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कालेजों में तैनाती, चला रहे हैँ कोचिंग

Sat, 06 Dec 2014 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 06 Dec 2014 11:42 PM IST
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coaching classes
प्रतापगढ़। डिग्री और इंटरमीडिएट कालेजों के शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के बजाय कोचिंग संस्थान चलाकर कमाई कर रहे हैं। कालेज के प्रिंसिपलों के आंखों में धूल झोंककर अच्छा अंक दिलाने के लिए भी ठेका भी ले रखे हैं। अधिकांश कोचिंग संचालक ऐसे हैं, जो कम पढे़-लिखे होने के बावजूद युवाओं को तरासने की जिम्मेदारी उठाए हुए हैं।
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जिले में कोचिंग संस्थान चलाकर मोटी रकम की कमाई करने का धंधा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। जूनियर और सीनियर सेक्शन की कोचिंग चलाने वाले संचालक तैनाती वाले स्कूलों में कभी-कभार जाते हैं। वर्तमान में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और डिग्री कालेजों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी की कोचिंग अधिकांश छात्र-छात्राएं करते हैं।
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 राजकीय और सहायता प्राप्त कालेजों के  अधिकांश शिक्षक ऐसे हैं, जो अधिकारियों की चापलूसी में व्यस्त करके अपना धंधा चला रहे हैं। शहर के कुछ कोचिंग संस्थान ऐसे भी हैं, जो पढे़-लिखे कम हैं, फिर भी प्रशिक्षकों को मासिक वेतन पर तैनात कर कोचिंग चलवा रहे हैं। लालगंज इलाके के एक शिक्षक का बेटा पढ़ने-लिखने में अच्छा नहीं था। उसे नौकरी नहीं मिली, तो उसने शहर में कोचिंग सेंटर खोल लिया है। वर्तमान में आलम यह है कि कोचिंग में बच्चों को संख्या इतनी बढ़ गई है कि कई शिफ्ट में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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कोचिंग संचालक ने मासिक वेतन पर शिक्षकों को तैनात कर रखा है। एक डिग्री कालेज का आलम यह है कि बीएससी में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को कोचिंग पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता है। कोचिंग नहीं पढ़ने वाले बच्चों को मौखिक परीक्षा में कम से कम नंबर दिया जाता है। इस कोचिंग संस्थान के संचालक विश्वविद्यालय से अच्छा अंक दिलाने के लिए ठेका लेते हैं। सामान्यतया एक प्रश्नपत्र के लिए तीन से चार हजार रुपये तक वसूले जाते हैं।


 डिग्री और इंटर कालेजों में तैनात शिक्षकों ने कोचिंग नहीं चलाने का शपथपत्र कालेजों में दे रखा है। इसके बावजूद वह कोचिंग चला रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है प्रिंसिपलों को भी उनके कोचिंग संचालन की जानकारी होने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।


प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ ही आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं के लिए भी कोचिंग चल रही है। यह अलग बात है कि योग्य और अनुभवी प्रशिक्षक नहीं हैं, फिर भी वह युवाओं को सफलता का टिप्स दे रहे हैं।



शिव कुमार ओझा, डीआईओएस, प्रतापगढ़ बताया कि जिले के सभी कोचिंग संस्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। जिन लोगों ने अभी तक नवीनीकरण नहीं कराया है, और जो अवैध कोचिंग चला रहे हैं। सबके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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