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प्रायोगिकी परीक्षा में कालेजों, परीक्षकों ने की मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 02 Jun 2018 12:35 AM IST
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इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय की तमाम हिदायतों के बावजूद कालेजों ने प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा में जमकर मनमानी की। परीक्षकों ने मनमाने तरीके से नंबर बांटे। जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नाराजगी जताते हुए कालेजों और परीक्षकों को फटकार लगाई है।
विश्वविद्यालय ने प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं, आंतरिक व बाह्य परीक्षकों का संयुक्त छायाचित्र, वीडियोग्राफी कराकर विश्वविद्यालय भेजने का निर्देश दिया था। परीक्षा के बाद महाविद्यालयों से प्राप्त छायाचित्र, वीडियोग्राफी का परीक्षण किया गया तो पाया गया कि कुछ महाविद्यालयों द्वारा भेजे गए छायाचित्र और वीडियोग्राफी में कट-पेस्ट करते हुए छेड़छाड़ की गई है। वहीं वीडियोग्राफी एक से दो मिनट की ही है। यहीं नही विश्वविद्यालय ने परीक्षकों को निर्देश दिया था कि जिन छात्र-छात्राओं को 70 से अधिक अंक दिए गए हों, उनकीउत्तरपुस्तिकाएं महाविद्यालय एक सप्ताह के अंदर विश्वविद्यालय को भेजेंगे।
जांच के दौरान पाया गया कि बाह्य परीक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को 97 प्रतिशत और आंतरिक मूल्यांकन में शत प्रतिशत अंक दिए गए हैं। जिसका कोई औचित्य उपलब्ध नहीं कराया गया। विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक महाविद्यालयों से प्राप्त वीडियोग्राफी में परीक्षा के दौरान प्रबंधक भी उपस्थित पाए गए। जबकि परीक्षा के दौरान बाहरी लोगों के साथ ही प्रबंधक को भी परीक्षा कक्ष में जाने से मना किया गया था। 70 प्रतिशत से अधिक पाने वाले छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। कुलपति प्रो. राजेंदस्त्रत्त्र प्रसाद ने सूचना उपलब्ध न कराने वाले परीक्षकों और महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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विश्वविद्यालय ने प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं, आंतरिक व बाह्य परीक्षकों का संयुक्त छायाचित्र, वीडियोग्राफी कराकर विश्वविद्यालय भेजने का निर्देश दिया था। परीक्षा के बाद महाविद्यालयों से प्राप्त छायाचित्र, वीडियोग्राफी का परीक्षण किया गया तो पाया गया कि कुछ महाविद्यालयों द्वारा भेजे गए छायाचित्र और वीडियोग्राफी में कट-पेस्ट करते हुए छेड़छाड़ की गई है। वहीं वीडियोग्राफी एक से दो मिनट की ही है। यहीं नही विश्वविद्यालय ने परीक्षकों को निर्देश दिया था कि जिन छात्र-छात्राओं को 70 से अधिक अंक दिए गए हों, उनकीउत्तरपुस्तिकाएं महाविद्यालय एक सप्ताह के अंदर विश्वविद्यालय को भेजेंगे।
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जांच के दौरान पाया गया कि बाह्य परीक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को 97 प्रतिशत और आंतरिक मूल्यांकन में शत प्रतिशत अंक दिए गए हैं। जिसका कोई औचित्य उपलब्ध नहीं कराया गया। विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक महाविद्यालयों से प्राप्त वीडियोग्राफी में परीक्षा के दौरान प्रबंधक भी उपस्थित पाए गए। जबकि परीक्षा के दौरान बाहरी लोगों के साथ ही प्रबंधक को भी परीक्षा कक्ष में जाने से मना किया गया था। 70 प्रतिशत से अधिक पाने वाले छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। कुलपति प्रो. राजेंदस्त्रत्त्र प्रसाद ने सूचना उपलब्ध न कराने वाले परीक्षकों और महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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