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छात्रों से लेकर सरकार तक को चूना लगा रहे कोचिंग संस्थान

Fri, 05 Dec 2014 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 05 Dec 2014 11:35 PM IST
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coaching classes
प्रतापगढ़। जिले में कोचिंग संस्थानों ने जाल फैला रखा है। बड़े-बड़े बोर्ड के साथ वह छात्र-छात्राओं को लुभा रहे हैं और उसके बाद उनसे लम्बी-चौड़ी फीस वसूल रहे हैं। संस्थान बच्चों से तो फीस वसूल रहे हैं लेकिन सरकारी फीस में चोरी कर रहे हैं। 487 रजिस्टर्ड कोचिंग संस्थानों में से महज सात ने रिन्यूवल कराया है।
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कोचिंग संस्थान खोलकर शिक्षा देना व्यवसाय बन गया है। पहले लोग ज्ञान का दान देते थे लेकिन अब इसका बाजारीकरण हो चुका है। इसमें सबसे सरल साधन कोचिंग  है। 10 से 20 बच्चे इकट्ठा कर इसकी शुरुआत की जाती है। बच्चे बढ़े तो शिक्षक बढ़ा लिए जाते हैं। छात्र-छात्राएं अच्छी शिक्षा के चक्कर में उनकी लंबी चौड़ी फीस भी बर्दाश्त कर रहे हैं। बच्चे तो अपनी फीस समय से दे रहे हैं लेकिन कोचिंग संचालक शिक्षा विभाग को धोखा दे रहे हैं।
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 कुछ साल पहले जिले में कोचिंग को लेकर बवाल मचा था तो तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने एक पैनल गठित कर दिया था। इसमें कन्या विद्या धन का सत्यापन करने वाले शामिल थे। यह पैनल ऐसे कोचिंग संस्थानों पर पहुंचकर उसकी धर पकड़ करता था। इसका असर यह हुआ कि 487 कोचिंग संस्थानों ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसके बाद कई साल बीत गए लेकिन रिन्यूवल सिर्फ सात ने कराया है। जो नए खुले हैं उनका रजिस्ट्रेशन नहीं है।
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 जिले में इस समय रजिस्टर्ड और गैर रजिस्टर्ड कोचिंग संस्थानों पर नजर दौड़ाई जाए तो इनकी संख्या 600 पार है। कई कोचिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं की संख्या 200 से 500 तक है और यह दो शिफ्टों में संचालित हैं। जिले में कई छात्र संगठन हैं जो छात्रों के हित की बात तो करते हैं लेकिन इन संस्थानों पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। यही नहीं विभागीय लोग इन कोचिंग संस्थानों पर रजिस्ट्रेशन या रिन्यूवल के लिए कोई दबाव नहीं बना रहे हैं। इनकी रूटीन चेकिंग भी पिछले कई सालों से नहीं की गई है। डीआईओएस एसके ओझा ने बताया कि पांच नवंबर के बाद से टीम बनाकर कोचिंग संस्थानों की चेकिंग की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि नए कौन हैं और पुराने कौन। रजिस्ट्रेशन व रिन्यूवल न कराने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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