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38 अधिवक्ताओं को पुलिस ने बनाया बवाल का आरोपी 17-47-25
Updated Wed, 12 Jul 2017 06:18 PM IST
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प्रतापगढ़। आउट लाइन कोर्ट की स्थापना का विरोध करने वाले अधिवक्ताओं पर लाठियां भांजने वाली पुलिस ने 38 वकीलों को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है। पुलिस ने यह काम इतनी बारीकी से किया कि पांच साल तक इसका खुलासा नहीं हो पाया। बुधवार को फाइल खुलने की जानकारी होने पर आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर पुलिस प्रशासन की निंदा की।
16 अगस्त 2012 को लालगंज में आउट लाइन कोर्ट के विरोध में आन्दोलन कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस ने लाठियां भांजी थी।
इससे एक दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं को चोटें आई थीं। लगभग एक माह तक चले आंदोलन में अधिवक्ता कचहरी में तालाबंदी करके आउट लाइन कोर्ट का विरोध कर रहे थे। न्यायिक अधिकारियों, जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच हुई वार्ता में उस समय किसी पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। मगर अधिवक्ताओं के ढीले पड़ते ही कोतवाली पुलिस ने 38 आरोपी वकीलों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अधिवक्ताओं को इसकी भनक तक नहीं लगी और दो फरवरी वर्ष 2013 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
बुधवार को इसकी जानकारी अधिवक्ताओं को होते ही आगबबूला हो गए। न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए आन्दोलन की चेतावनी दी है। जूनियर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित शुक्ला और महामंत्री जेपी मिश्र ने जिला प्रशासन से आर-पार की लड़ाई लड़ने को कहा है। उन्होंने अधिवक्ता महेश नंदन ओझा पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग की है।
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इन अधिवक्ताओं को बनाया गया है आरोपी
तौफीक अहमद, महेंद्र प्रताप, शक्ति सिंह, किरणबाला सिंह, रामप्रताप मिश्र, रामनारायण तिवारी, ज्ञानेंद्र सिंह, नरेंद्र बहादुर, रामेंद्र बहादुर, सत्यप्रकाश, विश्वेसरनाथ ओझा, रामदयाल, नवीन कुमार तिवारी, रामकुमार, वसीमुद्दीन, राजेश कुमार दुबे, हिमांशु विक्रम सिंह, श्याम कुमार पांडेय, श्रीकांत पांडेय, विवेक दत्त मिश्र, दिनेश प्रताप सिंह, दीपक मिश्रा, राकेश बहादुर सिंह, रामकरन वर्मा, रामअवध मौर्य, खलील अहमद, बालेंद्र भूषण सिंह, संजय कुमार, इंद्रमणि शुक्ला, राकेश चौरसिया, राजकुमार मिश्र, विनोद तिवारी, राज कुमार सिंह, मार्तंड, राजनारायण तिवारी, लालधर दुबे, राजेंद्र कुमार सिंह और राममूर्ति मिश्र।
38 अधिवक्ताओं को पुलिस ने बनाया बवाल का आरोपी
न्यायालय में खुली फाइल, आक्रोशित हुए वकील
लालगंज में दीवानी की स्थापना के विरोध में वकीलों ने किया था प्रदर्शन, तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने किया था लाठीचार्ज
अमर उजाला ब्यूरो
16 अगस्त 2012 को लालगंज में आउट लाइन कोर्ट के विरोध में आन्दोलन कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस ने लाठियां भांजी थी।
इससे एक दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं को चोटें आई थीं। लगभग एक माह तक चले आंदोलन में अधिवक्ता कचहरी में तालाबंदी करके आउट लाइन कोर्ट का विरोध कर रहे थे। न्यायिक अधिकारियों, जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच हुई वार्ता में उस समय किसी पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। मगर अधिवक्ताओं के ढीले पड़ते ही कोतवाली पुलिस ने 38 आरोपी वकीलों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अधिवक्ताओं को इसकी भनक तक नहीं लगी और दो फरवरी वर्ष 2013 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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बुधवार को इसकी जानकारी अधिवक्ताओं को होते ही आगबबूला हो गए। न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए आन्दोलन की चेतावनी दी है। जूनियर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित शुक्ला और महामंत्री जेपी मिश्र ने जिला प्रशासन से आर-पार की लड़ाई लड़ने को कहा है। उन्होंने अधिवक्ता महेश नंदन ओझा पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग की है।
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इन अधिवक्ताओं को बनाया गया है आरोपी
तौफीक अहमद, महेंद्र प्रताप, शक्ति सिंह, किरणबाला सिंह, रामप्रताप मिश्र, रामनारायण तिवारी, ज्ञानेंद्र सिंह, नरेंद्र बहादुर, रामेंद्र बहादुर, सत्यप्रकाश, विश्वेसरनाथ ओझा, रामदयाल, नवीन कुमार तिवारी, रामकुमार, वसीमुद्दीन, राजेश कुमार दुबे, हिमांशु विक्रम सिंह, श्याम कुमार पांडेय, श्रीकांत पांडेय, विवेक दत्त मिश्र, दिनेश प्रताप सिंह, दीपक मिश्रा, राकेश बहादुर सिंह, रामकरन वर्मा, रामअवध मौर्य, खलील अहमद, बालेंद्र भूषण सिंह, संजय कुमार, इंद्रमणि शुक्ला, राकेश चौरसिया, राजकुमार मिश्र, विनोद तिवारी, राज कुमार सिंह, मार्तंड, राजनारायण तिवारी, लालधर दुबे, राजेंद्र कुमार सिंह और राममूर्ति मिश्र।
38 अधिवक्ताओं को पुलिस ने बनाया बवाल का आरोपी
न्यायालय में खुली फाइल, आक्रोशित हुए वकील
लालगंज में दीवानी की स्थापना के विरोध में वकीलों ने किया था प्रदर्शन, तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने किया था लाठीचार्ज
अमर उजाला ब्यूरो