्करी शुरू होने से उसके फिर से सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
अमेठी, सुल्तानपुर व उसके आस-पास का इलाका कछुआ तस्करी का गढ़ बन चुका है। तालाबों से कछुआ निकालकर तस्कर एक जगह एकत्र कर लेते हैं। इसके बाद बोरे या बड़े से बैग में भर देते हैं। लोग शक न करें इसलिए पैकिंग विशेष तरीके से की जाती है। तस्कर कछुआ ले जान के लिए अमेठी, गौरीगंज, जायस या फिर अंतू रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं।
गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले पंजाब मेल ट्रेन से जीआरपी ने कछुआ तस्कर गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा था। हालांकि सरगना नहीं मिल सका था। पूछताछ में तीनों ने सरगना के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस ने उसकी तलाश में अमेठी, पीपरपुर और सुल्तानपुर में उसके ठिकानों पर दबिश दी। मगर वह पकड़ा नहीं जा सका। इस बीच एक बार फिर कछुआ तस्करी के शुरू होने की बात सामने आ रही है। हालांकि जीआरपी तस्करी से इंकार कर रही है।
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अमेठी, सुल्तानपुर व उसके आस-पास का इलाका कछुआ तस्करी का गढ़ बन चुका है। तालाबों से कछुआ निकालकर तस्कर एक जगह एकत्र कर लेते हैं। इसके बाद बोरे या बड़े से बैग में भर देते हैं। लोग शक न करें इसलिए पैकिंग विशेष तरीके से की जाती है। तस्कर कछुआ ले जान के लिए अमेठी, गौरीगंज, जायस या फिर अंतू रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं।
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गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले पंजाब मेल ट्रेन से जीआरपी ने कछुआ तस्कर गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा था। हालांकि सरगना नहीं मिल सका था। पूछताछ में तीनों ने सरगना के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस ने उसकी तलाश में अमेठी, पीपरपुर और सुल्तानपुर में उसके ठिकानों पर दबिश दी। मगर वह पकड़ा नहीं जा सका। इस बीच एक बार फिर कछुआ तस्करी के शुरू होने की बात सामने आ रही है। हालांकि जीआरपी तस्करी से इंकार कर रही है।
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