{"_id":"60e5b7048ebc3eec6a726043","slug":"beti-bachao-beti-padhao-scheme-could-not-run-three-steps-in-three-years-25-lakhs-are-dumped-pratapgarh-news-ald310259126","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन साल में तीन कदम नहीं चल पाई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना, 25 लाख पड़ें हैं डंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन साल में तीन कदम नहीं चल पाई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना, 25 लाख पड़ें हैं डंप
विज्ञापन
भ्रूण हत्या पर रोक लगाने और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए तीन वर्ष पहले प्रारंभ की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना तीन कदम भी नहीं चल सकी है। गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने के लिए विभाग को पहले चरण में 25 लाख रुपये मिले, मगर न तो अभी तक रुपये का सदुपयोग किया गया और न ही योजना धरातल पर कहीं दिखाई दे रही है।
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने, लिंग परीक्षण पर रोक लगाने और अभिभावकों में बेटी-बेटे का भेद दूर करने के लिए शासन ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना प्रारंभ की है। इस योजना के तहत जिले के 17 ब्लाकों में जागरूकता अभियान, ब्लाक, जिला स्तर पर व्यापक कार्यक्रम का आयोजन कर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं बेटियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाना था।
जिला प्रोबेशन विभाग से संचालित इस योजना के लिए वर्ष 2018-19 में विभाग को 25 लाख रुपये का बजट दिया गया। विभाग धनराशि का सदुपयोग नहीं कर पाया। इसलिए वह वर्ष 2020 में 50 लाख और 2021 में 75 लाख रुपये पाने से वंचित रह गया। तीन वर्षों में विभाग की ओर से न तो कोई कार्यक्रम कराया गया और न ही रुपये का सदुपयोग किया गया। इससे योजना पूरी तरह फाइलों में दबकर रह गई है।
विज्ञापन
बेटियों को दो-दो लाख रुपये मिलने की अफवाह पर आए हजारों आवेदन
तीन वर्ष पूर्व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना शुरू होने पर अफवाह उड़ी कि बेटियों को दो-दो लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। फिर क्या था, जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में हजारों की संख्या में फार्म पहुंच गए। विभाग को नोटिस निकाल कर मुख्य दरवाजे पर चस्पा करना पड़ा कि इस योजना में बालिकाओं को अनुदान देने की कोई योजना नहीं है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना संचालित है, मगर कोरोना संक्रमण काल में जागरूकता का कार्यक्रम स्थगित किया गया है। विभाग को 25 लाख रुपये मिले हैं। जल्द ही शीर्ष अधिकारियों की अनुमति लेकर गांव-गांव जागरूकता अभियान प्रारंभ किया जाएगा। रंग बहादुर वर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकार
विज्ञापन
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने, लिंग परीक्षण पर रोक लगाने और अभिभावकों में बेटी-बेटे का भेद दूर करने के लिए शासन ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना प्रारंभ की है। इस योजना के तहत जिले के 17 ब्लाकों में जागरूकता अभियान, ब्लाक, जिला स्तर पर व्यापक कार्यक्रम का आयोजन कर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनीं बेटियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाना था।
विज्ञापन
जिला प्रोबेशन विभाग से संचालित इस योजना के लिए वर्ष 2018-19 में विभाग को 25 लाख रुपये का बजट दिया गया। विभाग धनराशि का सदुपयोग नहीं कर पाया। इसलिए वह वर्ष 2020 में 50 लाख और 2021 में 75 लाख रुपये पाने से वंचित रह गया। तीन वर्षों में विभाग की ओर से न तो कोई कार्यक्रम कराया गया और न ही रुपये का सदुपयोग किया गया। इससे योजना पूरी तरह फाइलों में दबकर रह गई है।
विज्ञापन
बेटियों को दो-दो लाख रुपये मिलने की अफवाह पर आए हजारों आवेदन
तीन वर्ष पूर्व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना शुरू होने पर अफवाह उड़ी कि बेटियों को दो-दो लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। फिर क्या था, जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में हजारों की संख्या में फार्म पहुंच गए। विभाग को नोटिस निकाल कर मुख्य दरवाजे पर चस्पा करना पड़ा कि इस योजना में बालिकाओं को अनुदान देने की कोई योजना नहीं है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना संचालित है, मगर कोरोना संक्रमण काल में जागरूकता का कार्यक्रम स्थगित किया गया है। विभाग को 25 लाख रुपये मिले हैं। जल्द ही शीर्ष अधिकारियों की अनुमति लेकर गांव-गांव जागरूकता अभियान प्रारंभ किया जाएगा। रंग बहादुर वर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकार