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Pratapgarh News: इंस्पेक्टर की हत्या मामले में दोषी को 10 वर्ष कारावास की सजा
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प्रतापगढ़। करीब साढ़े 10 साल पहले शहर के स्टेट बैंक के पास वाइन शॉप के करीब इंस्पेक्टर अनिल कुमार (45) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट लखनऊ ने दोषी राजू सोनी उर्फ बोचा को 10 साल कारावास की सजा सुनाई है। दोषी बोचा को कोर्ट ने नौ हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
19 नवंबर 2015 को तत्कालीन कोतवाल अयोध्या निवासी अनिल कुमार शाम को वाइन शॉप के पास स्थित वैष्णवी होटल में गए थे। होटल से नीचे उतरते समय गुटों में गोली चलने लगी थी। एक गुट के अभिषेक के पेट को छूते हुए गोली निकल गई। कोतवाल बीच-बचाव के लिए दौड़े तो हमलावरों ने उन पर भी फायर झोंक दिया था।
गोली उनके सीने में दाहिने तरफ लगी। ताबड़तोड़ गोली चलने से घटनास्थल पर भगदड़ मच गई थी। मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर बलराम मिश्र, अमित सिंह उनको जिला अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी सुनील सक्सेना ने घायल अभिषेक से पूछताछ की। उन दिनों इंस्पेक्टर अनिल कुमार को अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ल हत्याकांड मामले में निलंबित किया गया था। इंस्पेक्टर की हत्या के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर 29 जून 2018 को मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। लंबी जांच के बाद सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। संवाद
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19 नवंबर 2015 को तत्कालीन कोतवाल अयोध्या निवासी अनिल कुमार शाम को वाइन शॉप के पास स्थित वैष्णवी होटल में गए थे। होटल से नीचे उतरते समय गुटों में गोली चलने लगी थी। एक गुट के अभिषेक के पेट को छूते हुए गोली निकल गई। कोतवाल बीच-बचाव के लिए दौड़े तो हमलावरों ने उन पर भी फायर झोंक दिया था।
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गोली उनके सीने में दाहिने तरफ लगी। ताबड़तोड़ गोली चलने से घटनास्थल पर भगदड़ मच गई थी। मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर बलराम मिश्र, अमित सिंह उनको जिला अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी सुनील सक्सेना ने घायल अभिषेक से पूछताछ की। उन दिनों इंस्पेक्टर अनिल कुमार को अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ल हत्याकांड मामले में निलंबित किया गया था। इंस्पेक्टर की हत्या के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर 29 जून 2018 को मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। लंबी जांच के बाद सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। संवाद