फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   BSP failed to open account in Pratapgarh

Pratapgarh News: प्रतापगढ़ में खाता खोलने में नाकाम रही बसपा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 01:24 AM IST
विज्ञापन
BSP failed to open account in Pratapgarh
बसपा प्रत्याशी को सिर्फ पार्टी के कॉडर मत ही मिले। यही कारण है कि इस बार भी जिले में बसपा खाता खोलने में असफल रही। बसपा प्रत्याशी को सिर्फ 79,480 मतों से संतोष करना पड़ा। उनकी जमानत भी नहीं बच सकी।
विज्ञापन

हालांकि पिछले दो लोकसभा चुनावों में राष्ट्रवाद और हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेले जाने से बसपा का कॉडर वोट भी भाजपा में बंटता रहा। मगर इस भाजपा के चार सौ पार के नारे ने बसपा के मूल वोटरों के मन में यह अवधारणा बन गई कि अगर ऐसा हुआ तो बाबा साहब का संविधान खतरे में आ जाएगा। लिहाजा कॉडर का वोट बसपा में एकजुट होकर चला गया। जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा।
विज्ञापन

जिले की लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछड़ा, मुस्लिम, ब्राह्मण कार्ड पहले भी खेलने में सफल रही। मगर प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर खाता खोलने में नाकाम रही है। 1989 से लोकसभा चुनाव का सफर शुरू करने वाली बसपा बेल्हा में एक बार मुस्लिम, तीन बार ब्राह्मण और चार बार पिछड़ी जाति का प्रत्याशी मैदान में उतारा। अलग-अलग तबके के प्रत्याशी उतारने का मकसद साफ था कि कई वर्गों को जोड़कर जीत हासिल की जा सके, मगर उसे हर बार नाकामी ही हाथ लगी। 1989 में पार्टी ने वीरेंद्र कुमार को मैदान में उतारा। उन्हें केवल 31429 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। अगले चुनाव यानी 1991 में पार्टी ने जातीय समीकरण देख हरीनाथ सिंह यादव को उतारा लेकिन नतीजा और खराब रहा। हरीनाथ को 18132 वोट के साथ चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। 1996 में बशीर पहलवान बसपा उम्मीदवार बने। क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है लेकिन बशीर को केवल 36964 वोट मिले और वह भी चौथे स्थान पर रहे। 1998 में जयसिंह यादव पार्टी के उम्मीदवार बने। जय सिंह ने गंभीरता से चुनाव लड़ा लेकिन चौथे स्थान पर ही रहे। हालांकि उन्हें पहले के सभी प्रत्याशियों के मुकाबले सबसे अधिक 62787 वोट मिले। 1999 में अशोक कुमार पार्टी प्रत्याशी बने। तब तक बसपा के परंपरागत वोटर एकजुट दिखने लगे थे जिसका नतीजा रहा कि अशोक को 78,923 वोट हासिल हुए। इसके बाद भी वह तीसरे स्थान पर ही रहे। 2004 के चुनाव में एसपी मिश्र सेनानी बसपा उम्मीदवार बने। वह भी तीसरे स्थान से आगे नहीं बढ़ पाए लेकिन वोट बढ़ा और उन्हें 82876 वोट मिले। 2009 के चुनाव में पहली बार पार्टी दूसरे स्थान तक पहुंची। बसपा ने शिवाकांत ओझा को उम्मीदवार बनाया और तमाम समीकरण के सहारे पहली बार बसपा उम्मीदवार डेढ़ लाख वोट के पार पहुंचे। उन्हें 169137 मत मिले। 2014 में बसपा के आसिफ सिद्दीकी को 1,75,799 मतों से संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2019 के चुनाव में सपा और बसपा प्रत्याशी अशोक त्रिपाठी को 3,18,539 मत मिले थे, मगर भाजपा प्रत्याशी से 1,17,952 मत से हार गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी प्रथमेश मिश्र को 79,480 मतों से संतोष करना पड़ा। जिससे जमानत भी नहीं बच सकी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed