{"_id":"5c754d19bdec227376728d61","slug":"21551191321-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस माह बाद सीएम के निर्देशों पर नहीं हुआ अमल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दस माह बाद सीएम के निर्देशों पर नहीं हुआ अमल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्र---
दस माह बाद सीएम के निर्देशों पर नहीं हुआ अमल
कंधई मधुपुर गांव में अभी भी शौचालय और आवास से वंचित हैं दलित परिवार
सीएम ने गांव में लगाई थी चौपाल, सभी सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने का दिया था निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। लगभग दस माह पहले कंधई मधुपुर गांव में चौपाल लगाकर समस्याएं सुनने वालेे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांव के सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल अभी भी नहीं हो सका है। गांव में 82 आवास और 1264 शौचालय बनाने के लिए धनराशि मिली, मगर कई लोगों को अभी लाभ नहीं मिल सका है।
मंगरौरा विकास खंड के कंधई मधुपुर गांव दस माह बाद भी पहले जैसा है। मुख्यमंत्री के दौरे के समय जो सुधार हुआ था, उससे एक कदम आगे नहीं बढ़ा है। जिस पंचायत भवन में सीएम रुके हुए थे, उसमें तो ताला लगा रहता है। बगल में बना चबूतरा टूटा हुआ है। आवास, राशनकार्ड और शौचालय का आलम यह है कि प्रधान ने अपने चहेतों को खुश करने के लिए बांट दिया है, जबकि विरोधियों को कोई लाभ नहीं दिया है। पति की मौत के बाद बच्चों की किसी तरह परवरिश करने वाली दलित रामकली पत्नी रामराज की मानें तो मुख्यमंत्री के दौरे के समय उसने अफसरों से यह कहा था कि मुझे शौचालय नहीं मिला है। इसी से नाराज होकर प्रधान ने हमें न तो आवास दिया और न ही अभी तक शौचालय बनवाया है। विधवा की मानें तो शौचालय के लिए गड्ढा भी खोदवाया था, चार माह के बाद बंद कर दिया। देवकली पत्नी छोटेलाल की मानें तो शौचालय की उम्मीद दस माह पाले हुए हैं, मगर जो अधिकारी आता है, जल्द मिलने की बात करता है, मगर उसके बाद भूल जाता है। विपिन पुत्र रामसजीवन की मानें तो शौचालय के लिए कई बार प्रधान और सचिव से मांग की गई, मगर कोई सुनने वाला नहीं है। अमरावती पत्नी रामकिशुन की मानें तो आवास के लिए कई बार अफसरों ने नाम लिखा, मगर अभी तक नहीं मिला। राशनकार्ड की आम समस्या है, राशनकार्ड किसी को मिला नहीं है, कोटेदार जिसे चाहता है देता है और फिर उसका नाम काट देता है। फिलहाल आलम यह है कि सीएम के कार्यक्रम के बाद कोई भी अधिकारी गांव झांकने तक नहीं गया।
26 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं राकेश
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। एटीएल बंद होने के 26 साल बाद भी राकेश कुमार सिंह का समायोजन नहीं होने से अफसरों का चक्कर लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी श्रमायुक्त ने गुमराह करते हुए सूचना दे दी, जिससे पीड़ित पक्ष भटक रहा है। कटरामेदनीगंज के बडनपुर निवासी राकेश कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दस माह बाद सीएम के निर्देशों पर नहीं हुआ अमल
कंधई मधुपुर गांव में अभी भी शौचालय और आवास से वंचित हैं दलित परिवार
सीएम ने गांव में लगाई थी चौपाल, सभी सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने का दिया था निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। लगभग दस माह पहले कंधई मधुपुर गांव में चौपाल लगाकर समस्याएं सुनने वालेे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांव के सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल अभी भी नहीं हो सका है। गांव में 82 आवास और 1264 शौचालय बनाने के लिए धनराशि मिली, मगर कई लोगों को अभी लाभ नहीं मिल सका है।
मंगरौरा विकास खंड के कंधई मधुपुर गांव दस माह बाद भी पहले जैसा है। मुख्यमंत्री के दौरे के समय जो सुधार हुआ था, उससे एक कदम आगे नहीं बढ़ा है। जिस पंचायत भवन में सीएम रुके हुए थे, उसमें तो ताला लगा रहता है। बगल में बना चबूतरा टूटा हुआ है। आवास, राशनकार्ड और शौचालय का आलम यह है कि प्रधान ने अपने चहेतों को खुश करने के लिए बांट दिया है, जबकि विरोधियों को कोई लाभ नहीं दिया है। पति की मौत के बाद बच्चों की किसी तरह परवरिश करने वाली दलित रामकली पत्नी रामराज की मानें तो मुख्यमंत्री के दौरे के समय उसने अफसरों से यह कहा था कि मुझे शौचालय नहीं मिला है। इसी से नाराज होकर प्रधान ने हमें न तो आवास दिया और न ही अभी तक शौचालय बनवाया है। विधवा की मानें तो शौचालय के लिए गड्ढा भी खोदवाया था, चार माह के बाद बंद कर दिया। देवकली पत्नी छोटेलाल की मानें तो शौचालय की उम्मीद दस माह पाले हुए हैं, मगर जो अधिकारी आता है, जल्द मिलने की बात करता है, मगर उसके बाद भूल जाता है। विपिन पुत्र रामसजीवन की मानें तो शौचालय के लिए कई बार प्रधान और सचिव से मांग की गई, मगर कोई सुनने वाला नहीं है। अमरावती पत्नी रामकिशुन की मानें तो आवास के लिए कई बार अफसरों ने नाम लिखा, मगर अभी तक नहीं मिला। राशनकार्ड की आम समस्या है, राशनकार्ड किसी को मिला नहीं है, कोटेदार जिसे चाहता है देता है और फिर उसका नाम काट देता है। फिलहाल आलम यह है कि सीएम के कार्यक्रम के बाद कोई भी अधिकारी गांव झांकने तक नहीं गया।
विज्ञापन
26 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं राकेश
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। एटीएल बंद होने के 26 साल बाद भी राकेश कुमार सिंह का समायोजन नहीं होने से अफसरों का चक्कर लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी श्रमायुक्त ने गुमराह करते हुए सूचना दे दी, जिससे पीड़ित पक्ष भटक रहा है। कटरामेदनीगंज के बडनपुर निवासी राकेश कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने को कहा है।
विज्ञापन