{"_id":"586017164f1c1b2a41eeb71c","slug":"banking-business-efected","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी के बाद बैंकों में 400 करोड़ का कारोबार प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी के बाद बैंकों में 400 करोड़ का कारोबार प्रभावित
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Mon, 26 Dec 2016 12:36 AM IST
विज्ञापन
आईटी का छापा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी में जनपद के तमाम छोटे उद्योगों को चोट पहुंची है। इसके साथ ही नोटबंदी ने बैंकिंग उद्योग की भी हालत पतली कर दी है। नोटबंदी के बाद लेनदेन के दबाव में बैंक अपने कर्ज वाली स्कीमों पर काम नहीं कर सकी हैं। इससे पिछले 44 दिनों में जनपद के सभी बैंकों में 400 करोड़ का एडवांस कारोबार प्रभावित हुआ है। वर्तमान में जिस तरह लेनदेन के लिए लंबी लाइनें बैंकों में लगी हुई है। उससे घाटा और बढ़ने की उम्मीद है।
देश में आठ नवंबर की शाम नोटबंदी लागू हुई। तब से बैंकें रुपये के लेनदेन का जरिया बनकर रह गई हैं। लेनदेन के दबाव में बैंकों का लोनिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बताते चलें कि बैंकें ग्राहकों की सहूलियत के लिए ब्याज पर कार लोन, हाउसिंग लोग, एजूकेशन लोन, व्यापार ऋण से लेकर तमाम लोन अपने खाताधारकों को उपलब्ध कराती है। यहीं नही आम जनता के हित में जारी सरकारी योजनाओं के लोन भी बैंकों के माध्यम से किए जाते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद ग्राहकों में पुराने नोट बदलने और पैसा निकालने की इस कदर होड़ मची हुई है कि लोनिंग का काम बैंकों से पीछे छूट गया है। इसके चलते जनपद की बैंकों की शाखाओं में एक भी लोन पास नहीं हो सका है। इससे बैंकिंग कारोबार को जबरजस्त झटका लगा है। लोगों की मानें तो बैंकों में एडवांस का करीब 400 करोड़ रुपये का बिजनेस प्रभावित हुआ है। ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में ही करीब सवा करोड़ रुपये की लोनिंग का कार्य ठप हुआ। अकेले जनपद की सबसे बड़ी एसबीआई बैंक भी इससे अछूती न रही। एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक एसएन दुबे ने बताया कि नोटबंदी के बाद लोनिंग का कामकाज बाधित हुआ है। लेकिन अब सबकुछ ठीक हो चला है।
ऋण लेने वाले बैंकों का लगा रहे चक्कर
सरकारी योजना के लाभार्थी हो या हाउसिंग , वाहन लोन कराने वाले लोग। सभी की फाइलें बैंकों में अटकी हुई है। लोग बैंक से ऋण लेकर अपना उद्योग लगाना चाहते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद उनकी समस्या बढ़ती ही जा रही है। सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए जांच के बाद करनपुर निवासी सुभाष, दहिलामऊ निवासी कुसुम, अभिषेक की फाइलें बैंक पहुंच गई हैं लेकिन नोटबंदी के बाद उनकी फाइल पर काम रुक गया। जिससे वे बैंकों का चक्कर हर दिन लगा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
देश में आठ नवंबर की शाम नोटबंदी लागू हुई। तब से बैंकें रुपये के लेनदेन का जरिया बनकर रह गई हैं। लेनदेन के दबाव में बैंकों का लोनिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बताते चलें कि बैंकें ग्राहकों की सहूलियत के लिए ब्याज पर कार लोन, हाउसिंग लोग, एजूकेशन लोन, व्यापार ऋण से लेकर तमाम लोन अपने खाताधारकों को उपलब्ध कराती है। यहीं नही आम जनता के हित में जारी सरकारी योजनाओं के लोन भी बैंकों के माध्यम से किए जाते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद ग्राहकों में पुराने नोट बदलने और पैसा निकालने की इस कदर होड़ मची हुई है कि लोनिंग का काम बैंकों से पीछे छूट गया है। इसके चलते जनपद की बैंकों की शाखाओं में एक भी लोन पास नहीं हो सका है। इससे बैंकिंग कारोबार को जबरजस्त झटका लगा है। लोगों की मानें तो बैंकों में एडवांस का करीब 400 करोड़ रुपये का बिजनेस प्रभावित हुआ है। ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में ही करीब सवा करोड़ रुपये की लोनिंग का कार्य ठप हुआ। अकेले जनपद की सबसे बड़ी एसबीआई बैंक भी इससे अछूती न रही। एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक एसएन दुबे ने बताया कि नोटबंदी के बाद लोनिंग का कामकाज बाधित हुआ है। लेकिन अब सबकुछ ठीक हो चला है।
विज्ञापन
ऋण लेने वाले बैंकों का लगा रहे चक्कर
सरकारी योजना के लाभार्थी हो या हाउसिंग , वाहन लोन कराने वाले लोग। सभी की फाइलें बैंकों में अटकी हुई है। लोग बैंक से ऋण लेकर अपना उद्योग लगाना चाहते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद उनकी समस्या बढ़ती ही जा रही है। सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए जांच के बाद करनपुर निवासी सुभाष, दहिलामऊ निवासी कुसुम, अभिषेक की फाइलें बैंक पहुंच गई हैं लेकिन नोटबंदी के बाद उनकी फाइल पर काम रुक गया। जिससे वे बैंकों का चक्कर हर दिन लगा रहे हैं।
विज्ञापन